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महाराष्ट्र: रिलायंस जियो में नौकरी ने नाम पर झांसा! 3 लोगों ने करीब 1000 लोगों से ऐसे ऐंठे हजारों रुपए, जानें पूरा मामला

By आजाद खान | Updated: July 26, 2023 15:07 IST

मामले में बोलते हुए पुलिस ने कहा है कि "लोगों की गरीबी का फायदा उठाते हुए ये आरोपी उन्हें कुछ पैसे देते थे और उनके नाम पर सिम कार्ड और बैंक खाते पंजीकृत करवाते थे। वे इन सिम कार्ड और बैंक खाते को अपराध के लिए इस्तेमाल किया करते थे।"

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ठळक मुद्देरिलायंस जियो में नौकरी ने नाम पर करीब एक हजार लोगों के साथ ठगी हुई है। पुलिस ने इन ठगी के अंजाम देने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग कंपनी के जाली ट्रेडमार्क, ईमेल आईडी और लेटरहेड का उपयोग कर ठगी को अंजाम देते थे।

मुंबई: पुलिस ने हाल में एक गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है जिन पर करीब एक हजार लोगों को रिलायंस जियो में नौकरी का झांसा देना और उनसे पैसे लेने का आरोप लगा है। मामले में बोलते हुए पुलिस ने बताया कि आरोपी कंपनी के जाली ट्रेडमार्क, ईमेल आईडी और लेटरहेड का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा देते थे। 

गिरफ्तार हुए आरोपियों के पास से पुलिस को सात सिम कार्ड, 12 मोबाइल फोन और 18 बैंक खातें मिले है जो इस अपराध के लिए इस्तेमाल किया जाता था। मामले में रिलायंस के प्रवक्ता से भी जानकारी लेने की कोशिश की गई थी, उन्हें घटना की जानकारी है लेकिन इस मुद्दे पर कुछ बयान देने से उन्होंने परहेज किया है। 

क्या है पूरा मामला

पुलिस के मुताबिक, करीब 33 लोगों ने रिलायंस जियो के अधिकारियों को चिट्ठी लिख कर इस धोखाधड़ी की जानकारी दी थी। इसकी जानकारी मिलने पर कंपनी के मुंबई स्थित डिप्टी मैनेजर सुधीर नायर ने इस सिलसिले में एक आधिकारिक शिकायत दर्ज की थी। बता दें कि जुलाई के पहले हफ्ते में रबाले पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।

एफआईआर पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पाया कि इनका ठिकाना नोएडा के उत्तर प्रदेश में था। पुलिस ने यह भी बताया कि नौकरी पोर्टलों से डेटा लीक होने के बाद से वे उन नंबर पर कॉल किया करते थे जो नौकरी की तलाश में थे। 

ऐसे करते थे अपराध को अंजाम

मामले में बोलते हुए पुलिस ने बताया कि "यह गिरोह फर्जी टेलीफोन कॉल आयोजित करने के बाद युवा उम्मीदवारों को फर्जी ईमेल आईडी के माध्यम से रिलायंस जियो के फर्जी ऑफर लेटर भेजता था। यही नहीं ये लोग प्रोसेसिंग फीस, कंपनी के मोबाइल फोन, लैपटॉप, ट्रेनिंग फीस, नौकरी के समझौते, वेतन खाता खोलने, जीएसटी, गेट पास सुरक्षा के बहाने गिरोह लोगों से पैसे की मांग किया करते थे।"

पुलिस ने यह भी बताया कि "लोगों की गरीबी का फायदा उठाते हुए ये आरोपी उन्हें कुछ पैसे देते थे और उनके नाम पर सिम कार्ड और बैंक खाते पंजीकृत करवाते थे। वे इन सिम कार्ड और बैंक खाते को अपराध के लिए इस्तेमाल किया करते थे।"

टॅग्स :क्राइममहाराष्ट्रPolice
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