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JK: आमिर माग्रे के परिवार वालों को अब तक नहीं मिला शव, OGW का ठप्पा हटाने के लिए घर वाले चाहते है मामले की न्यायिक जांच

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: September 13, 2022 16:46 IST

आपको बता दें कि आमिर माग्रे के परिवार के साथ डा गुल और बिजनेसमेन मुहम्मद अल्ताफ बट के परिवार भी यही चाहते हैं कि मामले की न्यायिक जांच हो ताकि उनके परिजनों पर आतंकी समर्थक या ओजीडब्ल्यू होने का कलंक हट सके।

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ठळक मुद्देछह महीने बाद भी आमिर माग्रे के परिवार वालों को उसका लाश नहीं मिला है। इसी साल मई में जहां कोर्ट ने लाश को परिवार वालों को सौंपने को कहा था, अब वह फैसला पलट चुका है। ऐसे आमिर माग्रे के परिवार समेत अन्य पीड़ित भी इस मामले की न्यायिक जांच चाहते है।

जम्मू: इस साल मई महीने में जब जम्मू कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने आमिर माग्रे के पिता मुहम्मद लतीफ माग्रे की याचिका पर सुनाया था तो रामबन के आमिर अहमद माग्रे का परिवार अपने आपको खुशनसीब मानने लगा था क्योंकि उच्च न्यायालय ने उसके ‘आतंकी’ बेटे का शव देने का फैसला दिया था। 

लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस फैसले को पलट दिए जाने के उपरांत वह एक बार फिर अपने आपको बदनसीब ही मान रहा है क्योंकि वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहा है। आपको बता दें कि पिछले साल नवम्बर महीने में उसके बेटे की हैदरपोरा में हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी। 

आमिर माग्रे की लाश परिवार वालों को अब तक नहीं मिली

आमिर माग्रे के घर वाले नहीं मानते कि वह उनका बेटा आतंकी था या ओजीडब्ल्यू है। हालांकि उसी मुठभेड़ में मारे गए दो अन्य कथित ओजीडब्ल्यू डा मुदस्सर गुल और मुहम्मद अल्ताफ बट के शवों को पुलिस ने उनके परिवारवालों को सौंप दिया था पर वे भी उन्हें पाकर इसलिए खुश नहीं थे क्योंकि अभी तक उन पर से ओजीडब्ल्यू का ठप्पा नहीं हटा है। ठप्पा नहीं हटने के कारण दोनों परिवारों के लिए समाज में जीना मुश्किल हो गया है।

आमिर माग्रे को उसका परिवार ‘देशभक्त’ मानता है

माग्रे का परिवार ‘देशभक्त’ माना जाता है क्योंकि उसके अब्बाजान मुहम्मद लतीफ माग्रे ने वर्ष 2005 में एक आतंकी को अपने हाथों से मार गिराया था और प्रशासन व सेना ने उनको बहादुरी के लिए सम्मानित किया था। इसी को आधार बना परिवार चाहता था कि उसके बेटे का शव भी उन्हें सौंप दिया जाए ताकि वे उसे अपने इलाके में दफन कर सकें।

मई में कोर्ट ने क्या कहा था

मई में जस्टिस संजीव कुमार ने आमिर माग्रे के पिता की याचिका पर 13 पन्नों पर आधारित फैसला सुनाते हुए कहा था कि जम्मू कश्मीर प्रदेश सरकार आमिर माग्रे के शव को कब्र से निकलवाने का प्रबंध करने का निर्देश दिया जाता है। शव उत्तरी कश्मीर में वडर पायीन में दफन है। अगर शव खराब हो गया और उसे उसके वारिसों को सौंपने की स्थति में नहीं है तो फिर याचिकाकर्ता को करीबी रिश्तेदारों की मौजूदगी में अपने मजहब व परंपरा के मुताबिक अंतिम रस्मों की अदायगी करने दी जाए। 

ऐसी स्थिति में याचिककर्ता लतीफ को उसके पुत्र का शव प्राप्त करने व उसके सम्मानजनक दफनाने के अधिकार से वंचित किए जाने के कारण पांच लाख बतौर मुआवजा भी दिया जाए। लेकिन ऐसे में अब यह उम्मीद खत्म हो गई है।

हर किसी से लगा चुके है गुहार

माग्रे आतंकी था या नहीं या फिर वह आतंकियों का समर्थक था या नहीं यह उस जांच में सामने आ जाएगा जिसका आदेश मुठभेड़ पर मचे बवाल के बाद उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने दिया था। लेकिन माग्रे के परिवार का अभी भी बुरा हाल है। 

वे प्रशासन में नीचे से लेकर ऊपर तक सभी से मिन्नतें कर चुके थे और मिल चुके थे ताकि उनके बेटे का शव मिल सके, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई है और न ही माग्रे के परिवार की ‘देशभक्ति’ में कहीं काम आई थी।

माग्रे के परिवार समेत अन्य पीड़ित चाहते है न्यायिक जांच

माग्रे का परिवार इसे अपने आप पर एक धब्बे के तौर पर ले रहा है। यही हाल डा गुल और बिजनेसमेन मुहम्मद अल्ताफ बट के परिवारों का है जो चाहते हैं कि मामले की न्यायिक जांच हो ताकि उनके परिजनों पर आतंकी समर्थक या ओजीडब्ल्यू होने का कलंक हट सके। 

आपको बता दें कि डा गुल के पिता गुलाम मुहम्मद राथर अपने पौते पोतियों व बहू के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं क्योंकि उन्हें डर है कि उनके बेटे पर ओजीडब्ल्यू होने का जो धब्बा लगा है वह कहीं उन चारों का भविष्य खराब न कर दे।

टॅग्स :क्राइमजम्मू कश्मीरआतंकवादीभारतीय सेनाकोर्ट
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