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संभल के किस ब्राह्मण के घर होगा भगवान विष्णु का कल्कि अवतार, क्या है उनका नाम और किस दिन होगा जन्म, यहां हैं सारे सवालों के जवाब

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 12, 2020 14:41 IST

Kalki Avtar: श्रीमद्भागवत-महापुराण में भगवान के कल्कि अवतार का वर्णन एक श्लोक में किया गया है साथ ही उनकी कथा भी विस्तार से कही गई है।

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ठळक मुद्देमान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु का कल्कि अवतार कलियुग के आखिर में होगाश्रीमद्भागवत-महापुराण में है कल्कि अवतार से जुड़ी कथा, पापियों का नाश करने आएंगे भगवान विष्णु

हिंदू मान्यताओं में कहा गया है कि धरती पर जब-जब पाप बढ़ता है तब भगवान विष्णु धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। भगवान राम और श्रीकृष्ण ऐसे ही कुछ उदाहरण हैं। पुराणों के अनुसार कलियुग के अंत में भी भगवान विष्णु धरती पर आएंगे। मान्यताओं के अनुसार ये उनका कल्कि अवतार होगा। यह वो समय भी होगा जब पृथ्वी पर पाप चरम पर होगा और ज्यादातार लोग धर्म के रास्ते से भटक जाएंगे। ऐसा कहा गया है कि ये प्रलय का भी समय होगा और तब सभी पापियों का नाश हो जाएगा।

Kalki Avtar: किस ब्राह्मण के घर होगा कल्कि अवतार और क्या तिथि?

कलियुग में भगवान विष्णु के जिस कल्कि अवतार की बात यहां हो रही है, उसका जिक्र पुराणों में भी मिलता है। श्रीमद्भागवत-महापुराण में भगवान के कल्कि अवतार का वर्णन एक श्लोक में किया गया है साथ ही उनकी कथा भी विस्तार से कही गई है।

शंभलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः।भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति।।

इस श्लोक में कहा गया है कि भगवान विष्णु का कल्कि अवतार संभल नाम की जगह पर विष्णुयशा नाम के एक ब्राह्मण के घर होने वाला है। 

ऐसी मान्यता है कि कल्कि अवतार में भगवान विष्णु देवदत्त घोड़े पर सवार होकर सभी पापियों का नाश करेंगे। कल्कि अवतार की जो तिथि बताई गई है, उसके अनुसार वे सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को इस धरती पर जन्म लेंगे। 

Kalki Avtar: संभल कहा है, जहां होगा भगवान विष्णु का अवतार

इसे लेकर विद्वानों में मतभेद है। उत्तर प्रदेश में संभल नाम का जगह है जो अब जिला भी है। वहीं, उड़ीसा में भी संभलपुर नाम की जगह है। इन दोनों जगहों को लेकर कल्कि अवतार की अटकलें लगाई जाती रही हैं। संभलपुर में मां संभलेश्वरी देवी का मंदिर भी स्थित है जो काफी प्रख्यात है।

हालांकि, कई विद्वान मानते हैं कि पुराणों में संभल को लेकर जो निशानियां कही गई हैं, वह उत्तर प्रदेश का संभल है। मसलन, 68 तीर्थ, 19 कूप, मध्य में शिवलिंग, कदंब का पेड़, दक्षिण में गंगा का बहना आदि। बता दें कि संभल में एक प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर मौजूद है, ये निशानियां उसी रूप में देखी जा रही हैं। 

संभल के इस मंदिर में भगवान कल्कि की मूर्ति को छूना सभी भक्तों के लिए मना है। पुजारी के अलावा अन्य सभी भगवान कल्कि की मूर्ति का दर्शन दूर से कर सकते हैं। इसी मंदिर परिसर में भगवान शिव का भी एक अनोखा मंदिर है जिसमें उनकी मूछों वाली प्रतिमा है। यूपी के संभल के अलावा राजस्थान के वांगड़ अंचल में भी साबला नाम का एक गांव है जहां वर्षों से कल्कि अवतार की पूजा होती रही है।

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