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सब 1,000 करोड़ की रेस में फंसे हैं, बोले मनोज बाजपेयी- ये झगड़ा खत्म होनेवाला नहीं है, परफॉर्मेंस पर कोई...

By अनिल शर्मा | Updated: May 11, 2022 14:25 IST

मनोज बाजपेयी ने कहा कि लोग फिल्मों में सामग्री और प्रदर्शन के बारे में बोलने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई संख्या फंस गया है। बाजपेयी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को 'एक वरदान' बताते हुए कहा कि प्रतिभाशाली अभिनेताओं को काम में व्यस्त देखना 'दिल को छू लेने वाला' है।

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ठळक मुद्देसाउथ बनाम हिंदी फिल्म उद्योग के बीच बहस में मनोज बाजपेयी ने खुलकर अपने विचार साझे किए हैंअभिनेता ने कहा कि लोग संख्या में फंस गए हैंमनोज बाजपेयी ने कहा है कि अब 1000 करोड़ के कारण फिल्मों को सिनेमाघरों में रिलीज करना कठिन हो गया है

मुंबईः दक्षिण फिल्म उद्योग बनाम हिंदी फिल्म उद्योग की फिल्मों की कमाई को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रसिद्ध अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कहा है कि लोग 1000 करोड़ की रेस में फंसे हैं, परफॉर्मेंस के बारे में कोई बात नहीं कर रहा। मनोज बाजपेयी ने अपने एक हालिया साक्षात्कार में फिल्मों के प्रदर्शन, व्यापार और कंटेंस समते ओटीटी के बारे में खुलकर अपने राय साझा किए।

अभिनेता ने कहा कि लोग फिल्मों में सामग्री और प्रदर्शन के बारे में बोलने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई संख्या फंस गया है। बाजपेयी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को 'एक वरदान' बताते हुए कहा कि प्रतिभाशाली अभिनेताओं को काम में व्यस्त देखना 'दिल को छू लेने वाला' है।

पिछले कुछ महीनों में कई बड़े बजट की फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हुई जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर कमाई की। एसएस राजामौली की आरआरआर ने चार हफ्तों में बॉक्स ऑफिस पर 246 करोड़ का कलेक्शन किया। इसने रिलीज के 16 दिनों के भीतर दुनिया भर में 1,000 करोड़ क्लब में प्रवेश किया। प्रशांत नील की KGF चैप्टर 2 ने पहले दिन ही 134.50 करोड़ की कमाई की। बाद में, इसने ₹1000 करोड़ का आंकड़ा भी पार कर लिया। वहीं बॉलीवुड की छोटे बजट की फिल्म विवेक अग्निहोत्री की द कश्मीर फाइल्स ने बॉक्स ऑफिस पर 250 करोड़ का आंकड़ा पार किया।

पत्रकार पूजा तलवार के साथ एक साक्षात्कार में मनोज ने कहा, "कोई बात ही नहीं कर रहा है की फिल्म कैसी है?  कोई बात करने को राजी नहीं है कि परफॉर्मेंस कैसी है ? बाकी के विभागों की क्या भूमिका है ? मनोज बाजपेयी ने कहा कि क्या है न हम सब 1000 करोड़ और 300 करोड़ और 400 करोड़ में फंसे हुए हैं। ये झगड़ा कई सालों से चल रहा है। और मुझे लगता है कि ये खत्म होनेवाला है नहीं।

साउथ बनाम हिंदी फिल्म उद्योग के बीच कंटेंट भी बहस का एक मुद्दा है। इसको लेकर मनोज बाजपेयी ने कहा कि "अब आलोचक कह रहे हैं 'आप उनकी तरह फिल्में क्यों नहीं बनाते? आपकी फिल्म क्यों नहीं चल रही है?" यह मुख्यधारा के लोगों से पूछा गया है। मुख्यधारा में रहने वालों को उनके ही मुख्यधारा के आलोचकों द्वारा गवाह बॉक्स में रखा जा रहा है। मेरे लिए, मैं कभी उस दुनिया का हिस्सा नहीं था। मैं कभी-कभी किसी कारण से उस दुनिया में जाता था लेकिन फिर वापस आ जाता था।

बकौल बाजपेयी, हमारे लिए हमारी फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करना पहले कठिन था। अब यह 1000 करोड़ की फिल्मों के कारण कठिन हो गया है। ओटीटी एक वरदान रहा है। यह मेरे जैसे अभिनेताओं के लिए एक वरदान जैसा है। यह अन्य प्रतिभाएँ और कई संकायों के लिए वरदान है। इस तरह के अद्भुत काम को देखकर बहुत अच्छा लगता है।

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