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Indo-Pak War 1971: शौर्य और पराक्रम से पाक को चटाई थी धूल

By देवेंद्र | Updated: December 16, 2025 05:36 IST

16 दिसंबर, 1971 को करीब 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत के सामने आत्मसमर्पण किया था.

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ठळक मुद्देयुद्ध ढाका समर्पण के साथ खत्म हुआ था.पाकिस्तान को भारत के सामने घुटने टेकने पड़े थे. दरअसल पाकिस्तान में 1970 के दौरान चुनाव हुए थे.

Indo-Pak War 1971: देश में प्रतिवर्ष 16 दिसंबर को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत की वजह से विजय दिवस मनाया जाता है. भारत ने इस युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी. इस युद्ध में पाक की हार के बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ. भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिसंबर, 1971 को युद्ध छिड़ गया था. यह युद्ध केवल 13 दिनों तक चला था. 16 दिसंबर को इस युद्ध में पाकिस्तान को भारत के सामने घुटने टेकने पड़े थे. 16 दिसंबर, 1971 को करीब 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत के सामने आत्मसमर्पण किया था. यह युद्ध ढाका समर्पण के साथ खत्म हुआ था.

दरअसल पाकिस्तान में 1970 के दौरान चुनाव हुए थे, जिसमें पूर्वी पाकिस्तान में अवामी लीग ने बड़ी संख्या में सीटें जीतीं और सरकार बनाने का दावा किया, परंतु जुल्फिकार अली भुट्टो ने विरोध करना शुरू कर दिया था. उस समय हालात इतने खराब हो गए थे कि सेना का प्रयोग करना पड़ा.  अवामी लीग के शेख मुजीबुर रहमान, जो कि पूर्वी पाकिस्तान के थे, को गिरफ्तार कर लिया गया.

यहीं से पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच दिक्कतें शुरू हो गई थीं.  धीरे-धीरे इतना विवाद बढ़ गया कि सेना के अत्याचार से पीड़ित पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने पश्चिमी पाकिस्तान से पलायन करना शुरू कर दिया था. भारत में उस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं. पूर्वी पाकिस्तान से शरणार्थी भारत में आ गए थे और उन्हें भारत में सुविधाएं दी जा रही थीं क्योंकि वे भारत के पड़ोसी देश से आए थे.

इन सबको देखते हुए पाकिस्तान ने भारत पर हमले करने की धमकियां देना शुरू कर दिया था. पाकिस्तान के विमानों ने नवंबर के आखिरी हफ्ते में भारतीय हवाई सीमा में दखल देना शुरू कर दिया था. भारत के कुछ शहरों में तीन दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी विमानों ने बमबारी शुरू कर दी. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उसी वक्त आधी रात को ऑल इंडिया रेडियो के जरिये पूरे देश को संबोधित किया.

इस प्रकार भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया. युद्ध के तहत इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को ढाका की तरफ कूच करने का हुक्म दे दिया और भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी पकिस्तान के अहम ठिकानों और हवाई अड्डों पर बम बरसाने शुरू कर दिए.

चार दिसंबर, 1971 को ऑपरेशन ट्राईडेंट भारत ने शुरू किया. इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने बंगाल की खाड़ी में समुद्र की ओर से पाकिस्तानी नौसेना को टक्कर दी और दूसरी तरफ पश्चिमी पाकिस्तान की सेना का भी मुकाबला किया. भारतीय नौसेना ने पांच दिसंबर, 1971 को कराची बंदरगाह पर बमबारी कर पाकिस्तानी नौसेना मुख्यालय को तबाह कर दिया था.  

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