देश की सबसे पुरानी और फिलहाल विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने, जो स्वाभाविक ही खुद को स्वतंत्रता संघर्ष व उसके मूल्यों की वारिस बताती आई है और अपने दुर्दिन में भी कई प्रदेशों में सरकारों का नेतृत्व कर रही या उनमें साझीदार है, गत दिनों अपना 137व
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पिछले 6-7 दशकों में परमाणु अप्रसार और परमाणु-नियंत्रण के बारे में कई संधियां और समझौते होते रहे हैं लेकिन आज तक भी कोई ऐसा समझौता नहीं हुआ है, जिसके तहत सभी परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र अपने परमाणु हथियारों को खत्म करने या तेजी से घटाने की कोशिश करते।
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नागालैंड के लोग नगा समस्या के समाधान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. सरकार से शांति वार्ता चलाने वाले सबसे दबंग गुट हार्डलाइनर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (मुइवा गुट) समेत सात अन्य गुटों ने भी साफ कह दिया कि शांति वार्ता तो अब नहीं चल सकती.
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आज के दौर में चुनाव का हाल ये है कि किसी सामान्य व्यक्ति या कार्यकर्ता के लिए किसी भी पार्टी से टिकट हासिल करना सबसे मुश्किल है. चुनाव में जो कम से कम एक करोड़ रुपए खर्च करने का इंतजाम कर सकता है तो माना जाता है कि उसके पास कम से कम विधानसभा का टिकट
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विदेशों में जब कोई परियोजना शुरू होती है तो उसकी निविदा कितने की है, परियोजना कब तक पूरी होगी, वक्त पर नहीं बनी तो कितना जुर्माना, काम का स्तर, उसकी गारंटी जैसी जानकारी आम आदमी को दी जाती है. जनता का यह जन्मसिद्ध अधिकार है. घटिया दर्जे के काम के लिए
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भारतीय समाज अपने आध्यात्मिक नेतृत्व में आई नैतिक और शैक्षणिक गिरावट को हल्के-फुल्के ढंग से ले रहा है. यह ठीक संकेत नहीं है। करोड़ों श्रद्धालुओं को आस्था के नाम पर गलत जानकारी देना जायज नहीं ठहराया जा सकता.
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डिजिटल करेंसी के पीछे क्रिप्टोकरेंसी का जोर है. क्रिप्टोकरेंसी केंद्रीय बैंकों के नियंत्रण से पूर्णत: बाहर है. इस करेंसी को बनाने का उद्देश्य था कि सरकारी बैंकों द्वारा कभी-कभी अधिक मात्रा में नोट छाप कर बाजार में डाल दिए जाते हैं जिससे महंगाई बहुत त
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