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अमेरिकी सेना के मददगार नागरिकों के बायोमीट्रिक डाटा तक हो सकती है तालिबान की पहुंच

By भाषा | Updated: August 24, 2021 19:24 IST

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(लुसिया नलबैंडियन, शोधकर्ता, कनाडा एक्सीलेंस रिसर्च चेयर इन माइग्रेशन एंड इंटीग्रेशन, रायर्सन यूनिवर्सिटी) टोरंटो (कनाडा), 24 अगस्त (द कन्वरसेशन) वर्ष 2007 में अमेरिका की सेना ने 15 लाख से अधिक अफगानों के आंखों की पुतली, उंगली के निशान और चेहरे के स्कैन को इकट्ठा करने और मिलान करने के लिए एक छोटे, हाथ से इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण का उपयोग कर बायोमीट्रिक डेटा का डेटाबेस तैयार किया। इंटरएजेंसी आइडेंटिटी डिटेक्शन इक्विपमेंट (एचआईडीई) के रूप में जाना जाने वाला हाथ से पकड़ने वाला उपकरण, शुरू में अमेरिकी सरकार द्वारा विद्रोहियों और अन्य वांछित व्यक्तियों का पता लगाने के साधन के रूप में विकसित किया गया था। समय के साथ दक्षता के लिए इस सिस्टम का युद्ध के दौरान अमेरिका की सहायता करने वाले अफगानों के डेटा को शामिल करने के लिए किया गया। आज एचआईडीई बायोमीट्रिक डेटा के डेटाबेस तक पहुंच प्रदान करता है। इसमें गठबंधन बलों की सहायता करने वाले लोगों के डेटा भी शामिल हैं। सैन्य उपकरणों और इस डाटाबेस पर अब तालिबान का नियंत्रण है जिसने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। यह नवीनतम घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संगठन अभी तक संघर्ष क्षेत्रों में और संकट के समाधान में बायोमीट्रिक डेटा को सुरक्षित रूप से एकत्र और उपयोग क्यों नहीं कर सकते हैं। बायोमीट्रिक डेटा, या बस बायोमेट्रिक्स, अद्वितीय शारीरिक या व्यवहारिक विशेषताएं हैं जिनका उपयोग किसी व्यक्ति की पहचान करने के लिए किया जा सकता है। इनमें चेहरे की विशेषताएं, आवाज के पैटर्न, उंगलियों के निशान या आंखों की पुतलियों के निशान शामिल हैं। अमेरिकी सेना के बायोमीट्रिक्स टास्क फोर्स द्वारा 2007 की एक प्रस्तुति के अनुसार, एचआईडीई ने एक आंतरिक डेटाबेस के लिए उंगलियों के निशान, आंखों की पुतलियों, चेहरे की तस्वीरें और संबंधित व्यक्तियों के जीवनी संबंधी प्रासंगिक डेटा एकत्र और मिलान किया। मई 2021 की एक रिपोर्ट में, मानवविज्ञानी नीना टॉफ्ट जनेगारा ने बताया कि कैसे इराक में अमेरिकी सेना द्वारा बायोमीट्रिक्स का संग्रह और उपयोग अफगानिस्तान में इसी तरह के प्रयासों के लिए मिसाल कायम करता है। वहां ‘‘अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना कमांडर गाइड टू बायोमेट्रिक्स’’ ने अधिकारियों को सलाह दी कि ‘‘जितना संभव हो उतने अफगानों को नामांकित करने के प्रयास करें’’ अमेरिकी बायोमीट्रिक सिस्टम से प्रेरित होकर, अफगान सरकार ने एक राष्ट्रीय पहचान पत्र स्थापित करने का काम शुरू किया, जिसमें विश्वविद्यालय के छात्रों, सैनिकों और पासपोर्ट और ड्राइवर लाइसेंस आवेदनों से बायोमेट्रिक डेटा एकत्र किया गया। हालांकि इस समय यह अनिश्चितता कायम है कि क्या तालिबान ने एचआईडीई पर कब्जा कर लिया है और अगर वह व्यक्तियों की उपरोक्त बायोमेट्रिक जानकारी तक पहुंच सकता है, तो उन लोगों के लिए जोखिम अधिक है जिनका डेटा सिस्टम पर दर्ज है। वर्ष 2016 और 2017 में, तालिबान ने देश भर में यात्री बसों को सभी यात्रियों की बायोमीट्रिक जांच करने के लिए रोक दिया ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि बस में सरकारी अधिकारी थे या नहीं। लोगों को अधिक जोखिम में डालना हम मोबाइल सुविधाओं जैसे ऐप्पल की टच आईडी या सैमसंग के फिंगरप्रिंट स्कैनर के माध्यम से या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से गुजरते समय चेहरे की पहचान प्रणाली से जुड़कर बायोमेट्रिक तकनीक से परिचित हैं। इन घटनाओं के कारण कभी कभी बंघक संकट पैदा हुआ। वर्ष 2002 में शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) ने पाकिस्तान से 15 लाख से अधिक अफगान शरणार्थियों के प्रत्यावर्तन के दौरान आईरिस-पहचान प्रौद्योगिकी की शुरुआत की। हालांकि, जैसा कि संचार विद्वान मिर्का मदियानो का तर्क है, आईरिस पहचान में दो से तीन प्रतिशत की त्रुटि दर है, यह सुझाव देता है कि कथित झूठे दावेदारों में से लगभग 11,800 दावेदारों को गलत तरीके से सहायता से वंचित कर दिया गया था। बायोमीट्रिक डेटा एकत्र करना विशिष्ट संदर्भों में उपयोगी है, इसे सावधानी से किया जाना चाहिए। उन लोगों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना जो सबसे अधिक जोखिम में हो सकते हैं और जिनके साथ समझौता या असुरक्षित होने की संभावना है, यह महत्वपूर्ण है। यदि सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित नहीं की जा सकती है, तो बायोमीट्रिक डेटा संग्रह और उपयोग को संघर्ष क्षेत्रों और संकट प्रतिक्रिया में तैनात नहीं किया जाना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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