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कर्नाटक कांग्रेस में घमासान, सिद्धरमैया बोले-विधायक दल एवं विपक्ष नेता का पद एक साथ होना चाहिए, अलग-अलग नहीं

By भाषा | Updated: January 18, 2020 20:22 IST

सिद्धरमैया का यह बयान उन खबरों के बीच आया है जिसमें कहा गया है कि कांग्रेस आलाकमान इस बात पर विचार कर रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस विधायक दल के नेता के पद पर किसी अन्य नेता की नियुक्ति हो जबकि विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद पर सिद्धरमैया बने रहें।

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ठळक मुद्देकांग्रेस विधायक दल के नेता एवं विपक्ष के नेता का पद पिछले महीने तक सिद्धरमैया के पास था। नौ दिसंबर को उन्होंने कांग्रेस विधायक दल के नेता पद से त्यागपत्र दे दिया था।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया ने शनिवार को कहा कि उनकी राय में कांग्रेस विधायक दल के नेता एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद एक ही व्यक्ति के पास होना चाहिए।

सिद्धरमैया का यह बयान उन खबरों के बीच आया है जिसमें कहा गया है कि कांग्रेस आलाकमान इस बात पर विचार कर रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस विधायक दल के नेता के पद पर किसी अन्य नेता की नियुक्ति हो जबकि विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद पर सिद्धरमैया बने रहें।

कांग्रेस विधायक दल के नेता एवं विपक्ष के नेता का पद पिछले महीने तक सिद्धरमैया के पास था। विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के खराब पदर्शन को देखते हुए नौ दिसंबर को उन्होंने कांग्रेस विधायक दल के नेता पद से त्यागपत्र दे दिया था। हालांकि, उनका इस्तीफा अब तक स्वीकार नहीं किया गया है।

संवाददाताओं के सवाल का जवाब देते हुए सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘मेरी राय में कांग्रेस विधायक दल के नेता का पद और विपक्ष के नेता का पद एक ही व्यक्ति के पास होना चाहिए...कर्नाटक में क्या दोनों पद कभी अलग अलग लोगों के पास रहे हैं?’’

जब उन्हें यह बताया गया कि कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई में दोनों पद अलग अलग लोगों के पास था, उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में राजनीतिक स्थिति अलग हो सकती है, यहां स्थिति अलग है, आप महाराष्ट्र के साथ तुलना क्यों करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरी राय में दोनों पद एक साथ होना चाहिए। अलग-अलग नहीं। इसमें टूट नहीं होना चाहिए।’’

सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘जब मुख्यमंत्री अपने पास 18 विभाग रख सकते हैं, तब मीडिया कैबिनेट विस्तार में देरी के बारे में सवाल नहीं करती है लेकिन हमसे पार्टी के खाली पड़े पद को भरने के बारे में सवाल पूछा जा रहा है ।’’ सूत्रों के अनुसार सिद्धरमैया दोनों पदों को अलग अलग किये जाने को लेकर चौकन्ना हैं।

पार्टी में इससे उनकी ताकत कम होगी और इसलिए उनके विश्वस्त यह चाहते हैं कि उनके नेता के पास ही दोनों पद होना चाहिए। हालांकि, नियुक्तियों के बारे में पूछे जाने पर सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘चूंकि, मैंने पद से इस्तीफा दे दिया है। मैंने इस पर कोई बात नहीं की है....उन्होंने (आलाकमान) अब तक इसे स्वीकार नहीं किया है । मुझे नहीं पता कि वह क्या करेंगे।’’ 

टॅग्स :कांग्रेससिद्धारमैयाकर्नाटकसोनिया गाँधीभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
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