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कानपुर की लाल इमली मिल और विक्टोरिया मिल की जमीन वापस?, यूपी में केंद्र सरकार के बंद पड़े उद्यमों की भूमि वापस लेगी योगी सरकार?

By राजेंद्र कुमार | Updated: February 25, 2026 19:30 IST

सरकार ने यू टर्न लेते हुए केंद्र सरकार से लाल इमली और केंद्र सरकार के बंद पड़े अन्य उद्यमों की जमीन को वापस लेकर उस पर लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अपार्टमेंट बनाने तथा उद्योग लगाने का फैसला किया है.

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ठळक मुद्देमनोज सिंह ने जिलों मे जिलाधिकारियों को दिया है.कानपुर में अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई लाल इमली मिल भी है.चादरें, शाल और कम्बल न सिर्फ भारत में बल्कि यूरोप के कई देशों तक पहुँचते थे.

लखनऊः उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बने केंद्र सरकार के बंद पड़े उद्यमों की जमीन योगी सरकार वापस लेगी. योगी सरकार के इस फैसले के तहत कानपुर में अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई लाल इमली मिल और लेदर फैक्ट्री की जमीन, प्रयागराज में त्रिवेणी स्ट्रक्चरल्स लि. की 321 एकड़ और भारत पंप्स एंड कंप्रेसर लिमिटेड की भूमि वापस ली जाएगी. लाल इमली मिल को छह साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिर से चलाने का वादा कानपुर की जनता से किया था. इसके बाद अब सरकार ने यू टर्न लेते हुए केंद्र सरकार से लाल इमली और केंद्र सरकार के बंद पड़े अन्य उद्यमों की जमीन को वापस लेकर उस पर लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अपार्टमेंट बनाने तथा उद्योग लगाने का फैसला किया है.

योगी सरकार की इस मंशा को पूरा करने के लिए स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने केंद्र सरकार से उक्त उद्यमों की जमीन वापस लेने की कार्रवाई शुरू की है. उक्त दो जिलों के अलावा राज्य में केंद्र सरकार के कितने उद्यम लंबे समय से बंद पड़े हैं, इसका भी ब्यौरा जुटाने के निर्देश मनोज सिंह ने जिलों मे जिलाधिकारियों को दिया है.

इन उद्यमों की भूमि वापस लेने की कार्रवाई शुरू

मनोज कुमार सिंह के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में केंद्र सरकार ने सार्वजनिक उपक्रम लगाने के लिए प्रदेश से समय-समय पर काफी भूमि ली है.इन ज़मीनों में लेदर फैक्ट्री और कंबल फैक्ट्री और कपड़ा बनाने के बड़ी-बड़ी फैक्ट्री लगाई गई. ऐसे ही उद्यमों में कानपुर में अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई लाल इमली मिल भी है.

करीब 26 एकड़ में बनी इस मिले को 1876 में ब्रिटिश हुकूमत ने स्थापित किया था. इस मिल में एक पाली में करीब आठ हजार लोग कार्य करते थे. 18 जून 1981 में इस मिल का अधिग्रहण केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय ने किया था. इस मिल में बनी ऊनी चादरें, शाल और कम्बल न सिर्फ भारत में बल्कि यूरोप के कई देशों तक पहुँचते थे.

वर्षों से यह मिल बंद पड़ी है. इसी तरह से कानपुर में एनटीसी म्योर मिल, विक्टोरिया मिल और लेदर फैक्ट्री भी बंद पड़ी है. प्रयागराज में भी केंद्र सरकार की मलकीयत वाली  त्रिवेणी स्ट्रक्चरल्स लिमिटेड और भारत पंप्स एंड कंप्रेसर लिमिटेड भी लंबे से बंद और और इसके शुरू होने की उम्मीद भी खत्म हो चुकी है. जिसके चलते प्रदेश सरकार ने इन उद्यमों की जमीन वापस लेने का फैसला किया है.

एनटीसी म्योर मिल के पास 1,78,304 वर्ग मीटर, विक्टोरिया मिल के पास 128504 वर्ग मीटर और प्रयागराज में त्रिवेणी स्ट्रक्चरल्स लिमिटेड के पास 321 एकड़ तथा भारत पंप्स एंड कंप्रेसर लिमिटेड के पास 295 एकड़ भूमि है. इसके अलावा भी सूने के कई जिलों में केंद्र सरकार के बंद पड़े उद्यमों के पास काफी जमीन है. इसका ब्यौरा एकत्र किया जा रहा है.

मनोज सिंह का कहना है

यूपी के मुख्य सचिव रहे और वर्तमान में स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह कहते हैं कि केंद्र सरकार ने वर्षों पहले यूपी के विकास को लेकर कई बड़े उद्यम स्थापित किए थे, लेकिन बदले समय के साथ इनकी उपयोगिता समाप्त होती गई और ये बंद होते गए.

ऐसे बंद पड़े केंद्र सरकार के उद्यमों की भूमि वापस लेकर सूबे की सरकार ऐसी जमीन पर अपार्टमेंट बनाकर लोगों की आवासीय समस्या को हल करने के साथ ही इन्हे उद्योगों को देना चाहती है. शहर के अंदर वाली ऐसी भूमि पर मिश्रित भू-उपयोग की अनुमति देने की योजना है. ताकि शहर के भीतर ही लोगों की आवासीय समस्या का समाधान हो और उक्त भूमि का भी व्यावसायिक इस्तेमाल हो सके.

जबकि शहर के बाहर की भूमि को उद्योग लगाने के लिए दिए जाने की योजना है. इस सोच के तहत ही स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन ने डीएम, मंडलायुक्तों से केंद्र सरकार के बंद पड़े उद्यमों को लेकर रिपोर्ट मांगी है. मनोज कुमार सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार से बंद पड़े उद्यमों की भूमि को वापस लेने के लिए कागजी कार्रवाई करने के साथ ही सरकार इसके लिए नीति लाने जा रही है.

अभी कानपुर और प्रयागराज जिले की रिपोर्ट इस संबंध में मिली है, जल्दी ही अन्य जिलों से भी रिपोर्ट मिल जाएगी. उसके बाद एक नीति लाकर केंद्र सरकार के बंद पड़े उद्यमों की भूमि को वापस लेने के किए केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाएगा.    

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