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1 अक्टूबर से बदलाव, घड़ियां, चॉकलेट, बिस्कुट होंगे सस्ते, देखिए असर

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 30, 2025 13:43 IST

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विजरलैंड हैं। इस समझौते पर 10 मार्च 2024 को हस्ताक्षर किए गए थे।

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ठळक मुद्दे घड़ियां, चॉकलेट, बिस्कुट और घड़ियां जैसे उच्च-गुणवत्ता वाले स्विजरलैंड के उत्पाद कम कीमतों पर उपलब्ध होंगे।भारत इस व्यापार समझौते के तहत इन वस्तुओं पर सीमा शुल्क को 10 वर्ष में चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर देगा।अगले पांच वर्ष में 50 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है जिससे भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

नई दिल्लीः भारत और चार देशों के यूरोपीय समूह ईएफटीए के बीच मुक्त व्यापार समझौता बुधवार से लागू होगा। इसके तहत भारत को इस समूह से 15 साल में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता मिली है। इसके अलावा स्विजरलैंड की घड़ियों, चॉकलेट और कटे एवं पॉलिश किए गए हीरों जैसे कई उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क की अनुमति दी गई है। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विजरलैंड हैं। इस समझौते पर 10 मार्च 2024 को हस्ताक्षर किए गए थे।

घरेलू ग्राहकों को घड़ियां, चॉकलेट, बिस्कुट और घड़ियां जैसे उच्च-गुणवत्ता वाले स्विजरलैंड के उत्पाद कम कीमतों पर उपलब्ध होंगे क्योंकि भारत इस व्यापार समझौते के तहत इन वस्तुओं पर सीमा शुल्क को 10 वर्ष में चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर देगा। संघ ने 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।

समझौते के कार्यान्वयन के बाद 10 वर्ष के भीतर 50 अरब अमेरिकी डॉलर तथा अगले पांच वर्ष में 50 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है जिससे भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। यह भारत द्वारा अब तक हस्ताक्षरित किसी भी व्यापार समझौते में सहमत अपनी तरह की पहली प्रतिबद्धता है।

इस समझौते को आधिकारिक तौर पर व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता (टीईपीए) कहा जाता है। इसमें यह प्रावधान है कि यदि प्रस्तावित निवेश किसी कारणों से नहीं आता है तो भारत चारों देशों को दी जाने वाली शुल्क रियायतों को पुनः संतुलित या निलंबित कर सकता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को दोहराया था कि टीईपीए एक अक्टूबर से लागू होगा।

ईएफटीए देश यूरोपीय संघ (ईयू) का हिस्सा नहीं हैं। यह मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने और उसे तेज करने के लिए एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना उन देशों के लिए एक विकल्प के रूप में की गई थी जो यूरोपीय समुदाय में शामिल नहीं होना चाहते थे। भारत 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ के साथ एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर अलग से बातचीत कर रहा है।

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