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ITR Filing 2025: क्या है नॉन-ऑडिट कैटेगरी? क्या इसके बिना भर सकते हैं रिटर्न, जानें यहां

By अंजली चौहान | Updated: September 11, 2025 11:55 IST

ITR Filing 2025: 15 सितंबर के विस्तार से गैर-ऑडिट करदाताओं को लाभ होगा, जिसमें बड़े पैमाने पर वेतनभोगी व्यक्ति, एचयूएफ, पेंशनभोगी और छोटे व्यवसाय के मालिक शामिल हैं, जिन्हें आयकर अधिनियम के तहत अपने खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं है।

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ITR Filing 2025: आईटीआर फाइल करने का लास्ट महीना चल रहा है। इनकम टैक्स विभाग की अंतिम तारीख को कुछ ही दिन बचे हैं ऐसे में आखिरी समय में भी कुछ लोग अपना आईटीआर दाखिल कर रहे हैं। आयकर विभाग ने आधिकारिक तौर पर आकलन वर्ष (AY) 2025-26 के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2025 तक बढ़ा दी है। इस विस्तार से गैर-ऑडिट करदाताओं को लाभ होगा, जिनमें मुख्य रूप से वेतनभोगी व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), पेंशनभोगी और छोटे व्यवसाय के मालिक शामिल हैं, जिन्हें आयकर अधिनियम के तहत अपने खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं है।

नॉन-ऑडिट कैटेगरी क्या है? 

इनकम टैक्स रिटर्न  फाइलिंग में, नॉन-ऑडिट कैटेगरी उन करदाताओं के लिए है जिनके खातों का ऑडिट कराना आवश्यक नहीं है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:

वेतनभोगी व्यक्ति: ऐसे लोग जिनकी आय वेतन, पेंशन, एक हाउस प्रॉपर्टी, और/या अन्य स्रोतों (जैसे ब्याज) से होती है।

छोटे व्यवसाय और पेशेवर: वे लोग जो प्रिजंप्टिव टैक्सेशन स्कीम, यानी आयकर अधिनियम की धारा 44AD, 44ADA, या 44AE के तहत अपनी आय की गणना करते हैं, और जिनका टर्नओवर ऑडिट की सीमा से कम है।

ये करदाता सरलीकृत फॉर्म का उपयोग करके फाइल कर सकते हैं और उन्हें अंतिम समय में फाइलिंग से बचने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

डेडलाइन मिस करने पर क्या होगा?अगर आप 15 सितंबर, 2025 की डेडलाइन मिस कर देते हैं, तो आपको कई वित्तीय और कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है:

1. विलंब शुल्कआयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत, डेडलाइन के बाद ITR फाइल करने पर विलंब शुल्क लगता है।

अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से अधिक है, तो ₹5,000 का जुर्माना लगता है।

अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख या उससे कम है, तो जुर्माना ₹1,000 तक सीमित है।

2. ब्याज अगर आपका कोई टैक्स बकाया है, तो आपको आयकर अधिनियम की धारा 234A के तहत उस बकाया राशि पर 1% प्रति माह की दर से ब्याज देना होगा। यह ब्याज मूल डेडलाइन (15 सितंबर) से लेकर आपके रिटर्न फाइल करने की तारीख तक की अवधि के लिए लगता है।

3. नुकसान को आगे ले जाने की अनुमति नहीं अगर आपको किसी वित्तीय वर्ष में नुकसान (जैसे, व्यवसाय में या पूंजीगत लाभ से) हुआ है, तो आप उस नुकसान को अगले वर्षों में समायोजित करने के लिए आगे नहीं ले जा पाएंगे (हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को छोड़कर)। इससे आपकी भविष्य की कर देयता बढ़ सकती है।

4. रिफंड में देरी 

अगर आपको आयकर विभाग से कोई रिफंड मिलना है, तो देरी से ITR फाइल करने पर रिफंड की प्रक्रिया में भी देरी होती है।

5. कानूनी कार्रवाई 

जानबूझकर ITR फाइल न करने पर, खासकर अगर आपकी कर योग्य आय अधिक है, तो आयकर विभाग कानूनी कार्रवाई कर सकता है, जिसमें अभियोजन और कारावास तक का प्रावधान है।

अगर आप डेडलाइन मिस कर भी देते हैं, तो भी आप 31 दिसंबर, 2025 तक 'विलंबित रिटर्न' फाइल कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको विलंब शुल्क और ब्याज का भुगतान करना होगा। समय पर ITR फाइल करना सबसे अच्छा विकल्प है ताकि आप इन सभी परेशानियों से बच सकें।

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