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आखिर क्यों इस मंदिर के बाहर बिकती है शराब?

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: December 15, 2017 14:59 IST

काल भैरव मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए जाना जाता है। मंदिर में कई राज दफ्न है जिनका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। मंदिर में काल भैरव की मूर्ति स्थापित है।

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भारत के हर प्राचीन चीजों का अपना एक इतिहास होता है जिसमें कई सारे राज छिपे होते हैं। ऐसा ही एक राज उज्जैन के काल भैरव मंदिर की है जिसके बारे में जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। यहां स्थापित काल भैरव की मूर्ति देखते ही देखते शराब गट कर जाती है। मंदिर में जितने भी भक्त काल भैरव के दर्शन करने के लिए आते हैं वे प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाते हैं। इस मंदिर की एक खासियत यह है कि यहां प्रसाद के रूप में शराब ही वितरित की जाती है जिसे बड़े ही श्रद्धा से लोग ग्रहण करते हैं।

काल भैरव मंदिर का इतिहास रहस्यों से भरा यह मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर एक वाम मार्गी मंदिर है। वाम मार्गी मंदिर वो मंदिर होते हैं जहां मांस, मदिरा और मुद्रा चढ़ाई जाती है। छह हजार साल पुराने इस मंदिर में काल भैरव की मूर्ति स्थापित है। मंदिर के बाहरी दिवारों पर अन्य देवी-देवताओं कि मूर्तियां स्थापित हैं। शुरुआती दिनों में  मंदिर में जानवरों की बलि चढ़ाने की प्रथा थी। लेकिन कुछ समय बाद इस प्रथा को बंद कर दिया गया। काल भैरव की मूर्ति के शराब पीने के रहस्य का पर्दा आज तक नहीं खुल पाया। इसके अलावा इस बात का अभी तक पता नहीं चल पाया है कि शराब आखिर जाती कहां है? मूर्ति के शराब पीने का सिलसिला कुछ सालों से नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही है। 

विदेशी भी हैरान

काल भैरव की शराब पीने वाली बात सुनकर देश के लोग ही नहीं बल्कि विदेश में रहने वाले लोग भी हैरान हो गए। कई साल पहले अंग्रेजों ने इस बात की गहन तहकीकात की थी लेकिन उन्हें भी कोई  ऐसा साक्ष्य नहीं मिला कि वो ये साबित कर सके कि शराब जाती कहां है। साल 2016 में उज्जैन में महाकुंभ मेले का आयोजन चल रहा था। उस दौरान पूरे उज्जैन नगर में शराब बंद था लेकिन भगवान महाकाल के कोतवाल कहे जाने वाले काल भैरव के लिए खुद  सरकार ने शराब की व्यवस्था की गई थी। मंदिर के बाहर शराब की स्टॉल लगाई जाती है। जहां शराब आसानी से मिल जाती है। 

मंदिर की दिलचस्प किंवदंती

मंदिर के पीछे एक किवदंती बेहद प्रचलित है। पौराणिक किंवदंती के अनुसार इस धार्मिक जगह का जिक्र स्कंद पुराण में किया गया है। किंवदंती के मुताबिक एक बार चार वेदों की रचना के बाद बह्मा ने पांचवें वेद की रचना करने का फैसला लिया। इस बात पर क्रोधित भगवान शिव ने तीसरी आंख खोलकर बटुक भैरव को प्रकट किया। बटुक भैरव ने ब्रह्मा जी का पांचवा सिर काट दिया। इस पाप का पश्चाताप करने के लिए बटुक भैरव क्षिप्रा नदी के तट पर आकर तपस्या किया। तब से यहां काल भैरव की पूजा की जाती है। 

टॅग्स :रहस्यमयी मंदिरकाल भैरव मंदिर
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