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कोलकाता में घातक प्लांट फंगस से संक्रमित हुआ दुनिया का पहला इंसान, जानें कितनी खतरनाक है ये बीमारी

By अनिल शर्मा | Updated: April 1, 2023 12:56 IST

डॉक्टरों ने बताया कि 61 वर्षीय पीड़ित शख्स अपनी रिसर्च के दौरान लंबे समय तक सड़ने वाले पदार्थों, मशरूम और कई अलग-अलग तरह के प्लांट फंगी के साथ काम कर रहा था।

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ठळक मुद्देशख्स कोलकाता मे कंसल्टेंट अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के आउट पेशेंट विभाग में आया था। स्कैन में उसकी गर्दन में फोड़ा दिखा और पस की जांच में प्लांट फंगस कॉन्ड्रोस्टेरियम परप्यूरियम होने का पता चला। 

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक 61-वर्षीय शख्स घातक प्लांट फंगस रोग से संक्रमित होने वाला दुनिया का पहला व्यक्ति बन गया है। पेशे से प्लांट माइकोलॉजिस्ट रहे इस शख्स को कई दिनों से आवाज में भारीपन, खांसी, थकान और निगलने में कठिनाई की समस्या हो रही थी।

डॉक्टरों ने कहा, शख्स कोलकाता मे कंसल्टेंट अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के आउट पेशेंट विभाग में आया था। डॉक्टरों की मानें तो शख्स को पहले न तो डायबिटीजी, एचआई संग्रमण या गुर्दे की बीमारी थी या किसी दवाई का साइड इफेक्ट हुआ था।  स्कैन में उसकी गर्दन में फोड़ा दिखा और पस की जांच में प्लांट फंगस कॉन्ड्रोस्टेरियम परप्यूरियम (Chondrostereum purpureum) होने का पता चला। 

डॉक्टरों ने बताया कि 61 वर्षीय पीड़ित शख्स अपनी रिसर्च के दौरान लंबे समय तक सड़ने वाले पदार्थों, मशरूम और कई अलग-अलग तरह के प्लांट फंगी के साथ काम कर रहा था। डॉक्टरों ने कहा कि कई जांच के बाद सैंपल को फंगस की जांच और रिसर्च के लिए WHO के सहयोगी केंद्र भेजा गया था जहां इसकी पहचान Chondrostereum purpureum के रूप में हुई।

Chondrostereum purpureum एक तरह का प्लांट फंगस है जिससे सिल्वर लीफ बीमारी होती है। यह बीमारी अधिकतर गुलाब के पौधों को अपनी चपेट में लेती है। इससे पेड़ या पौधे पर, उसकी शाखाओं पर सफेद चमकदार पत्ते निकल आते हैं। वहीं यह ऐसे इंसानों के चपेट में लेता है जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है और उनके लिए खतरनाक होता है।

डॉक्टरों ने बताया कि पीड़ित व्यक्ति के गर्दन में फोड़े का पता चला। उसका ऑपरेशन किया गया जिसके बाद एक्स-रे में कुछ भी असामान्य नहीं निकला और फिर रोगी को एंटीफंगल दवा का कोर्स दिया गया। दो साल के फॉलो-अप के बाद रोगी बिल्कुल ठीक हो गया और उसके फिर से संक्रमित होने का कोई सबूत नहीं है।

टॅग्स :कोलकाताWHO
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