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बंग्लादेश की पहली ट्रांसजेंडर न्यूज एंकर बनी तश्नुवा, बुलेटिन समाप्त करते ही रो पड़ी, देखें वीडियो

By अनुराग आनंद | Updated: March 10, 2021 13:00 IST

बांग्लादेश की पहली ट्रांसजेंडर न्यूजरीडर तश्नुवा ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अपनी पहली बुलेटिन पढ़कर अपने करियर की नई शुरुआत की। बुलेटिन को पूरा करने के बाद वह भावुक हो गई थी। 

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ठळक मुद्देबांग्लादेश की पहली ट्रांसजेंडर की तौर पर तश्नुवा ने पब्लिक हेल्थ विषय से मास्टर डिग्री प्राप्त कर इतिहास रच दिया। बांग्लादेश सरकार ने 2013 से ट्रांस लोगों को एक अलग लिंग के रूप में पहचाने जाने की अनुमति दी है।

नई दिल्ली: तश्नुवा बांग्लादेश की पहली ट्रांसजेंडर न्यूजरीडर बन गई है। अपने करियर के अगले पड़ाव की शुरुआत तश्नुवा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर की है। अपनी पहली बुलेटिन को समाप्त करते ही तश्नुवा के आंखों में आंसू आ गए और वह भावुक हो गई। 

इंडिया डॉट कॉम के मुताबिक, तश्नुवा आनन शिशिर ने तीन मिनट तर समाचार बुलेटिन को 8 मार्च के दिन पढ़ा। इस तरह से तश्नुवा ने बुलेटिन पढ़ते ही बंग्लादेशी पत्रकारिता के इतिहास में अपना नाम जोड़ दिया है। वह ट्रांसजेंडर समुदाय से आने वाली पहली न्यज एंकर बनी है। 

तश्नुवा ने बताया कि उसे कई वर्षों तक यौन भेदभाव और अपमान का सामना करना पड़ा है। न्यूज एंकर ने बताया कि ट्रांसजेंडर होने की वजह से उसके पिता ने भी उससे किनारा कर लिया था। तश्नुवा ने अपने साथ हो रहे भेदभाव व अपमान से बचने के लिए कई बार आत्महत्या के प्रयास भी किए।

तश्नुवा का पहले नाम कमल हुसैन शिशिर के रूप में हुआ करता था, लेकिन उसने अपनी शुरुआती किशोरावस्था में ही महसूस किया कि वह एक ट्रांसजेंडर है। इसके बाद अपना नाम बदलकर उसने तश्नुवा आनन शिशिर रख लिया।

29 वर्षीय तश्नुवा ने कहा कि अपमान की वजह से उसने 4 बार आत्महत्या की कोशिश की-

मीडिया से बात करते हुए 29 वर्षीय तश्नुवा ने कहा कि उसे इतना हद तक अपमान व पीड़ा झेलना पड़ा कि उसने चार बार आत्महत्या का प्रयास किया। एंकर ने कहा कि मेरे पिता ने मुझसे सालों तक बात करना बंद कर दिया था। जब मैं इन सब चीजों का सामना नहीं कर पाई , तो मैंने अपना घर छोड़ दिया था। एंकर ने कहा कि पड़ोसियों द्वारा मेरे पिता को मुझे बताने के लिए कहा जाता था कि मुझे किस तरह से चलना व खड़ा रहना चाहिए। मैं यह सब नहीं झेल सकती थी, इसलिए मैंने अपना घर छोड़ दिया।

तश्नुवा ने पैसा कमाने के लिए सिनेमाघरों में अभिनय तक किया 

इसके बाद घर छोड़कर वह सीधे ढाका पहुंची। यहां उसने हार्मोन थेरेपी कराने का फैसला लिया। इसके बाद तश्नुवा ने यहां एक चैरिटी के लिए काम करना शुरू किया और कुछ पैसे कमाने के लिए सिनेमाघरों में अभिनय तक किया। हालांकि, उसने तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी।

तश्नुवा ने पब्लिक हेल्थ विषय से मास्टर डिग्री प्राप्त कर इतिहास रच दिया

जनवरी में, बांग्लादेश की पहली ट्रांसजेंडर की तौर पर तश्नुवा ने पब्लिक हेल्थ विषय से मास्टर डिग्री प्राप्त कर इतिहास रच दिया। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश सरकार ने 2013 से ट्रांस लोगों को एक अलग लिंग के रूप में पहचाने जाने की अनुमति दी है। 2018 में, बंगलादेश में प्रधान मंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार ने ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग के रूप में मतदान करने के लिए भी पंजीकरण करने की अनुमति दी है।

टॅग्स :बांग्लादेशअंतरराष्ट्रीय महिला दिवसशेख हसीनाढाका
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