भारत में सत्तारूढ़ और विपक्षी नेता कितनी ही राजनीतिक तू-तू मैं-मैं करते रहें लेकिन कोरोना की महामारी से लड़ने में सब एक थे। भारत की जनता ने महामारी के दौरान अद्भुत अनुशासन का परिचय दिया है। वह अब भी सतर्क रहे, यह जरूरी है।
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अरविंद केजरीवाल अपने चुनावी दौरे पर पंजाब गए थे। लुधियाना में ऑटोरिक्शा चालकों के साथ बैठक में उन्होंने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अपमानित करते हुए एक ऊटपटांग बयान दिया।
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साल 2018 में जस्टिस श्रीकृष्ण कमेटी ने इस संबंध में जो रपट तैयार की थी, उसमें सरकार की इस निरंकुशता पर न्यायालय के अंकुश का प्रावधान था। लेकिन इस विधेयक में सरकार के अधिकारी ही न्यायाधीश की भूमिका निभाएंगे।
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उम्मीद की जानी चाहिए कि अब दोनों ओर से इस तरह की कोशिश हो कि विवाद सुलझ जाए। किसानों का काम आंदोलन करना नहीं, खेती करना है, और सरकार का काम भी दमन करना नहीं, जनता के हित में शासन चलाना है।
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असलियत यह है कि पिछले 74 साल से शिक्षा के क्षेत्र में कोई मौलिक परिवर्तन नहीं हुए. इंदिरा गांधी के जमाने में शिक्षामंत्री त्रिगुण सेन और भागवत झा आजाद ने कुछ सराहनीय कदम जरूर उठाए थे.
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भाजपा को उम्मीद है कि कृषि कानून वापस लेने वाले फैसले के बाद किसान आंदोलन के प्रभाव वाले इलाकों में उसे एक बार फिर खोई हुई जमीन प्राप्त करने का मौका मिलेगा.
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किसान नेताओं को चाहिए कि वे इस सरकार का मार्गदर्शन करें और इसके साथ सहयोग करें ताकि भारत के किसानों को सदियों से चली आ रही उनकी दुर्दशा से मुक्त किया जा सके।
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मीथेन के परमाणुओं में हलचल अधिक होती है इसलिए कार्बन डाईऑक्साइड की तुलना में मीथेन गैस से धरती का तापमान 28 से 80 गुना अधिक बढ़ता है. इसलिए हाल में संपन्न हुए कॉप-26 सम्मेलन में लगभग 100 देशों के बीच सहमति बनी है कि वे मीथेन के उत्सर्जन को कम करेंगे.
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