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तुर्की: एर्दोगन तीसरी बार संभालेंगे देश की कमान, लेंगे राष्ट्रपति पद की शपथ

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: June 3, 2023 13:40 IST

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन संसद में उद्घाटन के बाद राजधानी अंकारा स्थित अपने महल में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे, इस कार्यक्रम में दुनिया के दर्जनों नेता शामिल होंगे।

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ठळक मुद्देतुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन आज तीसरी बार लेंगे राष्ट्रपति पद की शपथ शपथ समारोह राजधानी अंकारा में होगा, जिसमें दुनिया के दर्जनों नेता शामिल होंगेबीते फरवरी में तुर्की में आये विनाशकारी भूकंप के बावजूद एर्दोगन ने जीता है चुनाव

अंकारा:तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने अपने दो दशक के शासन को पांच साल और बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक एकतरफा चुनाव जीतने के बाद शनिवार को एक बार फिर राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि संसद में उद्घाटन के बाद राजधानी अंकारा स्थित उनके महल में एक भव्य समारोह होगा, जिसमें दुनिया के दर्जनों नेता शामिल होंगे।

एर्दोगन तुर्की के परिवर्तनकारी लेकिन विभाजनकारी नेता माने जाते हैं। इन्होंने बेहद शक्तिशाली विपक्षी गठबंधन के खिलाफ 28 मई का चुनाव जीतकर अपनी सत्ता को लगातार बरकरार रखा है। आश्चर्य की बात यह है कि बीते फरवरी में तुर्की में आये विनाशकारी भूकंप के बाद उपजे आर्थिक संकट और गंभीर आलोचना के बावजूद एर्दोगन यह चुनाव जीतने में सफल रहे।

इस चुनाव में एर्दोगन ने कुल 52.18 फीसदी वोट हासिल किए, जबकि उनके धर्मनिरपेक्ष प्रतिद्वंद्वी केमल किलिकडारोग्लू को 47.82 फीसदी मत मिला। इस चुनाव को जीतने के साथ एर्दोगन तुर्की के सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति रहने वाले नेता भी हो गये हैं। लेकिन उन्हें अपने तीसरे कार्यकाल में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो पश्चिम के साथ अर्थव्यवस्था और विदेश नीति के तनाव से प्रेरित है।

बीसीए रिसर्च के मुख्य भू-राजनीतिक रणनीतिकार मैट गर्टकेन ने कहा, "अगर राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें इस चुनाव में एर्दोगन के जीत से उनके द्वारा अपनाई जा रही स्वतंत्र विदेश नीति अब आगे और भी मजबूत होगा।"

उन्होंने कहा, "तुर्की की स्वंत्रत विदेश नीति का उद्देश्य है कि पूर्वी और निरंकुश राज्यों से अधिकतम आर्थिक और रणनीतिक लाभ निकालना है, इतना ही नहीं पश्चिमी लोकतंत्रों के साथ संबंधों को स्थायी रूप से टूटने से रोकना भी एर्दोन के सामने भारी चुनौती है। अब चूंकि एर्दोगन सत्ता पर काबिज हो गये हैं, ऐसे में एक बार फिर पश्चिम के साथ तनाव फिर से बढ़ने की संभावना है।"

राष्ट्रपति के तप पर देश की आर्थिक समस्याओं को हल करना एर्दोगन की पहली प्राथमिकता होगी क्योंकि मुद्रास्फीति 43.70 फीसदी पर चल रही है, आंशिक रूप से विकास को प्रोत्साहित करने के लिए ब्याज दरों में कटौती की उनकी अपरंपरागत नीति के कारण है। शनिवार की देर रात राष्ट्रपति अपने नए मंत्रिमंडल के साथ शपथ लेने वाले हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि पूर्व वित्त मंत्री मेहमत सिमसेक भी एर्दोगन के साथ सरकार में शामिल हो सके हैं।

टॅग्स :तुर्कीAnkara
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