श्रीलंका ऊपर से शांत, पर जनता में असंतोष बरकरार, श्रीलंका के पूर्व मंत्री डॉ. विजयदासा राजपक्षे
By फहीम ख़ान | Updated: May 16, 2026 20:56 IST2026-05-16T20:56:13+5:302026-05-16T20:56:32+5:30
शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और बौद्ध विचारक के रूप में पहचान रखने वाले डॉ. राजपक्षे पिछले तीन दशकों से श्रीलंका के राष्ट्रपतियों के कानूनी और नीतिगत सलाहकार रहे हैं.

श्रीलंका ऊपर से शांत, पर जनता में असंतोष बरकरार, श्रीलंका के पूर्व मंत्री डॉ. विजयदासा राजपक्षे
नागपुर: श्रीलंका में फिलहाल स्थिति ऊपर से शांत दिखाई दे रही है, लेकिन जनता के भीतर असंतोष अब भी कायम है और नागरिकों को स्थिरता, विकास तथा प्रभावी नेतृत्व की अपेक्षा है. यह प्रतिपादन श्रीलंका के पूर्व मंत्री, राष्ट्रपति के कानूनी सलाहकार और श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. विजयदासा राजपक्षे ने किया. वे नागपुर में आयोजित विश्व शांति परिषद के दौरान शनिवार को पत्र परिषद में बोल रहे थे.
शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और बौद्ध विचारक के रूप में पहचान रखने वाले डॉ. राजपक्षे पिछले तीन दशकों से श्रीलंका के राष्ट्रपतियों के कानूनी और नीतिगत सलाहकार रहे हैं. उन्होंने विधि, शिक्षा, बौद्ध धर्म, श्रम तथा जेल सुधार जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली है. उन्होंने राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा था.
श्रीलंका के आर्थिक संकट के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति और सरकार की गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए डॉ. राजपक्षे ने कहा कि सरकार को समय-समय पर नीतिगत बदलावों की सलाह दी गई थी, लेकिन उसकी अनदेखी की गई. परिणामस्वरूप देश आर्थिक बदहाली की ओर चला गया और जनता का आक्रोश फूट पड़ा. उन्होंने यह भी खेद व्यक्त किया कि कई गलत फैसलों के कारण शांतिप्रिय बौद्ध देश को हिंसा का सामना करना पड़ा.
उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद स्थिति में कुछ हद तक सुधार जरूर हुआ है, किंतु वर्तमान नेतृत्व भी जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में असफल साबित हो रहा है. इसी वजह से आने वाले समय में श्रीलंका में फिर राजनीतिक बदलाव और चुनावों के संकेत दिखाई दे रहे हैं.
इस अवसर पर श्रीलंका के अमरपुरा महा निकाय के महानायक थेरो मदमपग्मा अस्साजी थिस्सा, भंते देवमित्ता, किरण महल्ले, नितिन गजभिये और स्मिता वाकड़े उपस्थित थे.
डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के कार्य का गौरव
1950 में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर विश्व बौद्ध परिषद के लिए श्रीलंका गए थे, यह याद दिलाते हुए डॉ. राजापाक्षे ने कहा, ‘‘बाद में नागपुर में उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली और वैशाख दिवस को वैश्विक मान्यता दिलाने के लिए भी पहल की.’’
संकट काल में भारत की मदद अहम
श्रीलंका में आर्थिक और राजनीतिक संकट पैदा होने के बाद भारत द्वारा दिए गए बड़े आर्थिक और मानवीय सहयोग के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं, बुनियादी ढांचे और 500 एम्बुलेंस उपलब्ध कराकर भारत ने श्रीलंका को बड़ा सहारा दिया. राजपक्षे ने यह भी खुलासा किया कि श्रीलंका के बंदरगाह को चीन को सौंपने के फैसले का विरोध करते हुए उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.