Chaitra Navratri 2022: चैत्र नवरात्रि में नौ दिन होती है मां के 9 रूपों की पूजा, जानिए किस स्वरूप की कब होगी पूजा और जानें महत्व

By हर्ष वर्धन मिश्रा | Published: March 29, 2022 09:39 AM2022-03-29T09:39:09+5:302022-03-29T09:43:37+5:30

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इस साल चैत्र नवरात्रि 02 अप्रैल से शुरू होने वाले हैं और इसकी समाप्ति 11 अप्रैल को होगी। नवरात्रि  में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना के साथ ही व्रत भी किए जाते हैं. यूं तो साल भर में चार नवरात्रि आती हैं लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि का पहला दिन घटस्थापना से शुरू होता है। तो आइये आपको बताते हैं के किस दिन मां के किस स्वरुप की पूजा होगी।

पहला दिन- शैलपुत्री (02अप्रैल ): नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा पर घरों में घटस्थापना की जाती है. प्रतिपदा पर मां शैलपुत्री के स्वरूप का पूजन होता है। शैलपुत्री को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रथम माना गया है। मान्यता है कि नवरात्र में पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति को चंद्र दोष से मुक्ति मिल जाती है।

दूसरा दिन- ब्रह्मचारिणी (03 अप्रैल ): चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन यानि द्वितीया तिथि पर देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी का पूजन होता है। ब्रह्म का अर्थ तप है और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली। तप का आचरण करने वाली देवी के रूप में भगवती दुर्गा के द्वितीय स्वरूप का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।

तीसरा दिन- चंद्रघंटा (04 अप्रैल ): चैत्र नवरात्र की तृतीया तिथि पर देवी चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा होती है। माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। देवी के चंद्रघंटा स्वरूप का ध्यान करने से भक्त का इहलोक और परलोक दोनों सुधर जाता है।

चौथा दिन- कूष्मांडा (05 अप्रैल): नवरात्र की इस तिथि पर देवी के कूष्मांडा स्वरूप का दर्शन-पूजन करने का विधान है। चैत्र नवरात्र की चतुर्थी तिथि पर देवी के कुष्मांडा स्वरूप का दर्शन-पूजन करने से मनुष्य के समस्त  पापों का क्षय हो जाता है।

पांचवा दिन- स्कंदमाता (06 अप्रैल ): नवरात्र का पांचवा दिन पंचमी तिथि कहलाती है। इस तिथि पर देवी दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप का दर्शन पूजन होता है। स्कंद कार्तिकेय की माता होने के कारण ही देवी के इस स्वरूप को स्कंदमाता नाम मिला है। देवी के इस स्वरूप की आराधना से जहां व्यक्ति की संपूर्ण सद्कामनाएं पूर्ण होती हैं वहीं उसके मोक्ष का मार्ग भी सुगम्य हो जाता है। 

छठवां दिन- षष्ठी कात्यायनी (07 अप्रैल): नवरात्र का छठा दिन षष्ठी तिथि कहलाता है। इस दिन देवी के कात्यायनी स्वरूप की पूजा होती है। देवी दुर्गा के छठे स्वरूप का दर्शन साधकों को सद्गति प्रदान करने वाला कहा गया है। पौराणिक कथा के अनुसार कात्यायनी माता ने ही महिषासुर और शुंभ-निशुंभ जैसे आतातायी राक्षसों का वध किया था। देवी कात्यायानी की पूजा शत्रु संहार की शक्ति प्राप्त होती है, साथ ही मां संतान प्राप्ति का भी वरदान प्रदान करती हैं।

सातवां दिन- कालरात्रि (08 अप्रैल): देवी दुर्गा की आराधना क्रम में नवरात्र की सप्तमी तिथि पर देवी के कालरात्रि सवरूप का पूजन किया जाता है। माता कालरात्रि के इस भंयकर स्वरूप को देखकर असुर और नकारात्मक शक्तियां भयभीत होती हैं। लेकिन माता कालरात्रि भक्तों पर परम अनुकंपा दर्शाने वाली हैं। भक्तों के लिए सुलभ और ममतामयी होने की वजह से माता को शुभंकरी भी कहा गया है।

आठवां दिन- महागौरी (09 अप्रैल): इस तिथि पर देवी के महागौरी स्वरूप का पूजन होगा। चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि पर देवी दुर्गा के महागौरी का संबंध देवी गंगा से भी है। धर्म ग्रंथों में देवी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि इस स्वरूप के दर्शन मात्र से पूर्व संचित समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। देवी की साधना करने वालों को समस्त लौकिक एवं अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

नौवां दिन- सिद्धिदात्री (10 अप्रैल): नवरात्र का नौवां दिन नवमी तिथि कहलाती है। इस तिथि पर देवी के सिद्धिदात्री स्वरूप का दर्शन-पूजन होगा. देवी का यह स्वरूप समस्त प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाला है। इसी आधार पर देवी का नामकरण हुआ और उन्हें सिद्धिदात्रि कहा गया।