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ब्लॉग: संदेशखाली का सच स्वीकार करें ममता

By अवधेश कुमार | Updated: February 23, 2024 16:46 IST

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली कांड ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं उन पर सहसा विश्वास करना कठिन है। आखिर किसी कानून के शासन वाले राज्य में ऐसा कैसे संभव है कि कोई, कुछ या कुछ लोगों का समूह जब चाहे जितनी संख्या में चाहे महिलाओं को बुला ले और उनका शोषण करे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कहती हैं कि संदेशखाली घटना के पीछे भाजपा का हाथ है।

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ठळक मुद्देऐसा कैसे संभव है कि कोई, कुछ या कुछ लोगों का समूह जब चाहे जितनी संख्या में चाहे महिलाओं को बुला ले और उनका शोषण करेमुख्यमंत्री ममता बनर्जी कहती हैं कि संदेशखाली घटना के पीछे भाजपा का हाथ हैममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस या सरकार के अन्य प्रवक्ता ऐसी घटना को नकारने की जितनी कोशिश करते हैं उतना ही सच सामने आ रहा है

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली कांड ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं उन पर सहसा विश्वास करना कठिन है। आखिर किसी कानून के शासन वाले राज्य में ऐसा कैसे संभव है कि कोई, कुछ या कुछ लोगों का समूह जब चाहे जितनी संख्या में चाहे महिलाओं को बुला ले और उनका शोषण करे।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कहती हैं कि संदेशखाली घटना के पीछे भाजपा का हाथ है। उन्होंने कहा कि संदेशखाली में सबसे पहले ईडी को भेजा गया। फिर ईडी की दोस्त भाजपा कुछ मीडियावालों के साथ संदेशखाली में घुसी और हंगामा करने लगी। ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस या सरकार के अन्य प्रवक्ता ऐसी घटना को नकारने की जितनी कोशिश करते हैं उतना ही सच सामने आ रहा है।

राजनीतिक दलों के बयानों और मांगों को कुछ समय के लिए छोड़ दीजिए। टेलीविजन कैमरों पर जितनी संख्या में महिलाएं आकर आपबीती सुना रही हैं उनसे किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल दहल जाएगा। राजनीतिक दलों में भी केवल भाजपा आवाज उठाती या आंदोलन करती तो माना जाता कि शायद आरोपों में उतनी सच्चाई नहीं है जितनी प्रचारित की जा रही है।

लेकिन सारी वामपंथी पार्टियां और कांग्रेस भी संदेशखाली पर एक ही स्वर में बात कर रहे हैं। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने संदेशखाली में अशांत क्षेत्रों का दौरा कर कहा कि मैंने जो देखा वह भयावह, स्तब्ध करने वाला था।

यदि मामले की गंभीरता नहीं होती तो कोलकाता उच्च न्यायालय इसका स्वत: संज्ञान नहीं लेता। पहले उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अपूर्ब सिन्हा राय की एकल पीठ ने सुनवाई की और बाद में इसे दो सदस्यीय पीठ को स्थानांतरित कर दिया गया। उच्च न्यायालय इनमें दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई कर रहा है। पहला स्थानीय लोगों की जमीन हड़पने का है और दूसरा स्थानीय महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने का।

उच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने के बाद उम्मीद करनी चाहिए कि मामले का सच सामने आएगा तथा दोषियों को उपयुक्त सजा मिलेगी। किंतु स्वयं ममता बनर्जी और उनके लोग जब तक यह मानने को तैयार नहीं होंगे कि जघन्य और शर्मनाक घटना उनके राज्य में घटित हुई है तब तक सच होते हुए भी इसे साबित करना मुश्किल होगा।

जो सच स्थानीय लोगों को और निष्पक्षता से वहां जांच करने वालों को दिखाई देता है अगर सरकार और प्रशासन उसे स्वीकार नहीं करेंगे तो संदेशखाली जैसी घटनाएं होती रहेंगी।पुलिस ने हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए डीआइजी स्तर की एक महिला अधिकारी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम का गठन किया है। किंतु पुलिस कह रही है कि उसे केवल चार शिकायतें मिलीं जिनमें बलात्कार का आरोप है ही नहीं। इसके बाद पुलिस प्रशासन से कोई क्या उम्मीद कर सकता है।

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