लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीते नौ वर्षों से उत्तर प्रदेश को लेकर बड़े-बड़े दावे करते आ रहे हैं. उनके अनुसार उत्तर प्रदेश देश ही सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बन गया. बीते नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने छह करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी की रेखा के ऊपर उठाने का कार्य किया है. ऐसे तमाम दावे मुख्यमंत्री और सरकार के अन्य मंत्री रोज करते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी यह नहीं बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से ही जल्दी जिले जौनपुर, गाजीपुर और आजमगढ़ जिले में महिलाओं के ऐसे जनधन खाते बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जिनमे एक भी पैसा जमा नहीं है.
बैंकों की ओर से राज्य सरकार को भेजी गई जनधन खातों की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के आठ जिलों के 20 लाख जनधन खातों में एक भी पैसा जमा नहीं है. मुख्यमंत्री सहित उनकी सरकार के सभी मंत्रियों को इस रिपोर्ट की जानकारी है. फिर भी कोई मंत्री इस दागदार आंकड़े को सुधारने के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है. ऐसे में बैंकों के लिए बोझ बनते जा रहे इन जनधन खातों को मनी म्यूल अकाउंट के रूप में संदिग्ध श्रेणी में डाल दिया गया है और सरकार के स्तर से बैंकों को यह कदम उठाने से रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया.
इन जिलों के बैंक खातों में शून्य बैलेंस :
रिजर्व बैंक के आला अफसरों से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 10.22 करोड़ जनधन खाते हैं. जबकि देश में 57.58 करोड़ खाते हैं। इस लिहाज से जनधन खातों को लेकर यूपी की हिस्सेदारी करीब 18% है, जो देश में सर्वाधिक है. इनमें 53% महिला खाताधारक हैं और इनमें 58 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रकम जमा है. जबकि पूर्वांचल और पश्चिमांचल के आठ जिलों में 1.60 करोड़ से ज्यादा जनधन खाते हैं. इन जनधन खातों में से 20 लाख खातों का बैलेंस शून्य है.
शेष बचे खातों में करीब 7,800 करोड़ रुपए जमा हैं. यूपी के जिन आठ जिलों के 20 लाख जनधन खातों में एक भी पैसा नहीं है. इनमें से पूर्वांचल के चार जिले जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़ और कुशीनगर तथा पश्चिमी यूपी के चार जिले आगरा, मेरठ, सहारनपुर और बिजनौर हैं. जिन 20 लाख जनधन खातों में बैलेंस शून्य है, उनमें से अधिकांश खाते महिलाओं के हैं. ये बैंक खाते बैंकों के लिए बोझ बन गए हैं क्योंकि इन्हें सक्रिय रखने के लिए बैंकों को सालाना 700 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं.
बैंक के अफसरों के अनुसार, एक जनधन खाते को सक्रिय और व्यवस्थित रखने के लिए बैंकों को हर साल लगभग 3,500 रुपए तक का खर्च उठाना पड़ता है. इस खर्च में आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, कर्मचारियों का वेतन और शाखा का रखरखाव शामिल है. इस तरह यूपी के इन 8 जिलों के खाली खातों को मेनटेन रखने में ही बैंकों को हर साल 7,00 करोड़ रुपए बैंकों को खर्च करने पड़ रहे हैं.
संदिग्ध श्रेणी में डाले गए खाते :
इसके चलते ही यूपी के आठ जिलों में शून्य बैलेंस वाले वाले 20 लाख जनधन खातों को मनी म्यूल के रूप में संदिग्ध श्रेणी में डालने का फैसला किया गया है. बैंक अफसरों का कहना है कि यह कदम इसलिए भी उठाया गया है क्योंकि इन जनधन खातों का उपयोग अपराधियों द्वारा अवैध धन को सफेद करने या साइबर ठगी के पैसे को घुमाने के लिए किया जा सकता है.
ऐसे खातों को अक्सर अपडेटेड केवाईसी नहीं होता जिसका फायदा उठाकर साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के जरिये इनके संचालन की आशंका रहती है क्योंकि साइबर ठगी करने वाले लंबे समय से खाली पड़े खाते में अचानक बड़ी रकम भेज कर उसे तुरंत निकाल लेते हैं.
ऐसा ना हो इसके लिए ही इन जनधन खातों को संदिग्ध श्रेणी में डालने का फैसला किया गया है. फिलहाल बैंकों का यह फैसला प्रदेश सरकार के खुशहाल यूपी के दावे को दाग लगा रहा है कि यूपी में 20 लाख लोग ऐसे भी हैं जिनके बैंक खाते में शून्य बैलेंस है.
शून्य बैलेंस वाले खातों का ब्यौरा :
जिला खातों की संख्या
जौनपुर 3.32 लाखआजमगढ़ 2.71 लाखकुशीनगर 2.45 लाखगाजीपुर 2.09 लाखआगरा 2.39 लाखसहारनपुर 2.36 लाखबिजनौर 2.27 लाखमेरठ 2.26 लाख