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विजय दर्डा का ब्लॉग: भारत यात्रा से क्या ट्रम्प को चुनाव में मदद मिलेगी?

By विजय दर्डा | Updated: February 17, 2020 05:49 IST

दरअसल ट्रम्प के सामने भारतीयों को रिझाने की एक और खास वजह है. राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेट प्रत्याशी हैं तुलसी गैबार्ड. उन्होंने काफी पहले हिंदू धर्म अपना लिया था और वे भारतीयों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. जब वे हाउस ऑफ कॉमंस तथा सीनेट के लिए चुनी गईं तो उन्होंने हाथ में गीता रख कर शपथ ली थी. वे भारत की समर्थक भी हैं और बहुत से लोग उन्हें भारतीय मूल का भी कहने से नहीं हिचकते जबकि वे अमेरिकी मूल की ही हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो डोनाल्ड ट्रम्प को पिछले साल ही भारत लाना चाहते थे और गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी बनाना चाहते थे लेकिन ट्रम्प व्यस्त थे इसलिए नहीं आ पाए! फिर मोदीजी अमेरिका गए और वहां ‘हाउडी मोदी’ नाम का चर्चित कार्यक्रम हुआ. वहां जिस अंदाज में मोदीजी ने डोनाल्ड ट्रम्प को स्टेडियम में हाथ में हाथ लहराते हुए घुमाया उससे लगा कि वे ट्रम्प को चुनाव के लिए लॉन्च कर रहे हैं. उसी संदर्भ में अब ट्रम्प की भारत यात्र को भी देखा जा रहा है. वे 24-25 फरवरी को भारत की यात्र पर आएंगे. उनके साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प भी होंगी. ट्रम्प के सम्मान में अहमदाबाद में ‘केम छो ट्रम्प’ नाम का कार्यक्रम होने वाला है. तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इस यात्र से अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में ट्रम्प को कोई फायदा होगा?

इसका सही जवाब तो 3 नवंबर 2020 को मिलेगा क्योंकि उस दिन अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव होगा. दोबारा सत्ता पर काबिज होना ट्रम्प के लिए निश्चय ही चुनौतियों से भरा है इसलिए वे हर तरह के मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में लगे हैं. आंकड़े बताते हैं कि करीब 60 लाख भारतीय अमेरिका में रहते हैं जिनमें से करीब-करीब 50 लाख वहां के मतदाता हैं. औसतन 70 प्रतिशत भारतीय मतदान करते हैं. इस लिहाज से देखें तो ट्रम्प की कोशिश इन 35 लाख मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की है. आंकड़े को इस तरह से भी समझें कि अमेरिका की राजनीति में भारतीयों की भागीदारी 3 प्रतिशत से अधिक है. इसके साथ ही अमेरिकी राजनीति में भारतीयों की महत्वपूर्ण सक्रियता से पूरी दुनिया परिचित है ही!

दरअसल ट्रम्प के सामने भारतीयों को रिझाने की एक और खास वजह है. राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेट प्रत्याशी हैं तुलसी गैबार्ड. उन्होंने काफी पहले हिंदू धर्म अपना लिया था और वे भारतीयों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. जब वे हाउस ऑफ कॉमंस तथा सीनेट के लिए चुनी गईं तो उन्होंने हाथ में गीता रख कर शपथ ली थी. वे भारत की समर्थक भी हैं और बहुत से लोग उन्हें भारतीय मूल का भी कहने से नहीं हिचकते जबकि वे अमेरिकी मूल की ही हैं.

जाहिर तौर पर ट्रम्प की मंशा यही है कि भारत यात्रा के बहाने अमेरिका के भारतीय मतदाताओं को तुलसी से दूर करके अपने पक्ष में मतदान कराया जाए. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लोगों के बाद गुजरातियों की संख्या सबसे ज्यादा है. इसके बाद पंजाब और केरल के लोग हैं लेकिन वर्चस्व के हिसाब से देखें तो गुजरातियों का बोलबाला है. होटल व्यवसाय में तो करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी गुजरातियों की है. 17 हजार से ज्यादा होटल्स के मालिक गुजराती हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रम्प अपने लक्ष्य में कितना सफल हो पाते हैं. जहां तक तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की बात है तो वहां ट्रम्प भले ही अभी नहीं जा रहे हों लेकिन उनकी बिटिया इवांका ट्रम्प नवंबर 2017 में हैदराबाद की यात्रा कर चुकी हैं.

यह तो हुई ट्रम्प के भारत दौरे और अमेरिकी चुनाव की बात! इस दौरे के दूसरे मायने भी कम नहीं हैं. भारत आने वाले वे सातवें अमेरिकी राष्ट्रपति होंगे. इसके पहले आइजनहावर, रिचर्ड निक्सन, जिमी कार्टर, बिल क्लिंटन, जॉर्ज बुश और बराक ओबामा भारत आ चुके हैं. इनमें से केवल जिमी कार्टर को छोड़ दें तो भारत आने वाले पांच अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने लगे हाथ पाकिस्तान की यात्रा भी की थी. अभी तक ट्रम्प की कोई योजना पाकिस्तान जाने की नहीं है. यदि वे पाकिस्तान नहीं जाते हैं तो यह भारत के लिए बड़ी जीत होगी. भारत इसे अमेरिका के साथ मजबूत होते रिश्ते के रूप में प्रचारित कर सकता है.

ट्रम्प की यह यात्रा निश्चय ही दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तीन बार कश्मीर का राग ट्रम्प के सामने छेड़ चुके हैं. ट्रम्प ने मध्यस्थता की बात भी की थी. संभव है कि इस यात्रा में भारत को वे आश्वस्त करें कि कश्मीर पर साथ बना रहेगा.    

कुछ बातें ईरान को लेकर भी हो सकती हैं. ट्रम्प जानते हैं कि भारत और ईरान की दोस्ती बहुत पुरानी है. ट्रम्प कोई ऐसा राग नहीं छेड़ेंगे जिससे भारत के सामने समस्या पैदा हो क्योंकि अमेरिका को भारत की अभी बहुत जरूरत है. एक तो उसे चीन से निपटना है तो भारत के बिना यह संभव नहीं है और दूसरा मसला अफगानिस्तान का है.

ट्रम्प यह जानते हैं कि अफगानिस्तान में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है. जाहिर सी बात है कि ट्रम्प फिर जीतते हैं तो दूसरे कार्यकाल में उन्हें भारत की बहुत जरूरत पड़ने वाली है. इसीलिए वे भारत आ रहे हैं. 24 फरवरी को अहमदाबाद में भारत पूछेगा-‘केम छो ट्रम्प?’

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