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आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशक, पूर्णकालिक निदेशकों के लिए योग्यता निर्धारित की

By भाषा | Updated: June 25, 2021 22:38 IST

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मुंबई 25 जून भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को प्राथमिक शहरी सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशकों (एमडी) और पूर्णकालिक निदेशकों (डब्ल्यूटीडी) के लिए शैक्षिक और जरुरी योग्यता निर्धारित कर दी। इन पदों पर सांसद और विधायकों की नियुक्ति नहीं की जा सकेगी।

आरबीआई ने प्रबंधन और पूर्णकालिक निदेशकों की नियुक्ति को लेकर दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि नगर निगमों के प्रतिनिधि प्राथमिक शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) में ऐसे पदभार संभालने के योग्य नहीं होंगे।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि प्रबंध और पूर्णकालिक निदेशकों का इन पदों पर नियुक्ति के लिए स्नातकोत्तर होना या वित्तीय जानकार होना जरुरी है।

साथ ही उनके लिये चार्टर्ड/कॉस्ट एकाउंटेंट, एमबीए (वित्त) या बैंकिंग तथा सहकारी व्यवसाय प्रबंधन में डिप्लोमा की पढ़ाई होना भी आवश्यक हैं। आवेदन करने वाले व्यक्ति की आयु 35 वर्ष से कम या 70 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

आरबीआई ने अधिसूचना जारी कर कहा, ‘‘पद के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास बैंकिंग क्षेत्र में मध्यम/वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर काम करने का कम से कम आठ वर्षों का संयुक्त अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा उधार देने (ऋण कंपनियां) और परिसंपत्ति वित्तपोषण में लगी हुई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में भी इतना अनुभव होना आवश्यक है।’’

सांसदों, विधायकों और नगर निगमों और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों के अलावा व्यापार या किसी व्यापारी कंपनी में पर्याप्त रुचि रखने वाले व्यक्ति भी ऐसे पदों पर नियुक्ति के लिए योग्य नहीं होंगे।

नियुक्ति के कार्यकाल के संबंध में आरबीआई ने कहा कि व्यक्ति को अधिकतम पांच वर्षों के लिए नियुक्त किया जा सकता है और वह पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होगा। हालांकि वे 15 वर्ष से अधिक तक अपने पर नहीं रह सकते हैं। लेकिन जरुरी होने पर तीन साल की अवधि के बाद फिर से नियुक्त किया जा सकता है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि यदि कोई यूसीबी कार्यकाल की समाप्ति से पहले एमडी/डब्ल्यूटीडी की सेवाओं को समाप्त करने का निर्णय लेता है, तो उसे रिजर्व बैंक की पूर्वानुमति लेनी होगी।

आरबीआई ने एक अलग सूचना में 5,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक की संपत्ति वाले शहरी सहकारी बैंकों द्वारा मुख्य जोखिम अधिकारी (सीआरओ) की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया।

उसने कहा कि प्रत्येक शहरी सहकारी बैंकों के लिए यह जरुरी है कि वे अपने व्यापार प्रोफाइल और रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप उपयुक्त जोखिम प्रबंधन तंत्र स्थापित करने पर अपना ध्यान केंद्रित करे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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