लाइव न्यूज़ :

महाराष्ट्र के 10 हजार गांवों में जल संकट भूगर्भ जलस्तर बेहद गिरा, जल आपातकाल

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: June 12, 2019 10:03 IST

सर्वे के मुताबिक 5640 गांवों में भूजल स्तर 1 से 2 मीटर तक नीचे गया है, जबकि 2556 गांवों में 2 से 3 मीटर नीचे तथा 2170 गांवों में 3 मीटर से अधिक नीचे चला गया है.

Open in App
ठळक मुद्देराज्य में सूखे का भीषण कहर झेल रहे मराठवाड़ा में 4681 गांवों में जलस्तर बेहद नीचे चला गया है.

भूजल सर्वेक्षण विभाग के सर्वे के मुताबिक अप्रैल माह में राज्य के 10 हजार 366 गांवों में भूगर्भ जलस्तर बेहद कम हो गया है. इनमें से 2100 गांव में बेहद खराब स्थिति है. मानसून की देरी के चलते रोजाना हालात बिगड़ रहे हैं. सर्वे के मुताबिक 5640 गांवों में भूजल स्तर 1 से 2 मीटर तक नीचे गया है, जबकि 2556 गांवों में 2 से 3 मीटर नीचे तथा 2170 गांवों में 3 मीटर से अधिक नीचे चला गया है.

राज्य में सूखे का भीषण कहर झेल रहे मराठवाड़ा में 4681 गांवों में जलस्तर बेहद नीचे चला गया है. इसमें से 1380 गांवों में यह 3 मीटर से भी अधिक नीचे चला गया है, जबकि 2071 गांव में यह 1 से 2 मीटर नीचे चला गया है. मौसम विभाग की मानें तो राज्य में सर्वत्र वर्षा होने में अब भी 10 से 12 दिन का समय है. तब तक जलस्तर और नीचे जा चुका होगा और जलसंकट आपातकाल जैसी स्थिति में चला जाएगा.

राजस्थान के 215 बांध सूखे, पेयजल संकट गहराया

राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण तकरीबन सभी शहर और गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है. राज्य में 236 ब्लॉकों में से 190 डॉर्कजोन में आ गए हैं, जहां हैंडपंप और कुएं कुछ समय बाद ही सूख जाते हैं. सरकार की जलापूर्ति व्यवस्था भी लड़खड़ा गई है. कई इलाकों में 10-10 दिन में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है.

दरअसल, प्रदेश में पेयजल के स्रोत कहे जाने वाले 284 में से 215 बांध सूख चुके हैं. शेष बचे बांधों में भी बहुत कम पानी बचा है. राजधानी जयपुर सहित अन्य जिलों की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में मात्र एक माह का पानी शेष बचा है. प्रदेश में 22 बड़े बांध हैं, लेकिन किसी में भी 50 फीसदी पानी नहीं है. वहीं 4.25 क्यूसेक क्षमता वाले 262 छोटे बांधों में से अधिकांश सूख चुके हैं और कुछ में औसतन 11 प्रतिशत पानी बचा है.

पश्चिमी राजस्थान बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, जालोर, जैसलमेर और जोधपुर सहित अन्य जिलों में पानी की भारी किल्लत है. राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं और हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं.

इसकी वजह यह कि राज्य सरकार की पेयजल परियोजनाएं भी धीमी गति से चल रही हैं तथा 54 में से 37 बड़ी परियोजनाएं तथा 437 में 119 ग्रामीण परियोजनाएं पूरी नहीं हो पाई हैं. इससे कई शहर और गांवों में पेयजल संकट गहरा रहा है. ऐसे में सभी की निगाहें मानसून पर टिकी हुई हैं.

Open in App

संबंधित खबरें

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

क्रिकेटSRH vs LSG: ऋषभ पंत ने दिखाया कमाल, अर्धशतक जड़कर लखनऊ को IPL 2026 की पहली जीत दिलाई

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं

क्राइम अलर्टबिहार के मोतिहारी जिले में जहरीली शराब कांड में मरने वालों की संख्या हुई 10, कई लोगों की स्थिति अभी भी गंभीर

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया

भारत अधिक खबरें

भारतबिहार में CM नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग को लेकर महिलाओं ने शुरू किया सत्याग्रह

भारतयूपी में स्थापना दिवस के जरिए लोगों के घर-घर पहुंचेगी भाजपा, लोगों को PM मोदी और योगी सरकार की उपलब्धियां बताएँगे पार्टी पदाधिकारी

भारतWATCH: बिहार के सारण जिले में जदयू के प्रखंड अध्यक्ष का एक लड़की के साथ अश्लील वीडियो वायरल, दोनों आपत्तिजनक अवस्था में थे खेत में एक लड़की नेता के पीछे भाग रही है

भारतबिहार में सत्ता हस्तांतरण को लेकर सियासी हलचल हुई तेज, 12 अप्रैल को नीतीश कुमार दे सकते हैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, भाजपा में मुख्यमंत्री को लेकर जारी है मंथन 

भारत'वे बंगाल को खत्म करना चाहते हैं': ममता बनर्जी ने BJP पर साधा निशाना, चुनावों से पहले किसानों के लिए अलग से बजट का वादा किया