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Women's Reservation Bill: "इस बिल की शुरुआत तो सोनिया गांधी ने की थी", कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: September 19, 2023 11:06 IST

अधीर रंजन चौधरी ने महिला आरक्षण विधेयक पर कहा कि इस विधेयक की मांग तो यूपीए के जमाने से हो रही है और इसकी शुरूआत सोनिया गांधी ने की थी।

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ठळक मुद्देअधीर रंजन चौधरी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक की मांग तो यूपीए के जमाने से हो रही हैइसकी मांग सोनिया गांधी ने शुरू की थी लेकिन बावजूद इसके इसमें इतना समय लग गया कांग्रेस चाहती है कि मोदी सरकार संसद में महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराए

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने संसद के विशेष सत्र के दौरान मोदी कैबिनेट द्वारा महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी मिलने पर कहा कि महिला आरक्षण विधेयक की मांग तो संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के जमाने से हो रही है और इसकी शुरूआत तो सोनिया गांधी ने की थी।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “हम चाहते हैं कि सरकार संसद में महिला आरक्षण विधेयक जल्द से जल्द पेश करे और उसे ध्वनिमत से पारित किया जाए। महिला आरक्षण विधेयक की मांग को यूपीए के समय से हो रही है और हमारी नेता सोनिया गांधी ने ही इसकी शुरू की थी बावजूद इसके इसमें इतना समय लग गया लेकिन अब अगर इसे पेश किया दा रहा है तो हमें इसकी खुशी है।''

महिला आरक्षण विधेयक के संबंध में सूत्रों ने सोमवार को बताया कि केंद्रीय कैबिनेट की बैठक देर शाम पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी में हुई। वैठक में मोदी मंत्रिमंडल ने महिला आरक्षण विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है।

कांग्रेस की राज्यसङा से महिला सांसद रंजीत रंजन ने  महिला आरक्षण विधेयक पर कहा है कि यह बीजेपी का चुनावी स्टंट है क्योंकि चुनाव के ठीक पहले उसे महिला आरक्षण बिल की याद आई है।

सांसद रंजीत रंजन ने कहा, “देखिए, यह कांग्रेस का बिल है। हमने इसे 9 मार्च 2010 को पेश किया था। बीजेपी 9 साल से ज्यादा समय से सत्ता में है, आपको चुनाव से ठीक पहले महिला आरक्षण बिल की याद क्यों आई? अगर यह बिल आज पटल पर आता है तो हम इसका स्वागत करेंगे क्योंकि हर कोई इस बात से सहमत है कि सदन और विधान सभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए।”

मालूम हो कि महिला आरक्षण विधेयक के तहत महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। लैंगिक समानता और समावेशी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होने के बावजूद यह विधेयक बहुत लंबे समय से विधायी अधर में लटका हुआ था।

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