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केरलम विधानसभा चुनावः वृद्ध आबादी 16.5 प्रतिशत?, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा सबसे बड़े चुनावी मुद्दे?, देखिए किस दल ने क्या दिया तोहफा?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 4, 2026 11:30 IST

Keralam Assembly Elections: हजारों महिलाओं के लिए यह चुनाव केवल राजनीति नहीं, बल्कि जीवन, सम्मान और बुजुर्गावस्था में देखभाल की गारंटी का सवाल है।

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ठळक मुद्देKeralam Assembly Elections: सीधा सवाल किया, “मुझे मेरी अगली पेंशन कब मिलेगी?”Keralam Assembly Elections: प्रमुख गठबंधन इस वर्ग को ध्यान में रखकर वादे कर रहे हैं।Keralam Assembly Elections: सामाजिक सुरक्षा पेंशन नियमित की जाए और बढ़ाई जाए।

तिरुवनंतपुरम: तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच नौ अप्रैल को होने वाले केरलम विधानसभा चुनाव में वरिष्ठ नागरिक एक निर्णायक मतदाता समूह बनकर उभरे हैं, जिनके लिए पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा सबसे बड़े चुनावी मुद्दे हैं। राज्य की वृद्ध आबादी 16.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो देश में सबसे अधिक है, और वरिष्ठ नागरिक एक प्रभावशाली मतदाता वर्ग बन गए हैं।

 

Keralam Assembly Elections: जीवन, सम्मान और बुजुर्गावस्था में देखभाल की गारंटी का सवाल

विथुरा निवासी 81 वर्षीय कृष्णाम्मा के लिए चुनाव का सार एक सीधे सवाल में सिमट गया है। पहाड़ी इलाके में स्थित उनके साधारण, टाइल की छत वाले घर पर जब पार्टी कार्यकर्ता वोट मांगने पहुंचे तो उन्होंने सीधा सवाल किया, “मुझे मेरी अगली पेंशन कब मिलेगी?” उन जैसी हजारों महिलाओं के लिए यह चुनाव केवल राजनीति नहीं, बल्कि जीवन, सम्मान और बुजुर्गावस्था में देखभाल की गारंटी का सवाल है।

वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) जैसे प्रमुख गठबंधन इस वर्ग को ध्यान में रखकर वादे कर रहे हैं। 70 वर्षीय सेवानिवृत्त श्रमिक सुरेश ने कहा, “मैं पूरी तरह मासिक पेंशन पर निर्भर हूं। जो भी सरकार बने, उससे मेरी अपील है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन नियमित की जाए और बढ़ाई जाए।”

Keralam Assembly Elections: बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष योजना की जरूरत

आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के साथ-साथ सामाजिक अलगाव भी बुजुर्गों के बीच एक गंभीर समस्या बनकर उभर रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके बच्चे विदेश में काम करते हैं। पंडालम की सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी सुशीला ने कहा कि ऐसे बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष योजना की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “हम दोनों अकेले रहते हैं क्योंकि हमारे बच्चे विदेश में हैं। अगर रात में कोई स्वास्थ्य आपात स्थिति आ जाए तो क्या होगा, यह बड़ी चिंता है।” केरल परिवहन निगम के पेंशनभोगी मोहनन नायर जहां वरिष्ठ नागरिकों के लिए रोजाना समय बिताने के लिए समर्पित स्थान की मांग कर रहे हैं।

Keralam Assembly Elections: यूडीएफ ने सरकार पर पेंशन के अनियमित भुगतान का आरोप

वहीं सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक सतीश चंद्रन का मानना है कि बुजुर्गों के सामाजिक अलगाव को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। सत्तारूढ़ एलडीएफ ने हाल के वर्षों में सामाजिक कल्याण पेंशन के विस्तार का हवाला देते हुए इसे और बढ़ाने का वादा किया है। वहीं यूडीएफ ने सरकार पर पेंशन के अनियमित भुगतान का आरोप लगाते हुए समयबद्ध वितरण और राशि में वृद्धि का वादा किया है।

राजग ने अधिक संगठित सामाजिक सुरक्षा ढांचा विकसित करने और केंद्रीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का आश्वासन दिया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा के पूर्व सदस्य टी एन सीमा ने कहा कि पिनराई विजयन नीत सरकार की उपलब्धियों में ‘वयोजन नयम’ और वरिष्ठ नागरिक आयोग की स्थापना शामिल है।

Keralam Assembly Elections: 2,000 रुपये की मासिक पेंशन के इंतजार तक सीमित

केरल इस वर्ष जनवरी में राज्य बजट के साथ ‘बुजुर्ग बजट’ पेश करने वाला पहला राज्य बना। हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पालोड रवि ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में बुजुर्ग समाज का एक उपेक्षित वर्ग बने रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक अनुभव और प्रतिभा का बड़ा भंडार हैं, लेकिन दूरदर्शी पहल के अभाव में वे सिर्फ 2,000 रुपये की मासिक पेंशन के इंतजार तक सीमित रह गए हैं।

भाजपा के महासचिव एस सुरेश ने भी वाम सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि कई केंद्रीय योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “केरल उन गिने-चुने राज्यों में है जहां ‘वय वंदना योजना’ लागू नहीं की गई, जो 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को पांच लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा की गारंटी देती है।”

 

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