लाइव न्यूज़ :

कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला,₹23 करोड़ चुकाने के बाद PNB, SBI पर लगी पाबंदी हटाई

By आकाश चौरसिया | Updated: September 5, 2024 11:21 IST

कर्नाटरक सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए बड़ा आदेश पारित कर दिया है, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) पर लगी पाबंदी को हटा दिया है। दोनों बैंकों ने ब्याज सहित 23 करोड़ रुपए एक साल बाद लौटाए हैं।

Open in App
ठळक मुद्देकर्नाटक सरकार ने विवादस्पद फैसले को रद्द कर दिया पंजाब नेशनल बैंक और SBI को ऑपरेशन शुरू करने का दिया मौका हालांकि, इसके लिए दोनों ने ब्याज समेत 23 करोड़ रुपए चुकाए

नई दिल्ली: कर्नाटक सरकार ने बड़े फैसला लेते हुए विवादास्पद निर्देश को रद्द करते हुए, भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के दो बड़े बैंकों के ऑपरेशन को वापिस से सुचारु रूप से शुरू करने का आदेश दे दिया है। हालांकि, दोनों बैंकों ने 23 करोड़ रुपए चुका दिए हैं। पहले 12 अगस्त को राज्य वित्त विभाग ने सर्कुलर जारी कर कह दिया है कि सरकारी संस्थान, सभी विभाग, बोर्ड, कॉरपोरेशन, यूनिर्वसिटी, लोकल बॉडी और सार्वजनिक रूप से जुड़े सेक्टर को एसबीआई और पीएनबी के साथ गठजोड़ को बंद करने को कहा है।

सरकार ने इस कठोर कदम के पीछे गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए धन की वसूली में बैंकों की कथित सहयोग की कमी को कारण बताया था। हालांकि, मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सर्कुलर को चार दिन बाद ही निलंबित कर दिया गया था।

रिपोर्ट सामने आते ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) द्वारा कथित गबन के तहत आए कुल 22.67 करोड़ रुपए को एक साल का ब्याज सहित लौटाने के बाद आया है। सरकार सरकार ने इस कठोर कदम के पीछे गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए धन की वसूली में बैंकों की कथित सहयोग की कमी को कारण बताया था। हालाँकि, मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सर्कुलर को चार दिन बाद ही निलंबित कर दिया गया था।

मनीकंट्रोल के हवाले से 1 सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "SBI ने ₹9.67 करोड़ लौटाए और पीएनबी ने ₹13 करोड़ लौटाएं, दोनों ने 1 साल के ब्याज के साथ अदालती मामलों के नतीजे लंबित रहने के बीच चुकाए।" पहले मामले में सितंबर 2011 में पीएनबी की राजाजीनगर शाखा में कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा की गई ₹25 करोड़ की सावधि जमा शामिल थी। परिपक्वता पर, पीएनबी ने कथित तौर पर केवल ₹13 करोड़ जारी किए, शेष राशि एक दशक से अधिक समय से अनसुलझी थी।

दूसरा मामला कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पूर्व स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, जो अब एसबीआई का हिस्सा है, में ₹10 करोड़ की सावधि जमा के आसपास केंद्रित है। कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का उपयोग करके एक निजी कंपनी के ऋण का निपटान करने के लिए इस जमा राशि का दुरुपयोग किया गया था। चूँकि बैंकों ने अब विवादित धनराशि और ब्याज वापस कर दिया है, राज्य सरकार का परिपत्र वापस लेने का निर्णय इस वित्तीय गतिरोध के समाधान का प्रतीक है।

टॅग्स :कर्नाटकसिद्धारमैयाकांग्रेसBJP
Open in App

संबंधित खबरें

भारतकेरल सीएम सतीशन का पहला आदेश: महिलाओं के लिए मुफ़्त बस यात्रा, आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में ₹3,000 की बढ़ोतरी

भारतसीएम डॉ. मोहन ने लिया मंत्रियों से एक-एक काम का हिसाब, जानें सरकार-संगठन के बीच क्या हुई बात?

भारतकौन हैं वडास्सेरी दामोदर मेनन सतीशन?, परावुर सीट से 2006, 2011, 2016, 2021 और 2026 में जीत हासिल की?

भारतमहाराष्ट्र विधान परिषद की 16 सीट पर चुनाव, 18 जून को पड़ेंगे वोट, निर्वाचन आयोग की घोषणा, जानें मतगणना कब?

भारतBilaspur Nikay Chunav Results: कुल 11 सीट और भाजपा ने 9 और कांग्रेस ने 2 सीट पर दर्ज की जीत?

कारोबार अधिक खबरें

कारोबार12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भीमाशंकर मंदिर पर खर्च होंगे 172.22 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र सरकार ने 6 तीर्थ और विरासत स्थलों के लिए 993 करोड़ रुपये मंजूर

कारोबारGold Price Today: सोने का भाव आज का 18 मई 2026, जानें दिल्ली, मुंबई समेत बड़े शहरों में सोने की कीमत

कारोबार₹6 ट्रिलियन का नुकसान! सेंसेक्स में 833.20 अंक की गिरावट, क्रूड का भाव 111.2 डॉलर प्रति बैरल

कारोबारऊर्जा संकट और बढ़ते विदेशी मुद्रा संकटः मितव्ययिता की शुरुआत तो बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी!

कारोबारघरों की ‘होम मिनिस्टर’ पर बचत की जिम्मेदारी?, पीएम मोदी की ‘बचत और आत्मनिर्भरता’ की अपील?