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कश्मीर से आतंकवादी संगठन अंसार गजवात-उल हिंद साफ, अलकायदा को हमने तबाह कर दियाः डीजीपी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 23, 2019 18:37 IST

स्थानीय पुलिस से गुप्त सूचना मिलने के बाद दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिले के त्राल इलाके में तीनों आतंकवादियों के मारे जाने के एक दिन बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह (डीजीपी) ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

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ठळक मुद्देमंगलवार को मुठभेड़ में लोन के अलावा नवीद अहमद टाक और जुनैद राशिद भट भी मारे गए। सिंह ने कहा, ‘‘पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मारे गए सभी आतंकवादी जाकिर मूसा के संगठन का हिस्सा थे।

जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बुधवार को कहा कि आतंकवादी संगठन अंसार गजवात-उल हिंद (एजीएच) के सरगना हमीद लोन और दो अन्य आतंकवादियों के घाटी में मारे जाने के बाद अलकायदा के इस सहयोगी संगठन का कश्मीर से सफाया हो गया है।

कश्मीर में एजीएच के संस्थापक जाकिर मूसा के बाद लोन उर्फ हामिद लल्हारी ने कमान संभाली थी। मूसा ने अलकायदा के प्रति निष्ठा जतायी थी जो इस साल मई में एक मुठभेड़ में वह मारा गया था। स्थानीय पुलिस से गुप्त सूचना मिलने के बाद दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिले के त्राल इलाके में तीनों आतंकवादियों के मारे जाने के एक दिन बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह (डीजीपी) ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

मंगलवार को मुठभेड़ में लोन के अलावा नवीद अहमद टाक और जुनैद राशिद भट भी मारे गए। सिंह ने कहा, ‘‘पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मारे गए सभी आतंकवादी जाकिर मूसा के संगठन का हिस्सा थे और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले तथा आम नागरिकों पर अत्याचार के कई मामलों समेत आतंकवाद से जुड़ी अपराध की अनेक घटनाओं में संलिप्तता को लेकर वांछित थे।’’ पुलिस प्रमुख ने कहा कि आतंकवाद रोधी अभियान ने एजीएच को करारा झटका दिया है।

सिंह ने कहा कि आतंकी समूह पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के साथ भी करीब से मिलकर काम कर रहा था। उन्होंने कहा, ‘‘एजीएच का सफाया हो गया है, लेकिन कुछ तत्व हैं जो अब भी यहां सक्रिय हैं। वे अचानक सामने आते हैं और आतंकवादियों के साथ जा मिलते हैं... लेकिन फिलहाल कश्मीर से एजीएच का सफाया हो गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जेईएम कश्मीर में प्रत्येक आतंकवादी संगठन के साथ मिलकर काम करने की कोशिश कर रहा है।

जेईएम और लश्कर-ए-तैयबा को पाकिस्तान से निर्देश मिलते हैं कि कौन उनका निशाना है, किस स्तर पर और किस किस्म की हिंसा उन्हें भड़कानी है।’’ यह पूछे जाने पर कि जेईएम के साथ एजीएच के संबंध का मतलब क्या यह है कि वह पाकिस्तान के हाथों नियंत्रित होता था, डीजीपी ने कहा कि इस संबंध से ऐसे ही ‘‘संकेत’’ मिलते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह कहना मुश्किल है, लेकिन मैं यही कहूंगा कि स्थानीय स्तर पर यह संबंध नजर आता है और पाकिस्तान के साथ संबंध के संकेत मिलते रहे हैं, जिसे अब तक पाकिस्तान द्वारा सीधे-सीधे चलाया जाता रहा है।’’ पुलिस प्रमुख ने कहा कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा हटाए जाने और इसे दो केंद्रशासित क्षेत्रों में विभाजित करने के केंद्र के पांच अगस्त के फैसले के बाद से काफी संख्या में आतंकवादियों ने घुसपैठ की है।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘पांच अगस्त के बाद आए आतंकवादियों की संख्या बता पाना मुश्किल है। लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि इनकी संख्या काफी है।’’ डीजीपी ने कहा, ‘‘उत्तर कश्मीर के साथ-साथ दक्षिण कश्मीर में कई जगहों पर उनकी मौजूदगी का पता चला है। इसे देखते हुए हम कह सकते हैं इनकी संख्या अधिक है। हालांकि यह इतनी अधिक नहीं है कि हमें इसे लेकर बहुत अधिक चिंतित हो जाना चाहिए।’’

सिंह ने कहा कि आतंकवाद में कमी पाकिस्तान को अखर रही थी, यही कारण है कि पड़ोसी देश घुसपैठ के प्रयास के जरिये आतंकवादियों को भेज रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ आतंकवादियों ने घुसपैठ की है लेकिन उनके अनेक प्रयास विफल रहे हैं।

राजौरी-पुंछ, हीरानगर-सांबा, करनाह-उरी, माछिल, केरन और गुरेज सेक्टरों में संघर्षविराम उल्लंघन जारी है तथा यह रोजाना का काम हो गया है।’’ पुलिस प्रमुख ने कहा कि जब भी पाकिस्तान संघर्षविराम का उल्लंघन करता है, उसका प्रयास अधिक से अधिक आतंकवादियों को भेजना होता है... (पाकिस्तान) सेना और आईएसआई आतंकवादियों को भेजने के लिए नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास (आतंकवादी) लॉन्च पैडों पर पूरी तरह सक्रिय हैं।’’

अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के केंद्र के फैसले के बाद कश्मीरी युवाओं को हिरासत में लिए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कई गलत सूचनाएं हैं और दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ ‘‘बेहद जिम्मेदार मीडिया घराने’’ बगैर पुष्टि या उनसे संपर्क किए बिना आंकड़े दर्शा रहे हैं। पकड़े गए अधिकतर युवाओं को काउंसलिंग के बाद छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया तो उनमें से चार को छोड़ दिया गया और सिर्फ एक को हिरासत में रखा गया।

हमें लोगों को बिना वजह अपनी हिरासत में रखने का शौक नहीं है। ये सभी गिरफ्तारियां कानून व्यवस्था बनाए रखने के इरादे से की गयी थीं।’’ सिंह के अनुसार किसी को न तो प्रताड़ित किया गया और न ही किसी युवा या किशोर या नाबालिग को गिरफ्तार अथवा हिरासत में रखा गया।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ मामलों में जहां उम्र को लेकर संशय था, वहां उम्र की जांच की गयी और पुष्टि के बाद हमने कानूनी कार्रवाई की। जब भी किसी किशोर को गिरफ्तार किया गया, हमने किशोर न्याय अधिनियम का सख्ती से पालन किया।’’

डीजीपी ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों के लिए तैयारियां की गयी हैं और वे शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होंगे। पुलिस प्रमुख ने कहा कि ऐसी आशंकाएं थीं कि केंद्र के पांच अगस्त के फैसले के बाद युवा आतंकवाद में शामिल होंगे, लेकिन यह बात निराधार साबित हुई है। 

टॅग्स :जम्मू कश्मीरधारा ३७०मोदी सरकारआर्टिकल 35A (अनुच्छेद 35A)
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