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सोशल मीडिया और असंस्कृति की चुनौती

By गिरीश्वर मिश्र | Updated: February 25, 2025 06:35 IST

सोशल मीडिया में आज विशेष चिंता वाली बात सेक्स और हिंसा की व्यापक उपस्थिति है

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सोशल मीडिया आज संचार की दुनिया में एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है. उसकी सक्रिय उपस्थिति से आबालवृद्ध सभी प्रभावित हो रहे हैं. उसकी अपरिहार्य, तीव्र लुभावनी और सुगम उपस्थिति आज समाज में सबको अपने आगोश में लेती जा रही है. सूचना से आगे बढ़ कर सोशल मीडिया हमारी निजी उपस्थिति, उसकी सार्थकता और जीवन के सरोकार इत्यादि सबको प्रभावित कर रहा है.

हमारी अस्मिता को रचता हुआ वह किसी दुनिया या सत्य का प्रतिनिधित्व या प्रस्तुति से आगे बढ़ कर अपनी एक स्वायत्त दुनिया बना चुका है. उसका अपना वजूद वास्तविक दुनिया को भी गढ़ रहा है. खास तौर पर संचार प्रौद्योगिकी की दुनिया में ‘मोबाइल’ के जरिये सोशल मीडिया ने आम आदमी की जिंदगी में जिस तरह की जबरदस्त सेंधमारी की है उसका निकट इतिहास में कोई जोड़ नहीं दिखता. इसकी लोकप्रियता कितनी है इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है.

लोग जीवन में बिताए जाने वाले समय में घंटों इससे चिपके रहते हैं. अब मन मस्तिष्क पर छाता  हुआ यह आभासी  हस्तक्षेप  हमारे भाव-जगत को आकार देने लगा है. इस तरह वह जाने-अनजाने हमारे स्वभाव को भी बनाते-बिगाड़ते हुए प्रभावित कर  रहा है. हमारा स्वाद बदल रहा है.

हम क्या हैं और क्या होना चाहते हैं यह सब कुछ मीडिया पर टिकने लगा है. ठीक से कहें तो यह सबको अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है. आदमी के मनो-जगत में प्रवेश कर यह चुपके-चुपके हमारी आकांक्षा, अभिरुचि, गतिविधि और व्यक्तित्व सबको गढ़ने वाला एक अचूक औजार साबित हो रहा है.

ताजा घटनाक्रम में एक महानगर की प्रतिष्ठित पृष्ठभूमि से आने वाले सुपठित युवा द्वारा की गई अश्लील प्रस्तुति चर्चा का विषय बनी है. वर्चुअल प्लेटफार्म पर अभद्रता की हदें पार करने की इस शिकायत पर सबकी नजरें गई हैं. यह सब है तो पुराना धंधा परंतु इस बार बात सुप्रीम कोर्ट तक औपचारिक रूप से बात पहुंच गई.

पहुंची ही नहीं बल्कि सर्वोच्च अदालत  ने उसका तत्काल  संज्ञान भी लिया और पेशी पर आरोपी को अच्छी तरह डांट भी लगाई. इसके पहले भी उच्छृंखल रूप से सोशल मीडिया का दुरुपयोग जोर पकड़े हुए था और इसके बाद अभी भी चालू है.

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के रूप में ऐसे महानुभावों को आदर और धन संपदा भी मिलती है. इस तरह सोशल मीडिया मनोरंजन, व्यापार, शिक्षा और संस्कार सबको प्रभावित कर रहा है. सोशल मीडिया में आज विशेष चिंता वाली बात सेक्स और हिंसा की व्यापक उपस्थिति है. इसका एक से एक विद्रूप रूप मोबाइल में हर दिन, हर घड़ी परोसा जा रहा है.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र में मूल अधिकार है, परंतु इसके तहत कुछ भी करने की छूट लेने की आजादी अधिकार में नहीं है.  सोशल मीडिया को विनियमित करना और अमर्यादित उपयोग को रोकना सरकार की वरीयताओं में आना चाहिए. इस तरह के अनर्गल संचार के नकारात्मक प्रभावों से समाज को बचाना आवश्यक है.

टॅग्स :सोशल मीडियाCulture Commissionयू ट्यूबयुट्यूब वीडियो
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