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रानिल विक्रमसिंघे चुने गए श्रीलंका के अगले राष्ट्रपति, मिले 134 सांसदों के वोट

By विनीत कुमार | Updated: July 20, 2022 15:14 IST

श्रीलंका की संसद ने रानिल विक्रमसिंघे को देश के अगले राष्ट्रपति के तौर पर चुनाव है। उनके पक्ष में 134 वोट पड़े। वहीं, अन्य दो उम्मीदवारों को 82और तीन वोट मिले।

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ठळक मुद्देरानिल विक्रमसिंघे को 134 सांसदों के वोट मिले, डलास अल्हाप्पेरुमा को 82 मत।श्रीलंका में 1978 के बाद पहली बार सांसदों ने गुप्त मतदान से चुना राष्ट्रपति।श्रीलंका में भारी प्रदर्शन के बीच गोटबाया राजपक्षे ने देश छोड़कर भागने के बाद इस्तीफा दे दिया था।

कोलंबो: रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका में नया राष्ट्रपति चुना गया है। नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए आज ही श्रीलंका की संसद में मतदान सुबह दस बजे शुरू हो गया था। रानिल विक्रमसिंघे को 134 सांसदों के वोट मिले। श्रीलंका में 225 सदस्यीय संसद में राष्ट्रपति बनने के लिए किसी उम्मीदवार को 113 से अधिक मत हासिल करना था। हालांकि, अहम बात ये भी है कि प्रदर्शनकारी पहले से ही रानिल विक्रमसिंघे का विरोध करते रहे हैं। 

बदले हालात में श्रीलंका में राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला तीन उम्मीदवारों रानिल विक्रमसिंघे, डलास अल्हाप्पेरुमा और वामपंथी जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच था।  डलास अल्हाप्पेरुमा को जहां 82 वोट मिले तो वहीं अनुरा कुमारा दिसानायके के खाते में महज तीन वोट आए।

1978 के बाद पहली बार सांसदों ने गुप्त मतदान से चुना राष्ट्रपति

श्रीलंका में 1978 के बाद से पहली बार राष्ट्रपति का चुनाव सांसदों द्वारा गुप्त मतदान के जरिए किया गया। इससे पहले 1993 में कार्यकाल के बीच में ही राष्ट्रपति का पद तब खाली हुआ था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा की हत्या कर दी गयी थी। उस वक्त डी बी विजेतुंगा को संसद ने सर्वसम्मति से प्रेमदासा का कार्यकाल पूरा करने का जिम्मा सौंपा था।

दरअसल, देश में अब ेतक के सबसे भीषण आर्थिक संकट से निपटने में सरकार की नाकामी के बाद लोग सड़कों पर उतर आए हैं और राजनीतिक उथल पुथल तथा देश में फैले अराजकता के माहौल के बीच गोटबाया राजपक्षे ने पिछले दिनों राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के ऐलान से पहले ही राजपक्षे देश से भाग गए थे। 

इसके बाद से रानिल विक्रमसिंघे ही बतौर कार्यकारी राष्ट्रपति जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नतीजों के बाद विक्रमसिंघे ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बरकरार रखने के लिए संसद का आभार व्यक्त किया और राष्ट्रपति पद के दोनों प्रतिद्वंद्वियों तथा पूर्व राष्ट्रपतियों-महिंदा राजपक्षे और मैत्रीपाला सिरिसेना से सहयोग मांगा। विक्रमसिंघे ने कहा, ‘अब चूंकि यह चुनाव समाप्त हो गया है तो हमें विभेद भी समाप्त करना चाहिए....मैं आपसे बात करने के लिए तैयार हूं।’

(भाषा इनपुट)

टॅग्स :Ranil WickremesingheSri LankaGotabaya Rajapaksa
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