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भारतीय अर्थव्यवस्थाः देश में जीडीपी वृद्धि का नया इंजन बन सकता है थोरियम, 8.46 लाख टन भंडार के साथ नंबर-1 भारत

By ऋषभ मिश्रा | Updated: September 22, 2025 05:47 IST

Indian Economy: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास लगभग 8.46 लाख टन थोरियम भंडार है, जो दुनिया में सबसे अधिक है.

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ठळक मुद्देब्राजील के पास करीब 6.32 लाख टन, ऑस्ट्रेलिया के पास 5.95 लाख टन और अमेरिका के पास तकरीबन 5.95 लाख टन भंडार है. चीन के पास चार लाख टन और तुर्की के पास तीन लाख टन, वहीं नॉर्वे के पास 3.5 लाख टन भंडार है. भंडार मुख्य रूप से केरल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय रेत में हैं.

Indian Economy:  भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. 2025 में देश की जीडीपी लगभग 4.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है  और अनुमान है कि 2030 तक यह सात ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाएगी. लेकिन इस विकास यात्रा में सबसे बड़ी चुनौती है, ‘ऊर्जा’.  भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 80 फीसदी आयात करता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तेल और गैस का है. हर साल भारत को ऊर्जा आयात पर 150 अरब डॉलर से अधिक खर्च करना पड़ता है.  ऐसे समय में ‘थोरियम’ भारत के लिए न केवल ऊर्जा सुरक्षा का स्रोत है, बल्कि जीडीपी वृद्धि का भी नया इंजन बन सकता है. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास लगभग 8.46 लाख टन थोरियम भंडार है, जो दुनिया में सबसे अधिक है.

इसके बाद ब्राजील के पास करीब 6.32 लाख टन, ऑस्ट्रेलिया के पास 5.95 लाख टन और अमेरिका के पास तकरीबन 5.95 लाख टन भंडार है.  चीन के पास चार लाख टन और तुर्की के पास तीन लाख टन, वहीं नॉर्वे के पास 3.5 लाख टन भंडार है. भारत का भंडार सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण है. ये भंडार मुख्य रूप से केरल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय रेत में हैं.

यह स्थिति भारत को एक थोरियम महाशक्ति बनने का अवसर देती है. थोरियम को भविष्य का परमाणु ईंधन कहा जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार एक टन थोरियम से उतनी ही ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है जितनी 25 टन यूरेनियम या लगभग 250000 टन कोयले से मिलती है. थोरियम से चलने वाले रिएक्टर अधिक सुरक्षित होते हैं.

और इनमें परमाणु दुर्घटना की संभावना बेहद कम होती है.  इसके अलावा थोरियम से निकलने वाला रेडियोधर्मी कचरा बहुत कम और अल्पजीवी होता है. यही कारण है कि थोरियम को स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा का भविष्य माना जा रहा है. भारत ने इस दिशा में दशकों पहले योजना बनाई थी.

भारत का तीन स्तरीय परमाणु कार्यक्रम इसी लक्ष्य की ओर इशारा करता है. पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करके बिजली उत्पादन किया गया.  दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तैयार किए गए और अब तीसरे चरण में थोरियम रिएक्टर पर काम हो रहा है. भारत का लक्ष्य है 2050 तक अपनी 25 फीसदी बिजली थोरियम से उत्पन्न करना.

भारत यदि थोरियम आधारित ऊर्जा को अपनाता है तो यह न केवल घरेलू स्तर पर लाभकारी होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने का भी अवसर बनेगा. ग्रीन एनर्जी निवेशकों के लिए भारत एक प्रमुख गंतव्य बन सकता है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि भारत 2040 तक थोरियम को अपने ऊर्जा मिश्रण में 15-20 फीसदी तक ला देता है तो उसकी जीडीपी वृद्धि दर में हर साल 0.5 से 1 फीसदी अतिरिक्त बढ़ोत्तरी संभव है. इसका अर्थ है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2040 तक 10 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक हो सकती है.

वैश्विक परिदृश्य में देखें तो अमेरिका, चीन और ब्राजील भी थोरियम पर शोध कर रहे हैं. लेकिन उनके पास न तो भारत जितना भंडार है और न ही दशकों का अनुभव. भारत यदि इस क्षेत्र में नेतृत्व करता है तो वह थोरियम तकनीक और ऊर्जा का निर्यातक बन सकता है. यह स्थिति भारत को वैसा ही वैश्विक महत्व देगी जैसा तेल उत्पादक देशों को 20वीं सदी में मिला था.  

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