अंग्रेजी तथा अन्य विदेशी भाषाओं की एच्छिक पढ़ाई जरूर हो लेकिन भारतीय भाषाओं के जरिये देश के उच्चतम पदों तक पहुंचने की पूर्ण सुविधा होनी चाहिए। हिंदी अपने आप आ जाएगी. जो हिंदी नहीं सीखेंगे, वे अपने प्रांत के बाहर जाकर क्या करेंगे? वे अपना नुकसान खुद क
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दुनिया कोविड-19 महामारी के नए चरण में प्रवेश कर रही है या फिर कर चुकी है, जिसके परिणाम अभी आने शेष हैं। संभव है कि वैश्विक राजनीति इस दौर में पुन: शिथिल पड़े और यूरोप व अमेरिका कुछ कदम पीछे हटने की मुद्रा में दिखें।
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कई राज्य सरकारें अल्पसंख्यकों के नरसंहार के कट्टरपंथियों के आह्वान पर मूकदर्शक बनी हुई हैं और देश ने राजनीतिक नेताओं को मॉब लिंचिंग के आरोपियों को माला पहनाते हुए देखा है इसलिए मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून पारित करने का झारखंड विधानमंडल का कार्य ऐसे सम
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यह दौरा इसलिए और भी अहम है क्योंकि म्यांमार में लोकतंत्र के हिंसक दमन चक्र को लेकर वहां का सैन्य शासन अमेरिका व यूरोप जैसी अन्य बड़ी ताकतों सहित कमोबेश दुनिया के काफी देशों के अलगाव के दायरे में है। वहीं भारत ने खास तौर पर पूर्वोत्तर के सीमावर्ती क्ष
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दक्षिण अफ्रीकी राज्य गुटेंग के स्वास्थ्य विभाग की सलाहकार और विटवाटरसेंड विश्वविद्यालय की पब्लिक हेल्थ मेडिसिन विशेषज्ञ हर्षा सोमारू का कहना है कि पहले की तुलना में इस बार हर उम्र के मरीज को ज्यादा दिनों तक अस्पताल में रहना नहीं पड़ रहा है।
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हमारे जज और वकील अपने तर्कों को सिद्ध करने के लिए ब्रिटिश और अमेरिकी नजीरों को पेश करते हैं, जबकि दुनिया की सबसे प्राचीन और विशद न्याय-व्यवस्था भारत की ही थी। भारत के न्यायशास्त्रियों- मनु, कौटिल्य, कात्यायन, बृहस्पति, नारद, पाराशर, याज्ञवल्क्य आदि क
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यह समझना जरूरी है कि अपनी स्थानीयता, अपने शहर, अपने पूर्वजों पर गर्व करने वाला समाज ही अपने परिवेश और सरकारी या निजी संपत्ति से जुड़ाव महसूस करता है और उसको सहेजने के प्रति संवेदनशील बनता है।
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लगभग एक सदी पहले अमेरिका में ऐसी एक धर्म-संसद का आयोजन हुआ था. उसमें दुनिया भर के धर्मो के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था. स्वामी विवेकानंद ने वहां हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया था. और ‘मेरे अमेरिकी बहनों और भाइयों’ के संबोधन के साथ जब उन्होंने अपनी ब
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