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"जो 'बंच ऑफ थॉट्स' में गोलवलकर ने लिखा है, मोहन भागवत वही कर रहे हैं", लालू यादव ने आरक्षण विवाद पर कहा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: September 8, 2023 08:32 IST

लालू यादव ने संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा "आरक्षण" का समर्थन किए जाने के पर कहा कि मोदी और भागवत वही कर रहे हैं, जो गोलवलकर ने 'बंच ऑफ थॉट्स' में लिखा था।

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ठळक मुद्देलालू यादव ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को "आरक्षण" के मुद्द पर घेरा उन्होंने कहा कि मोदी और भागवत वही कर रहे हैं, जो गोलवलकर ने 'बंच ऑफ थॉट्स' में लिखा हैवे आरक्षण विरोधी लोग हैं, 'बंच ऑफ थॉट्स' में खुले तौर पर आरक्षण के खिलाफ बोला गया है

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा "आरक्षण" का समर्थन किए जाने के मसले पर बीते गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख वही कर रहे हैं, जो गोलवलकर ने 'बंच ऑफ थॉट्स' में लिखा था।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार लालू प्रसाद यादव ने पटना में पत्रकारों से बात करते हुए संघ प्रमुख भागवत के आरक्षण के संबंध में दिये बयान पर कहा, "वे आरक्षण का विरोध करने वाले लोग हैं। गोलवलकर ने 'बंच ऑफ थॉट्स' में जो लिखा है, मोदी और मोहन भागवत वही काम कर रहे हैं। 'बंच ऑफ थॉट्स' में खुले तौर पर आरक्षण के खिलाफ बोला गया है और मोहन भागवत ने भी यही कहा है।"

माधवराव सदाशिवराव गोलवलक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे प्रमुख थे और उनके अनुयायी उन्हें संघ के प्रमुख विचारकों में से एक मानते हैं। जिनके भाषणों का संकलन 'बंच ऑफ थॉट्स' में है।

दरअसल आरक्षण का प्रसंग सियासी गलियारों में बीते बुधवार को उस समय एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया, जब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस संविधान में दिए गए आरक्षण को पूरा समर्थन देता है। मोहन भागवत का यह बयान महाराष्ट्र में चल रहे मराठा आरक्षण के विवाद के बीच आया है।

वहीं मौजूदा समय में चल रहे 'इंडिया बनाम भारत विवाद' और 'अखंड भारत' के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि 'इंडिया' का भारत होना ही वास्तव में अपनी संस्कृति को स्वीकार करना है।

उन्होंने कहा, "जो लोग भारत से अलग हो गए, उन्हें लगता है कि उन्होंने गलती की है। इंडिया का भारत होना होना यानी भारत के स्वभाव को स्वीकार करना है।"

मालूम हो कि 'इंडिया बनाम भारत' के नाम पर विवाद तब शुरू हुआ, जब राष्ट्रपति द्वारा जी20 के राष्ट्राध्यक्षों को दिये गये रात्रिभोज का निमंत्रण पत्र पर इंडिया की बजाय 'भारत' के राष्ट्रपति के नाम लिखा हुआ था।

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