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भारत रूस की जमीन पर करेगा सैन्य अभ्यास, अमेरिका ने व्यक्त की चिंता

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: August 31, 2022 17:17 IST

अमेरिका ने भारत द्वारा रूस के साथ सैन्य अभ्यास पर कहा कि यूक्रेन के साथ बिना किसी कारण बर्बर युद्ध छेड़ने वाले रूस के साथ किसी भी अन्य देश का सैन्य अभ्यास करना पूरे विश्व के लिए बेहद चिंता का विषय है।

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ठळक मुद्देअमेरिका ने भारत-रूस सैन्य अभ्यास ‘वोस्तोक 2022’ पर चिंता व्यक्त करते हुए निराशा जताई हैभारत का नाम न लेते हुए अमेरिका ने कहा किसी भी देश का रूस के साथ सैन्य अभ्यास करना चिंताजनक विषय हैसैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने वाले देश याद रखें कि रूस ने यूक्रेन पर नहीं बल्कि मानवता पर हमला किया है

वॉशिंगटन:अमेरिका इस समय भारत-रूस के होने वाले सैन्याभ्यास से परेशान दिखाई दे रहा है। अमेरिका की चिंता इस बात से झलकती है कि उसने भारत का नाम न लेते हुए भी कहा कि किसी भी देश का रूस के साथ सैन्याभ्यास करना बेहद चिंताजनक विषय है।

इस मामले में वाइट हाउस की ओर से कहा गया है कि यूक्रेन के साथ बिना किसी कारण बर्बर और भयावह युद्ध छेड़ने वाले रूस के साथ किसी भी अन्य देश का सैन्य अभ्यास करना न केवल दक्षिण एशिया के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए बेहद चिंता का विषय है।

सामरिक विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका की यह चिंता इस कारण है क्योंकि सितंबर के पहले सप्ताह में भारत और चीन की सेनाएं रूस में होने वाले सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने वाली हैं। वाइट हाउस ने रूस में एक से सात सितंबर तक चलने वाले कई देशों के सैन्य अभ्यास ‘वोस्तोक 2022’ के बारे में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में यह बात कही।

रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बाद से रूस पहली बार इतने बड़े वैश्विक स्तर का सैन्य अभ्यास ता आयोजन कर रहा है। इस कारण यूक्रेन तो भयभीत है, उसके साथ अमेरिका भी अपनी चिंता वैश्विक पटल पर जाहिर कर रहा है।

इस संबंध में वाइट हाउस की प्रेस सचिव जीन पियरे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "किसी भी देश का रूस के साथ अभ्यास करना अमेरिका के लिए चिंताजनक है, क्योंकि रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अकारण युद्ध छेड़ा है। लेकिन हम चाहते हैं कि रूस के साथ सैन्य अभ्यास में भाग लेने वाले प्रत्येक देश इस विषय में खुद निर्णय लें कि क्या वो सही कर रहे हैं। अमेरिका उनके सही-गलत का फैसला उन्ही पर छोड़ना चाहता है। लेकिन सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने वाले देश इस बात को कभी न भूलें कि रूस ने केवल यूक्रेन पर नहीं बल्कि पूरी मानवता पर हमला करने का दुस्साहस किया है।"

पियरे द्वारा यह कहे जाने के बाद पत्रकारों ने जब उसने कि भारत भी युद्ध अभ्यास में हिस्सा ले रहा है तो वो भारत से क्या कहना चाहेंगे। इसके जवाब में उन्होंने कहा, "अमेरिका का स्पष्ट मानना है कि यूक्रेन के खिलाफ रूस द्वारा छेड़ा गया युद्ध पूरी तरह से बेवजह है। इसलिए न केवल भारत सभी देशों द्वारा, जो रूस की जमीन पर युद्ध का अभ्यास करने जा रहे हैं। वो रूस के हमले को वैधता दे रहे हैं। इसलिए हमारा मानना है कि रूस के साथ किसी भी देश का सैन्य अभ्यास पूरे विश्व के लिए चिंताजनक है।"

पत्रकारों ने प्रेस सचिव पियरे से पूछा कि क्या अमेरिका इस संबंध में कोई कार्रवाई करने की योजना बना रहा है तो उन्होंने कहा "मेरे पास मौजूदा समय में फिलहाल कुछ भी बताने लायक नहीं है। हम अभी स्तिथियों का आंकलन कर रहे हैं और सैन्य अभ्यास में हिस्सा ले रहे देशों पर भी नजर रख रहे हैं। भविष्य में इस विषय में हमारी जो भी सोच बनेगी, उससे प्रेस को अवगत करवा दिया जाएगा।"

मालूम हो कि अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध के दौरान कई बार भारत से यूक्रेन के पक्ष में खुलकर समर्थन करने की अपील की थी, लेकिन भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कभी भी रूस विरोधी रूख नहीं अपनाया। यहां तक भारत संयुक्त राष्ट्र में पेश हुए रूस के खिलाफ कई प्रस्तावों से भी गैर-हाजिर रहा था।

भारत ने परोक्षतौर पर अमेरिका समेत तमाम देशों को यह संदेश भी दे दिया है कि वो रूस के खिलाफ प्रत्यक्षतौर पर कुछ नहीं करेगा। इसके बाद अमेरिका ने भी कहा था कि भारत रूस के साथ अपने पुराने संबंधों के कारण यूक्रेन युद्ध पर अपनी राय को रूस विरोध नहीं हता रहा है।

अमेरिका ने इस मसले में यहां तक कहा था कि हम दक्षिण एशिया में तब तक मजबूत नहीं हो सकते, जब तक रूस-भारत के पुराने रिश्ते बने रहेंगे। अमेरिका ने कहा था कि हमें आने वाले उस समय का इंतजार है, जब भारत रूस के साथ अपने रिश्तों को भूलते हुए उससे अलग हो जाए। 

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