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भरत झुनझुनवाला का ब्लॉग: पहाड़ी क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए सेवा क्षेत्र का रास्ता ही श्रेष्ठ

By भरत झुनझुनवाला | Updated: March 15, 2020 11:28 IST

वर्तमान में कृषि का हिस्सा 56% से घटकर मात्न 16% रह गया है जबकि मैन्युफैक्चरिंग 14% से बढ़कर 30% पर पहुंच गई है और सेवा क्षेत्न 30% से बढ़कर 54% पर पहुंच गया है. अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्न का योगदान तेजी से गिर रहा है, मैन्युफैक्चरिंग एवं सेवा क्षेत्न बढ़ रहे हैं.

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अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्न होते हैं- कृषि, मैन्युफैक्चरिंग (माल का उत्पादन) एवं सेवा. मैन्युफैक्चरिंग में कागज, सीमेंट, कार इत्यादि माल का उत्पादन आता है जो कि भौतिक वस्तुएं हैं. सेवा क्षेत्न में होटल, संगीत, यातायात, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बैंक आदि आते हैं जिनमें किसी माल का उत्पादन नहीं होता लेकिन उपभोक्ता किसी सेवा की खपत करता है. वर्ष 1951 में हमारी अर्थव्यवस्था में कृषि का हिस्सा 56%, मैन्युफैक्चरिंग का 14% और सेवा का 30% था.

वर्तमान में कृषि का हिस्सा 56% से घटकर मात्न 16% रह गया है जबकि मैन्युफैक्चरिंग 14% से बढ़कर 30% पर पहुंच गई है और सेवा क्षेत्न 30% से बढ़कर 54% पर पहुंच गया है. अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्न का योगदान तेजी से गिर रहा है, मैन्युफैक्चरिंग एवं सेवा क्षेत्न बढ़ रहे हैं. कृषि के हिस्से में गिरावट आने का मुख्य कारण है कि विश्व में कृषि उत्पादों की मांग सीमित है. विश्व की जनसंख्या में मामूली वृद्धि हो रही है तद्नुसार खाद्य पदार्थो की खपत में भी मामूली ही वृद्धि हो रही है. वर्तमान में स्वास्थ्य कारणों से तमाम लोग शाकाहारी भोजन को अपना रहे हैं. साथ-साथ ब्राजील जैसे देशों में गन्ने से पेट्रोल बनाया जा रहा है लेकिन इसकी लागत बहुत ज्यादा आती है. इसलिए कृषि उत्पादों की मांग कम है. कृषि क्षेत्न में गिरावट वैश्विक स्तर पर हो रही है.

मैन्युफैक्चरिंग की स्थिति सामान्य है, वह इसलिए कि किसी भी परिवार द्वारा उत्पादित माल की खपत की एक सीमा होती है. जैसे आप के घर में यदि एक फ्रीज है तो आप दूसरा फ्रीज नहीं खरीदेंगे. फ्रीज, टेलीविजन, वाशिंग मशीन खरीद लेने के बाद आप के द्वारा उत्पादित माल की खपत में वृद्धि कम ही होगी. तुलना में सेवा क्षेत्न में खपत उत्तरोत्तर बढ़ती जाती है.

जैसे आप वर्ष में एक बार विदेश पर्यटन के स्थान पर पांच बार भी कर सकते हैं. आप नए-नए संगीत को सुन सकते हैं और यदि आप चाहें तो किसी कम्प्यूटर प्रोग्रामर को कह सकते हैं कि आपकी इच्छा अनुसार कोई एप्प अथवा सिनेमा बनाए. इसलिए सेवा क्षेत्न में खपत की अपार संभावनाएं हैं और इस क्षेत्न में वृद्धि होती ही जा रही है. इसलिए आज अमेरिका जैसे विकसित देशों की आय में कृषि का हिस्सा मात्न 1%, मैन्युफैक्चरिंग का 19% और सेवा का 80% है.

हम भी इसी दिशा में चल रहे हैं. इस परिस्थिति में पहाड़ी क्षेत्नों को तय करना है कि वे इन तीनों में से किस क्षेत्न का सहारा लेकर अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारेंगे. कृषि क्षेत्न में स्पष्ट सीमाएं हैं. पहाड़ी क्षेत्नों में खेत बनाने का क्षेत्नफल सीमित है और ऊंचे-नीचे होने के कारण यहां खेती करना भी कठिन है. इसलिए पहाड़ी क्षेत्नों को मैन्युफैक्चरिंग तथा सेवा क्षेत्न में से एक को चुनना है.

मैन्युफैक्चरिंग में पहाड़ी क्षेत्नों की अनुकूलता कम है. किसी माल के उत्पादन में ढुलाई का खर्च महत्वपूर्ण होता है. पहाड़ी क्षेत्न में मैन्युफैक्चरिंग के उद्योग लगाने के लिए आपको कच्चे माल को मैदान से पहले पहाड़ पर लाना होगा और फिर बनाए हुए माल को पुन: नीचे ले जाना होगा. इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्नों में बड़े शहर कम होते हैं. यदि आपकी बिजली की मोटर फुंक गई तो पहाड़ी क्षेत्न में दूसरी मोटर लाकर उसको लगाने में तीन दिन लग जाता है जबकि मैदानी क्षेत्न में यह छह घंटे में हो सकता है.  

तुलना में सेवा क्षेत्न में परिस्थिति बिल्कुल बदल जाती है. यहां जो पहाड़ की दुर्गमता है उसके साथ पहाड़ का सौंदर्य भी सामने आता है, जैसे स्विट्जरलैंड के पहाड़ों में उन्होंने यूनिवर्सिटी एवं अस्पताल बनाए हैं. हमारे नैनीताल के पास भवाली में किसी समय क्षय रोग के मरीजों के लिए सैनिटोरियम बनाया गया था. सोच थी कि वहां की शुद्ध वायु एवं प्राकृतिक वातावरण में मरीज को स्वास्थ्य लाभ शीघ्र होगा. अत: पहाड़ी राज्य सेवा क्षेत्न जैसे सॉफ्टवेयर पार्क, यूनिवर्सिटी, अस्पताल इत्यादि पर ध्यान दें तो इनकी दुर्गमता लाभप्रद हो जाएगी.

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