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AIIMS: खेल-खेल में 4 साल के बच्चे के गले में फंस गई थी सीटी, दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 25, 2023 12:21 IST

मामले में बोलते हुए पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ प्रबुध गोयल ने कहा है कि‘‘बच्चे को आपातकालीन वार्ड से सीधे ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया, जहां हमने उसकी ब्रोंकोस्कोपी की। ब्रोंकोस्कोपी जीवन और मृत्यु के बीच की एक चुनौती है। इसके अलावा इससे दिमाग को नुकसान होने का खतरा रहता है।’’

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ठळक मुद्देदिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने एक अनोखा काम किया है। उन लोगों ने एक चार साल के बच्चे के गले से फंसी हुई सीटी को बाहर निकाला है। डॉक्टरों की माने तो सीटी को बाहर निकालने में बच्चे के जान को अधिक खतरा था।

नई दिल्ली: दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों ने चार साल के बच्चे की सांस की नली में फंसी सीटी को एंडोस्कोपी के जरिये बाहर निकालने का अनूठा कारनामा कर दिखाया है। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे के गले से सीटी को निकालना कोई आसान काम नहीं था और इसमें उसके जान को भी खतरा था। 

डॉक्टरों की माने तो बच्चे को सांस लेने काफी दिक्कत हो रही थी और सीटी अंदर फंसे होने के कारण उसे खांसी भी हो रही थी। बच्चे के गले में सीटी इस तरह से फंस गया था कि वह जब भी सांस लेता था तो सीटी से आवाज भी आती थी। ऐसे में डॉक्टरों ने काफी जोखिम लेकर बच्चे का ब्रोंकोस्कोपी किया और उसके गले से सीटी को बाहर निकाला है। 

क्या है पूरा मामला

पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ प्रबुध गोयल ने कहा, ‘‘हरियाणा के नूंह जिले के रहने वाले शाहीन को रविवार सुबह अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक लाया गया था।’’ डॉ गोयल ने कहा कि बच्चे के पिता ने उसके लिए एक जोड़ी चप्पल खरीदी थी, जिसमें एक सीटी लगी हुई थी। उन्होंने बताया कि चप्पल से सीटी हट गई और शाहीन ने उसे अपने मुंह में डाल लिया तथा वह उसकी सांस नली में फंस गयी। 

इस तरह गले से निकला सीटी

डॉ गोयल ने आगे कहा है कि ‘‘आपातकालीन वार्ड में लाये जाने पर बच्चे को खांसी आ रही थी। उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी, क्योंकि सीटी उसकी सांस की नली में जा फंसी थी। सांस लेते समय बच्चे के मुंह से सीटी की आवाज भी आ रही थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बच्चे को आपातकालीन वार्ड से सीधे ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया, जहां हमने उसकी ब्रोंकोस्कोपी की। ब्रोंकोस्कोपी जीवन और मृत्यु के बीच की एक चुनौती है। इसके अलावा इससे दिमाग को नुकसान होने का खतरा रहता है।’’  

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