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प्रदीप द्विवेदी का ब्लॉग: कोरोना वायरसः व्यापारियों के लिए 3 मई तक का समय आत्ममंथन का है!

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: April 18, 2020 14:47 IST

कोरोना वायरस के कारण देशभर में लगाये गए लॉकडाउन ले खुलने के बाद भी चीजें सामान्य होंगी कि नहीं अभी ये कहा नहीं जा सकता। मगर हां, इस लॉकडाउन का असर खत्म होने के बाद भी कारोबार पर देखने को जरुर मिलेगा।

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ठळक मुद्देकार्य-व्यवसाय में श्रमिकों की आवश्यकता भी बहुत बड़ा सवाल है।कोरोना संकट समाप्त होने के बाद पहले जरूरत पर आधारित व्यवसाय पटरी पर आएंगे।

अगली 3 मई तक का लॉकडाउन का समय व्यापारियों के लिए आत्ममंथन का है, क्योंकि लॉकडाउन हटने के बाद भी कारोबारी हालात पहले जैसे नहीं रहेंगे। इस वक्त तीन तरह के व्यवसाय हैं, एक- इसेंशियल टाइप, दो- नोन इसेंशियल टाइप और तीन- सेमी इसेंशियल टाइप।

किराना का व्यवसाय इसेंशियल टाइप है, जो हर हाल में चलेगा, क्योंकि खाने-पीने का सामान इंसान की स्थाई जरूरत है। सिनेमा हॉल ऐसी जगह है जहां नोन इसेंशियल टाइप कारोबार चलता है, वहां लोग जाएं यह जरूरी नहीं है, तो सैलून सेमी इसेंशियल टाइप व्यवसाय है, जहां लोग बाल कटवाने तो जा सकते हैं, लेकिन मेकअप के लिए ज्यादा ग्राहक मिलना मुश्किल होगा।

कोई व्यवसायी जो भी काम-धंधा कर रहा है, उसका गहराई से विश्लेषण करे कि उसका व्यवसाय कौन से टाइप का है। यदि इसेंशियल और सेमी इसेंशियल टाइप का है तो अपने व्यवसाय को फिर से कैसे शुरू किया जाए, इसकी योजना बनानी चाहिए, लेकिन यदि नोन इसेंशियल टाइप का है तो कारोबार फिर से शुरू करने के बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। बेहतर है, वर्तमान समय के साथ जारी रहने वाले कार्य-व्यवसाय के बारे में सोचा जाए।

बदलते वक्त की धारणाएं बदलना आसान नहीं है। कभी जो स्कूटर ब्लैक में मिलता था, वह अब भंगार वाला भी तौल से ले जाता है। कभी सिनेमा का टिकट खरीदने के लिए ब्लैक करने वाले के पीछे-पीछे भागना पड़ता था, आज घर बैठे टिकट मिलने के बावजूद लोग खरीदने को तैयार नहीं हैं। कभी पांच दिवसीय टेस्ट मैच का हंगामा था, 20-20 की धमाल के बाद कितने लोग टेस्ट मैच देखते हैं। अपने व्यवसाय के ब्रेक इवन पॉइंट को भी देखना होगा। दुकान का किराया, कर्मचारियों का वेतन, बिजली-पानी का खर्चा आदि देने के लिए कम-से-कम कितनी कमाई होनी जरूरी है, ताकि व्यवसाय को आगे बढ़ाया जा सके।

कार्य-व्यवसाय में श्रमिकों की आवश्यकता भी बहुत बड़ा सवाल है। ऐसे व्यवसाय जिनमें परिवारजनों की ज्यादा-से-ज्यादा भूमिका है, वे तो फिर से जल्दी ही उठ खड़े होंगे, लेकिन जिनमें श्रमिकों की बड़ी भूमिका है, उनका काम आसान नहीं होगा। बहरहाल, कोरोना संकट समाप्त होने के बाद पहले जरूरत पर आधारित व्यवसाय पटरी पर आएंगे, उसके बाद शायद शौक आधारित बिजनेस सफल हो पाएंगे, इसलिए जो व्यापारी अपने कार्य-व्यवसाय का संतुलित मूल्यांकन करने में कामयाब रहेंगे, वे ही कोरोना संकट गुजर जाने के बाद अपने व्यापार को फिर से जिंदा करने में सफल रहेंगे।

 

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