अमिताभ श्रीवास्तव लोकमत समूह के हिंदी दैनिक ‘लोकमत समाचार’ के औरंगाबाद संस्करण के संपादक हैं। आप 27 साल से महाराष्ट्र को अपनी कर्मभूमि बनाकर हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं। आप राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और सिनेमा से जुड़े विषयों पर लेखन कार्य करते हैं। आपके सैकड़ों लेख, विभिन्न हस्तियों के साक्षात्कार, रिपोर्ट, विश्लेषण, टिप्पणियां प्रकाशित हो चुके हैं। आप राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के साथ रूस और ताजिकिस्तान का दौरा भी कर चुके हैं।Read More
महाराष्ट्र में अब धनगर समाज के आंदोलन को किसी तरह शांत किया तो पिछड़ी जाति वर्ग (ओबीसी) ने अपना मोर्चा खोल लिया। उसके पीछे कोई अलग नेता नहीं, बल्कि शिंदे सरकार के ही मंत्री हैं। ...
इन सभी आंदोलनों की शुरुआत में विपक्ष के नेताओं ने भले ही सरकार के खिलाफ आंदोलन समझ कर उन्हें हल्के में लेने की भूल की, लेकिन जल्द ही उन्हें समझ में आया कि इनकी आंच उन तक भी पहुंच रही है। ...
इस परिदृश्य में राजनीतिज्ञों, प्रशासन और पुलिस का एक-दूसरे को दोष देना कोरी बयानबाजी है। दरअसल सच्चाई यह है कि यह गोरखधंधा किसी एक संरक्षण में पनपा नहीं है। वर्तमान में प्रमाण भी सामने हैं। ...
भाजपा ने वर्ष 2014 में देश में सत्ता पाने के बाद यह अच्छी तरह से समझ लिया था कि वह यदि आधी आबादी यानी महिलाओं को साथ ले लेगी तो उसे अनेक राज्यों में चुनाव के जातीय समीकरणों में अधिक उलझना नहीं पड़ेगा, क्योंकि हिंदी भाषी राज्यों के साथ ही महाराष्ट्र ज ...
यहां तक कि अनेक निजी अस्पताल मरीज के गंभीर होने पर उसे सरकारी अस्पताल में भेज देते हैं। इस स्थिति के चलते सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बनना समस्याएं खड़ी होना स्वाभाविक है। ...
जब बात राज्य सरकार के कठघरे में आने की होती है, तब सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक वर्ग ही नई सरकार से बहुत संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है। उसका मानना है कि भाजपा का शिवसेना से टूटे गुट के साथ गठबंधन तो ठीक था, लेकिन उससे अजित पवार के जुड़ने की ...
वर्ष 2014 में नई सरकार आने के बाद वर्ष 2017 में फिर एक न्यायमूर्ति एस.बी. म्हसे के नेतृत्व में आयोग बना, लेकिन उनके निधन के बाद न्यायमूर्ति एमजी गायकवाड़ की नियुक्ति हुई. ...