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नेपाल राजनीतिक संकट: इस्तीफे के दबाव के बीच राष्ट्रपति से मिले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, बजट सत्र टाला

By निखिल वर्मा | Updated: July 2, 2020 15:22 IST

Nepal Prime Minister KP Sharma Oli: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर इस्तीफे का दबाव बढ़ता जा रहा है.

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ठळक मुद्देखबर है कि प्रधानमंत्री ओली नेपाली कम्युूनिस्ट पार्टी में विभाजन करने तैयारी में हैं.पुष्प दहल प्रचंड समेत कई बड़े नेता केपी शर्मा ओली का इस्तीफा मांग चुके हैं

भारत के साथ जारी नक्शा विवाद के बीच नेपाल में तेजी से राजनीतिक घटनाक्रम बदल रहा है। नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अब अलग-थलग पड़ते दिख रहे हैं। गुरुवार को पीएम ओली ने कैबिनेट बैठक से पहले राष्ट्रपति बिद्या भंडारी से मुलाकात की है। वहीं आपात कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने मौजूदा बजट सत्र को रद्द करने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री ओली आज नेपाल की जनता को भी संबोधित कर सकते हैं।

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता लगातार प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में पुष्प कमल दहल प्रचंड, माधव नेपाल, झलनाथ खनाल और बामदेव गौतम समेत वरिष्ठ नेताओं ने ओली से इस्तीफा देने को कहा था। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार 48 सदस्यीय स्थायी समिति और नौ सदस्यीय केंद्रीय सचिवालय, दोनों में प्रधानमंत्री अल्पमत में हैं।  इससे पहले अप्रैल में भी वरिष्ठ नेताओं ने ओली को प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने को कहा था।

ओली का दावा, हटाने के प्रयास हो रहे हैं

कुछ दिनों पहले ओली ने हाल में कहा था कि नेपाल के नए राजनीतिक मानचित्र के प्रकाशन के बाद उन्हें हटाने के प्रयास हो रहे हैं। ओली ने कहा था, ‘‘अपनी जमीन पर दावा कर मैंने कोई भूल नहीं की। नेपाल के पास 146 साल तक इन इलाकों का अधिकार रहने के बाद पिछले 58 साल से इस जमीन को हमसे छीन लिया गया था। ’’ हालांकि नेपाल के इस दावे को भारत खारिज कर चुका है।

प्रचंड ने जताई पीएम के बयान पर नाराजगी

ओली की भारत विरोधी टिप्पणी के लिए पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ समेत सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं ने उनके इस्तीफे की मांग की थी। शीर्ष नेताओं ने कहा है कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी न तो राजनीतिक तौर पर ठीक थी न ही कूटनीतिक तौर पर यह उचित थी। उन्होंने आगाह किया, प्रधानमंत्री द्वारा इस तरह के बयान देने से पड़ोसी देश के साथ हमारे संबंध खराब हो सकते हैं।

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