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बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की नई मुसीबत, राज्यसभा निर्वाचन को कोर्ट में दी गई चुनौती

By भाषा | Updated: August 1, 2020 05:43 IST

गोविंद सिंह ने मीडिया को बताया कि सिंधिया द्वारा तथ्यों को छुपाकर शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया, इसलिए उनका निर्वाचन रद्द होना चाहिए। 

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ठळक मुद्देइसी साल मार्च महीने में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थेसिंधिया समर्थक विधायकों के इस्तीफ के चलते मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई थी

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्वाचन को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में शुक्रवार को एक याचिका दायर की गई है। भिण्ड जिले के लहार विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एवं प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने यह याचिका दायर की है।

गोविंद सिंह के वकील संजय अग्रवाल एवं अनुज अग्रवाल ने बताया कि इस याचिका में कहा गया है कि सिंधिया ने राज्यसभा के लिए दाखिल अपने नामांकन के दौरान शपथ पत्र में गलत जानकारियां दी एवं तथ्यों को छिपाया। सिंधिया ने अपने ऊपर भोपाल में पूर्व से दर्ज अपराधिक प्रकरण की जानकारी शपथ पत्र में नहीं दी, जो कि पूर्णता विधि विरुद्ध एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के विपरीत है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीतिक सफर

जनवरी 1971 को सिंधिया राजघराने में पैदा हुए ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक रहे हैं। अपनी स्‍कूली शिक्षा मुंबई से प्राप्‍त करने के बाद ज्‍योतिरादित्‍य अमेरिका चले गए। वहां की स्‍टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट में डिग्री लेने के बाद वे भारत लौटे। 2002 में पहली बार उन्होंने चुनाव लड़ा। लोकसभा चुनाव में उन्‍हें पहली बार गुना से सांसद चुना गया। 2004 में 14वीं लोकसभा में उन्‍हें दोबारा चुना गया। 6 अप्रैल 2008 को उन्‍हें संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के राज्‍यमंत्री का पद प्राप्‍त हुआ।

2009 लोकसभा में भी वह विजयी रहे और उन्‍हें वाणिज्‍य एवं उद्योग राज्‍यमंत्री का पद प्राप्‍त हुआ। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सत्ता गंवा दी, लेकिन ज्योतिरादित्य अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे थे। लेकिन 2019 की मोदी लहर में वे अपनी परंपरागत सीट नहीं बचा पाए और किसी समय अपने सहयोगी रहे केपी यादव से ही चुनाव हार गए।

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