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यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच बेलारूस ने उठाया बड़ा कदम, गैर-परमाणु राष्ट्र का दर्जा किया खत्म, रूस के लिए परमाणु हथियार रखने का रास्ता साफ

By अनिल शर्मा | Updated: February 28, 2022 11:13 IST

रूसी समाचार एजेंसियों ने बेलारूस के केंद्रीय चुनाव आयोग का हवाला देते हुए कहा कि भाग लेने वालों में से 65.2% ने पक्ष में मतदान किया।

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ठळक मुद्दे बेलारूस ने संवैधानिक जनमत संग्रह के जरिए अपना गैर-परमाणु राष्ट्र का दर्जा खत्म कर दिया हैरविवार को कराए गए जनमत संग्रह में 65.2% लोगों ने पक्ष में मतदान कियाबेलारूस के इस कदम से रूस के लिए वहां परमाणु हथियार रखने का रास्ता साफ हो गया है

Russia Ukraine Crisis: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के पड़ोसी देश बेलारूस ने बड़ा कदम उठाया है। बेलारूस ने संवैधानिक जनमत संग्रह के जरिए अपना गैर-परमाणु राष्ट्र का दर्जा खत्म कर दिया है। बेलारूस के इस कदम से रूस के लिए वहां परमाणु हथियार रखने का रास्ता साफ हो गया है।

रूसी समाचार एजेंसियों ने बेलारूस के केंद्रीय चुनाव आयोग का हवाला देते हुए कहा कि भाग लेने वालों में से 65.2% ने पक्ष में मतदान किया। राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के कड़े नियंत्रित शासन को देखते हुए परिणाम थोड़ा आश्चर्यचकित करने वाला था। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको ने कहा है, "अगर आप (पश्चिम) पोलैंड और लिथुआनिया को परमाणु हथियार देंगे तो हम भी परमाणु हथियार के लिए पुतिन का रूख करेंगे।" रविवार को  मतदान केंद्र में बोलते हुए, लुकाशेंको ने कहा कि वह रूस से बेलारूस को परमाणु हथियार वापस करने के लिए कह सकते हैं।

लुकाशेंको ने कहा, "यदि आप (पश्चिम) पोलैंड या लिथुआनिया को, हमारी सीमाओं पर परमाणु हथियार हस्तांतरित करते हैं, तो मैं बिना किसी शर्त के दिए गए परमाणु हथियारों को वापस करने के लिए पुतिन की ओर रुख करूंगा।"

बेलारूस ने ऐसे समय में ये कदम उठाया है जब रूस यूक्रेन पर पूरी तरह से कब्जा करना चाहता है। लुकाशेंको पहले दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। पश्चिम पहले ही कह चुका है कि वह जनमत संग्रह के परिणामों को मान्यता नहीं देगा, जो सरकार के घरेलू विरोधियों पर व्यापक कार्रवाई की पृष्ठभूमि के खिलाफ हो रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, रविवार तक बेलारूस में एक हजार से अधिक राजनीतिक कैदी थे। वहीं जनमत संग्रह के बाद कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए जिसके बाद 290 लोगों को हिरासत में लिया गया।

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