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पटेल ने कहा, एएफसी एशियाई कप की मेजबानी के लिये भारत के दावे को कड़ी चुनौती

By भाषा | Updated: December 16, 2020 19:34 IST

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नयी दिल्ली, 16 दिसंबर अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने बुधवार को स्वीकार किया कि 2027 में होने वाले एएफसी (एशियाई फुटबॉल परिसंघ) एशियाई कप के लिये देश के दावे को अन्य दावेदारों से कड़ी चुनौती मिलेगी लेकिन उन्होंने इसे महाद्वीप में उसकी बेहतर स्थिति का स्वाभाविक परिणाम करार दिया।

खेल मंत्री कीरेन रीजीजू के साथ 2027 में होने वाले महाद्वीपीय टूर्नामेंट की मेजबानी की दावा पुस्तिका का विमोचन करते हुए पटेल ने कहा कि एआईएफएफ को टूर्नामेंट के मेजबानी अधिकार हासिल करने की उम्मीद है जिसमें 24 टीमें भाग लेंगी।

पटेल ने कहा, ‘‘प्रतिस्पर्धा कड़ी होगी लेकिन जब तक आप प्रयास नहीं करोगे आपको कुछ नहीं मिलेगा। किसी अन्य दावेदार देश की तरह हम भी टूर्नामेंट की मेजबानी हासिल करने के प्रति आश्वस्त हैं। इसके लिये राजनयिक समर्थन भी मिलेगा। यह देश का दावा है और एआईएफएफ केवल प्रतिनिधि है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत फुटबॉल के विश्व परिदृश्य में आ चुका है। हमने फीफा अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी की और 2022 में महिला अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी करने जा रहे हैं। इसके बाद हम 2022 में एएफसी महिला एशियाई कप का आयोजन करेंगे। ’’

पटेल ने कहा, ‘‘इसके अलावा पुरुष और महिला दोनों वर्ग में फीफा अंडर-20 विश्व कप की मेजबानी का दावा करने पर भी विचार चल रहा है। इसलिए इन सभी शीर्ष स्तरीय टूर्नामेंटों का यह स्वाभाविक परिणाम है कि हम 2020 में एएफसी एशियाई कप के लिए दावा पेश करेंगे।’’

एशियाई फुटबॉल के शीर्ष देश सऊदी अरब और ईरान तथा 2022 फीफा विश्व कप के मेजबान कतर भी 2027 एएफसी एशियाई कप की मेजबानी का दावा कर रहे हैं। सऊदी अरब और कतर ने सोमवार को एएफसी को अपनी दावा पुस्तिका सौंप दी है।

भारत गुरुवार या शुक्रवार तक अपनी दावा पुस्तिका सौंप देगा। उज्बेकिस्तान इस दौड़ से बाहर हो गया है।

रीजीजू ने कहा कि सरकार मेजबानी अधिकार हासिल करने के लिये एआईएफएफ को सभी संभावित सहयोग करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय फुटबॉल को अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल करने की जरूरत है और हमें बड़ी प्रतियोगिताओं का आयोजन करना होगा। यह बेहद प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट है और सरकार की तरफ से हम पूरा सहयोग करेंगे। ’’

पटेल से पूछा गया कि वह मेजबानी हासिल करने के लिये कितने आश्वस्त हैं, उन्होंने कहा, ‘‘हम अभी 2020 में है और हम 2027 पर ध्यान दे रहे हैं और अगर हम 2027 तक भारतीय फुटबॉल को आगे नहीं ले जा सकते हैं, तो मुझे लगता है कि हम अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए भारत को (2027 तक) सऊदी अरब या कतर की तुलना में फुटबॉल में कमजोर क्यों होना चाहिए। ’’

इस अवसर पर भारतीय पुरुष टीम के पूर्व डिफेंडर गौरमांगी सिंह और राष्ट्रीय महिला टीम की कप्तान आशालता देवी भी उपस्थित थी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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