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लोकसभा चुनाव 2019: सीट शेयरिंग को लेकर गहराया BJP का संकट, लोक जनशक्ति पार्टी ने की 7 सीटों की मांग

By एस पी सिन्हा | Updated: October 23, 2018 19:37 IST

लोसपा के राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद ने भाजपा से कनफ्यूजन खत्म करने की मांग करते हुए पारदर्शी तरीके से जल्दी ही इस मसले पर बात करने की सलाह दी।

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बिहार में राजग (एनडीए) के भीतर लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सीट शेयरिंग के फॉर्मूले ने एकबार फिर से तूल पकड़ लिया है। सीटों के बंटवारे को लेकर जारी कवायद के बीच एनडीए के घटक लोजपा ने सात सीटों की मांग कर दी है। आज पटना में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बिहार सरकार में पशुपालन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने कहा कि हम सात सीट से कम पर बिहार में किसी भी कीमत पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। 

उन्होंने कहा है कि हम पहले भी सात सीटों पर चुनाव लडे़ थे और इस बार भी सात सीटों की मांग करेंगे। पार्टी का कद और इसकी लोकप्रियता पहले से बढ़ा है, इसलिए लोजपा को झारखंड और यूपी में भी सीट चाहिए। हालांकि, सीटों को लेकर हुई बातचीत के सवाल पर पारस ने कहा कि अभी सीटों के बंटवारे पर कोई बातचीत नहीं हुई है।

दूसरी ओर रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि सीटों को लेकर एनडीए के घटक दलों की कोई बैठक नहीं हुई है और जब बैठक ही नहीं हुई तो फिर सीटों का बंटवारा कैसे होगा? सीटों को लेकर जो भी दावे हो रहे हैं वो गलत हैं। हमें दो सीट मिले या चार सीट मिले हम एनडीए में ही रहेंगे। वहीं, नीतीश कुमार के करीबी और जदयू के महासचिव संजय झा ने पार्टी की पुरानी लाइन दोहराते हुए कहा कि उनकी पार्टी को रालोसपा और लोजपा के साथ समझौता नहीं करना है बल्कि भाजपा ये काम करेगी।

उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों को सीटें देने के बाद जो सीटें बचेंगी वो अगर सम संख्या में है तो भाजपा और जदयू के बीच बराबर की संख्या में बंटेगी। अगर ये विषम संख्या है तो अतिरिक्त सीट बीजेपी के खाते में जाएगी। संजय झा ने संकेत दिया कि अगर लोजपा को पांच और रालोसपा को दो सीटें मिलती है तो बची 33 सीटों में 17 पर भाजपा और 16 पर जदयू उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि रालोसपा अगर गठबंधन से हटने का फैसला करती है तो उसके खाते की दो सीटें दोनों दलों में बंट जाएगी। संजय झा ने कहा कि दिवाली से पहले सीट शेयरिंग की सार्वजनिक घोषणा हो जाएगी।

वहीं, रालोसपा के राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद ने भाजपा से कनफ्यूजन खत्म करने की मांग करते हुए पारदर्शी तरीके से जल्दी ही इस मसले पर बात करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी फॉर्मूले के तहत रालोसपा को दो सीटें स्वीकार्य नहीं है। माधव आनंद ने कहा, "2014 में हमने तीनों सीटों पर जीत हासिल की और आज चार साल बाद पार्टी कहीं मजबूत स्थिति में है। हम कैसे दो सीटें स्वीकार कर पार्टी हितों से समझौता करें? पर दो या चार या पांच कोई बात हो तभी न। अभी तो सारी चीजें हवा में चल रही हैं।"

जबकि सीटों के बंटवारे पर भाजपा नेता सह सूबे के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि अभी तक सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है। सीटों के बंटवारे के लिए सभी घटक दलों के बीच बातचीत जारी है। उल्लेखनीय है कि आगामी लोकसभा चुनावों के लिए बिहार में सीटों का बंटवारा हो जाने की चर्चा जोरों पर है। लेकिन, कोई भी घटक दल इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। वैसे 16 सितंबर को पटना में जदयू की कार्यकारिणी की बैठक में ही नीतीश कुमार ने कह दिया था कि भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे पर सम्मानजनक समझौता हुआ है, लेकिन उन्होंने इसका खुलासा करने से इनकार कर दिया था।

टॅग्स :नितीश कुमारभरत अरुण
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