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Indian Air Force 2024: आत्मबल से लबालब वायुसेना की बढ़ रही है ताकत

By योगेश कुमार गोयल | Updated: October 8, 2024 08:10 IST

Indian Air Force 2024: राफेल, मिग-29, तेजस, सुखोई-30 एमकेआई जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट्स सहित वायुसेना के कुल 72 विमानों ने अपनी ताकत और कुशलता का प्रदर्शन किया.

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ठळक मुद्देभारतीय वायुसेना ने वर्ष 1974 तक ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया था. भारतीय वायुसेना एआई की मदद से भी दुश्मनों पर हमला करने में पूरी तरह सक्षम हो चुकी है.अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय वायुसेना पूरी मुस्तैदी से निभाती रही है.

Indian Air Force 2024: भारतीय वायुसेना आज 8 अक्तूबर को अपना 92वां स्थापना दिवस मना रही है. वायुसेना द्वारा इस उपलक्ष्य में देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और वायुसेना के स्थापना दिवस के अवसर पर एक भव्य एयर-शो का भी प्रदर्शन किया जाता है, जिसके जरिये वायुसेना के कई विमान और हेलिकॉप्टर आसमान में हैरतअंगेज करतब दिखाते हुए वायुसेना की निरंतर बढ़ती ताकत का अहसास कराते हैं. इस बार अपने 92वें स्थापना दिवस से पहले भारतीय वायुसेना ने 6 अक्तूबर को चेन्नई के मरीना बीच पर भव्य एयर शो का आयोजन किया, जिसमें राफेल, मिग-29, तेजस, सुखोई-30 एमकेआई जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट्स सहित वायुसेना के कुल 72 विमानों ने अपनी ताकत और कुशलता का प्रदर्शन किया.

एयर शो का सबसे प्रमुख आकर्षण रहा ऐतिहासिक विरासत के रूप में दिखाया गया प्रथम विश्वयुद्ध में इस्तेमाल हुआ हार्वर्ड टी-6जी टैक्सन एयरक्राफ्ट, जिसे भारतीय वायुसेना ने वर्ष 1974 तक ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया था. राफेल, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस जैसे फाइटर जेट्स, सारंग, लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (प्रचंड), एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ध्रुव) जैसे हेलिकॉप्टर तथा सी-295, अपाचे, डकोटा, चेतक, जगुआर इत्यादि अन्य एयरक्राफ्ट भारतीय वायुसेना की अभेद्य ताकत बन चुके हैं और अब भारतीय वायुसेना एआई की मदद से भी दुश्मनों पर हमला करने में पूरी तरह सक्षम हो चुकी है.

देश की करीब 24 हजार किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय वायुसेना पूरी मुस्तैदी से निभाती रही है. भारतीय वायुसेना की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में 8 अक्तूबर 1932 को हुई थी और तब इसका नाम था ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’. 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध में रॉयल इंडियन एयरफोर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

उस समय वायुसेना पर आर्मी का ही नियंत्रण होता था. इसे एक स्वतंत्र इकाई का दर्जा दिलाया था इंडियन एयरफोर्स के पहले कमांडर-इन-चीफ सर थॉमस डब्ल्यू एल्महर्स्ट ने, जो हमारी वायुसेना के पहले चीफ एयर मार्शल बने थे. ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ की स्थापना के समय इसमें केवल चार एयरक्राफ्ट थे और इन्हें संभालने के लिए कुल 6 अधिकारी और 19 जवान थे.

आज वायुसेना में डेढ़ लाख से भी अधिक जवान और हजारों एयरक्राफ्ट्स हैं. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात वायुसेना को अलग पहचान मिली और 1950 में ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ का नाम बदलकर ‘इंडियन एयरफोर्स’ कर दिया गया. दुनियाभर के देशों की सैन्य ताकत के अनुसार रैंकिंग तय करने वाली संस्था ‘ग्लोबल फायरपावर’ की 2024 की सूची के अनुसार सबसे ताकतवर देशों में भारत चौथे स्थान पर है.  

टॅग्स :इंडियन एयर फोर्सचेन्नईराजनाथ सिंहनरेंद्र मोदी
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