लाइव न्यूज़ :

रूस के अनुरोध पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुलाई आपात बैठक, अमेरिका पर यूक्रेन को जैविक हथियार बनाने में मदद का आरोप

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: March 11, 2022 16:59 IST

संयुक्त राष्ट्र में रूस के उप राजदूत दिमित्री पॉलींस्की द्वारा यूएन से "यूक्रेन के क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य जैविक गतिविधियों पर चर्चा" करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाने का अनुरोध करने के बाद हुई है।

Open in App
ठळक मुद्देरूस ने दावा किया है कि अमेरिका यूक्रेन को पैसे दे रहा है ताकि वो जैविक हथियार बना सकेरूस का कहना है, लविवि, खार्किव और पोल्टावा के 30 प्रयोगशालाओं में जैविक हथियार बन रहे हैंअमेरिका ने रूस के सभी आरोपों को बेतुका बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है

मास्को: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) रूसी सरकार के अनुरोध पर शुक्रवार को एक आपात बैठक बुला रही है। इस बीच रूस ने ने दावा किया कि अमेरिका यूक्रेन की प्रयोगशालाओं में जैविक हथियारों के विकास के लिए धन मुहैया करा रहा है।

यह बैठक संयुक्त राष्ट्र में रूस के उप राजदूत दिमित्री पॉलींस्की द्वारा यूएन से "यूक्रेन के क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य जैविक गतिविधियों पर चर्चा" करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाने का अनुरोध करने के बाद हुई है।

रूस ने दावा किया है कि हाल ही में मिले दस्तावेजों से पता चलता है कि अमेरिकी रक्षा विभाग यूक्रेन को पैसे दे रहा है ताकि वो यूक्रेनी लैब में जैविक हथियार बना सके।

इस मामले में बीबीसी ने बताया कि रूसी रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को लगाये अपने आरोप में कहा कि अमेरिका यूक्रेन को जैविक हथियार विकसित करने और वायरस ले जाने के लिए रूस के प्रवासी पक्षियों की सहायता ली जा रही है। हालांकि मंत्रालय ने यूक्रेन द्वारा जैविक हथियार बनाये जाने के दावे का समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया है।

इन आरोपों के साथ रूस ने अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्यबल जैविक कार्यक्रम के तहत लविवि, खार्किव और पोल्टावा के लगभग 30 से अधिक प्रयोगशालाओं में खतरनाक संक्रामक वायरस के साथ काम कर रहे हैं।

इस बीच अमेरिका ने रूस के सभी आरोपों को बेतुका बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। इस मामले में व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने बुधवार को कहा कि बीते कई वर्षों से रूसियों द्वारा बार-बार यूक्रेन और अन्य देशों के बारे में इस तरह की भ्रामक सूचनाएं फैलाई जाती है, जिन्हें खारिज किया जाता है।

उसने कहा, "हम सभी को यह देखने की जरूरत है कि कहीं रूस तो यूक्रेन पर रासायनिक या जैविक हथियारों का संभावित उपयोग नहीं करने वाला है। रूस अपने झूठे आरोपों की आड़ में ऐसा कर सकती है और यह उसका पैटर्न है।

मामले में सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स ने गुरुवार को अमेरिकी सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सामने गवाही देते हुए रूस के आरोपों को झूठा और बेबुनियाद करार दिया।

वहीं शुक्रवार को जारी किये गये एक वीडियो में यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि उनके देश में किसी तरह का कोई रासायनिक या जैविक हथियार को नहीं विकसित किया गया है।

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा, "मैं एक का राष्ट्रपति हूं और साथ ही दो बच्चों का पिता भी हूं मेरी जमीन पर कोई रासायनिक या जैविक विनाश के हथियार विकसित नहीं किए गए हैं।

उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया यह जानती है। आप सभी जानते हैं। अगर रूस हमारे खिलाफ ऐसा कुछ करता है तो उसे सबसे कठोर प्रतिबंधों से जवाब मिलेगा।"

टॅग्स :रूस-यूक्रेन विवादरूसMoscowयूक्रेनUSUN Security CommitteeUN
Open in App

संबंधित खबरें

विश्वआज मानवता के सामने अनेक बड़ी चुनौतियां, पहले कोरोना आया, फिर युद्ध और अब energy crisis?, पीएम मोदी ने कहा- ये आपदाओं का दशक, वीडियो

विश्वशी जिनपिंग और ट्रंप में बनी सहमति! ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज संकट पर चीन दौरे के बाद ट्रंप का बड़ा खुलासा

भारतयह समय राजनीति का नहीं, देश संभालने का है

ज़रा हटकेरूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुए जवान, परिवार ने मोक्ष भूमि गया जी के पवित्र फल्गु नदी तट पर किया पिंडदान-तर्पण

भारतपश्चिम बंगाल व्लादिमीर लेनिनः प्रतिमाएं केवल धातु या पत्थर नहीं होतीं?

विश्व अधिक खबरें

विश्व'कोई समझौता नहीं, कोई दोहरा मापदंड नहीं': भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने खींची आतंकवाद पर रेखा

विश्वप्रेस फ्रीडम पर पीएम मोदी के ‘सवाल टालने’ पर नॉर्वेजियन पत्रकारों के साथ MEA की तीखी बहस, विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) कहा- "बताता हूँ भारत क्या है" | WATCH

विश्वकतर, सऊदी अरब और यूएई के अनुरोध पर ईरान पर हमला नहीं किया, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा-युद्ध में मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान पर कोई बात नहीं

विश्वयुद्ध के बादल छंटे? डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को रोका, तेहरान के साथ 'बड़ी बातचीत' का किया दावा

विश्वडार्विन, लिंकन, मार्क्स और समानता का साझा सिद्धांत