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बिजली की कम खपत करने वाले पंखों का सालाना बाजार 12000 करोड़ करने का लक्ष्य, जानें क्या है पूरा मामला

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 15, 2022 16:59 IST

देश भर में सुपर-एफिशियंट पंखों का इस्तेमाल सीमित होने के प्रमुख कारणों में इसकी ऊंची कीमत, उपभोक्ताओं के बीच कम जागरूकता और उपलब्धता में कमी शामिल हैं।

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ठळक मुद्देसिर्फ उच्च आय वाले परिवारों तक ही सीमित है।स्टार लेबलिंग प्रोग्राम अनिवार्य तौर पर लागू हो जाएगा। पंखों में सुपर-एफिशिएंट फैन का हिस्सा सिर्फ तीन प्रतिशत है।

नई दिल्लीः भारत में ऊर्जा कुशल यानी बिजली की कम खपत करने वाले पंखों का संभावित सालाना बाजार 12 हजार करोड़ रुपये तक हो सकता है। आवासीय क्षेत्र में ऐसे ऊर्जा कुशल पंखों के लिए उपयुक्त कुल बाजार लगभग 1.42 लाख करोड़ रुपये (20 बिलियन अमेरिकी डॉलर) होने का अनुमान है।

वर्तमान में, आवासीय क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले पंखों में सुपर-एफिशिएंट फैन का हिस्सा सिर्फ तीन प्रतिशत है। ये जानकारियां काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) की ओर से आज जारी किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन ‘बिजनेस मॉडल्स फॉर स्केलिंग अप सुपर एफिशिएंट एप्लायंसेज’ से सामने आई हैं। 

इस रिपोर्ट ने रेखांकित किया है कि पारंपरिक सीलिंग पंखों की जगह ऊर्जा-कुशल पंखों का इस्तेमाल भारत को अपने सालाना उत्सर्जन में 330 लाख टन कार्बन डाई-ऑक्साइड के बराबर कमी लाने और बिजली खर्च घटाने में मदद कर सकता है। इतना ही नहीं, अगर सब्सिडी आधारित बिजली पाने वाले घरों में पंखों की जगह पर ऊर्जा कुशल पंखों को लगा दिया जाए तो पांच वर्षों में अकेले उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार को 1500 करोड़ रुपये और बिजली वितरण कंपनियां को 250 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।

इसके अलावा, एक औसत घरेलू उपभोक्ता सुपर-एफिशिएंट पंखों को अपनाकर सालाना प्रति पंखा 500 रुपये बचा सकता है। इससे उसे महज छह वर्षों में पंखो को खरीदने की लागत के बराबर की बचत हो जाएगी, जो कि पंखे की 10-15 वर्षों की अवधि (टेक्निकल लाइफ) से काफी कम है।

डॉ. अरुणभा घोष, सीईओ, सीईईडब्ल्यू ने कहा, “ऊर्जा दक्षता के लिए भारत का सफर घर से शुरू होता है। जैसे-जैसे परिवार पंखों को खरीदने के लिए आगे आते हैं, उसके हिसाब से हमें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि सुपर-एफिशिएंट पंखे ज्यादा किफायती हों और सहजता से उपलब्ध हों।

इसको संभव बनाने के लिए, जीएसटी दरों में निश्चित तौर पर कटौती होनी चाहिए। इसके साथ, आवासीय उपभोक्ताओं को सुपर-एफिशिएंट उपकरणों के इस्तेमाल से खर्च में आने वाली बचत के बारे में भी जागरूक किया जाना चाहिए। अंत में, ऊर्जा कुशल उपकरणों के अंतिम छोर तक वितरण और सर्विसिंग नेटवर्क की उपलब्धता में सुधार किया जा सकता है।”

सीईईडब्ल्यू की सीनियर प्रोग्राम लीड शालू अग्रवाल ने कहा, “भारत एक मददगार इको-सिस्टम के माध्यम से ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में अपनी नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित कर चुका है। ऐसे में थोक खरीद और मजबूत वितरण व्यवस्था वाला बिजनेस मॉडल ऊर्जा कुशल उपकरणों का उपयोग बढ़ाने में प्रभावी ढंग से मदद कर सकता है।

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