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ब्लॉग: अक्षय ऊर्जा स्रोतों को मिले बढ़ावा

By योगेश कुमार गोयल | Updated: July 24, 2023 15:44 IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोयले को जलाया जाना और इससे होने वाली गर्मी ही प्रदूषण का मुख्य कारण है।

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ठळक मुद्देहर साल 24 जुलाई को ‘राष्ट्रीय थर्मल इंजीनियर दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन थर्मल इंजीनियरिंग के महत्व को समझा जाता है। बता दें कि थर्मल इंजीनियरिंग मैकेनिकल इंजीनियरिंग का ही एक ऐसा हिस्सा है।

नई दिल्ली: हमारे जीवन में थर्मल इंजीनियरिंग के महत्व को समझाने के लिए प्रतिवर्ष 24 जुलाई को ‘राष्ट्रीय थर्मल इंजीनियर दिवस’ मनाया जाता है. थर्मल इंजीनियरिंग मैकेनिकल इंजीनियरिंग का ही एक ऐसा हिस्सा है, जिसमें ऊष्मीय ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है.

कोयला प्रदूषण का मुख्य कारण है- विश्व स्वास्थ्य संगठन

हालांकि भारत में थर्मल पॉवर स्टेशनों में बिजली पैदा करने के लिए कोयले के अलावा ऊर्जा के अन्य स्रोतों का भी इस्तेमाल किया जाता है किंतु अधिकांश बिजली कोयले के इस्तेमाल से ही पैदा होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोयले को जलाया जाना और इससे होने वाली गर्मी प्रदूषण का मुख्य कारण है. 

विश्वभर में करीब चालीस फीसदी बिजली कोयले से प्राप्त होती है जबकि भारत में करीब साठ फीसदी बिजली कोयले से, सोलह फीसदी अक्षय ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा तथा बायो गैस से, चौदह फीसदी पानी से, आठ फीसदी गैस से, 1.8 फीसदी न्यूक्लियर ऊर्जा से तथा 0.3 फीसदी डीजल से पैदा होती है. 

आज वायु प्रदूषण दुनिया के लिए है बड़ी संकट

वैसे बिजली पैदा करने के लिए भले ही ऊर्जा के किसी भी स्रोत का इस्तेमाल किया जाए, प्रत्येक थर्मल पावर प्लांट में इसके लिए बॉयलर का इस्तेमाल होता है, जिसमें ईंधन को जलाकर ऊष्मीय ऊर्जा पैदा की जाती है, जिससे पानी को गर्म कर भाप बनाई जाती है, जो टरबाइनों को चलाने में इस्तेमाल होती है. 

वायु प्रदूषण आज दुनियाभर में एक बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है और इस समस्या के लिए थर्मल पॉवर प्लांटों से निकलने वाला उत्सर्जन भी एक बड़ा कारण है. 

वायु प्रदूषण को दूर करने की जा रही है कोशिश

इस समस्या से निपटने के लिए एक दशक से भी अधिक समय से उत्सर्जन मानकों को पूरा करने और नए कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को रोककर अक्षय ऊर्जा की तरफ कदम बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है. 

समय के साथ अब जरूरत इसी बात की है कि दूसरे देशों की भांति हम भी अक्षय ऊर्जा की ओर कदम बढ़ाएं और बिजली बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से ऊर्जा के इन्हीं सुरक्षित स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ावा दें.

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