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उत्तर प्रदेश: महिला उत्पीड़न और बकाया गन्ना मूल्य के मुद्दे सदन में हंगामा, विपक्ष ने किया वाकआउट

By भाषा | Updated: December 18, 2019 17:58 IST

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ठळक मुद्देउत्तर प्रदेश विधान परिषद में सूबे में बढ़ती बलात्कार और महिला उत्पीड़न की अन्य घटनाओं पर सदन में हंगामा विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद में बुधवार को सूबे में बढ़ती बलात्कार और महिला उत्पीड़न की अन्य घटनाओं तथा बकाया गन्ना मूल्य के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। सपा सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिये यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा के शासनकाल में पूरे प्रदेश में बलात्कार तथा अन्य प्रकार के महिला उत्पीड़न की घटनाएं बहुत बढ़ गयी हैं।

सपा सदस्य राजपाल कश्यप ने कहा कि उन्नाव में बलात्कार की शिकार एक लड़की को जलाकर मार डाला गया। फतेहपुर में भी युवती को जिंदा जलाने की घटना हुई। इसके अलावा कानपुर देहात में यौन उत्पीड़न के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर एक लड़की ने आत्महत्या कर ली। कांग्रेस सदस्य दीपक सिंह ने भी प्रदेश में महिलाओं के प्रति उत्पीड़न के मुद्दे पर प्रदेश सरकार के रवैये की आलोचना की।

सदन में सपा और विपक्ष के नेता अहमद हसन ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के उत्पीड़न का हाल यह है कि उनमें खौफ व्याप्त है। सबसे खराब बात यह है कि ऐसी घटनाओं को छुपाया जा रहा है। नेता सदन उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में बलात्कारी विधायकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी।

हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हो रही घटनाएं जायज हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं के प्रति अपराधों को दर्ज करने की कई व्यवस्थाएं की हैं। वूमेन पावर लाइन के जरिये 21 लाख 35 हजार शिकायतों पर काम किया गया है।

उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अपराधों में 18 प्रतिशत की कमी आयी है। इस पर सपा सदस्यों ने नेता सदन पर गलत आंकड़े पेश करने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया। इसके बाद बसपा सदस्य दिनेश चंद्रा ने कहा कि पार्टी प्रमुख मायावती के शासनकाल में बलात्कार के आरोपी विधायकों पर कड़ी कार्रवाई करके उदाहरण पेश किये गये लेकिन भाजपा सरकार महिला उत्पीड़न के मामलों पर उदासीनता दिखा रही है।

इसके साथ ही बसपा के सभी सदस्य सदन से बाहर चले गये। इसके फौरन बाद कांग्रेस सदस्य दीपक सिंह भी नेता सदन के जवाब से असंतुष्टि जताते हुए बहिर्गमन कर गये। इसके अलावा शून्यकाल के दौरान ही कांग्रेस के दीपक सिंह और नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने गन्ना किसानों के बकाये भुगतान के संबंध में कार्यस्थगन की सूचना दी।

सपा के नरेश उत्तम, शशांक यादव और बलराम यादव की इसी विषय पर दी गयी सूचना को भी इससे सम्बद्ध कर दिया गया। दीपक सिंह, शशांक यादव, नरेश उत्तम, संजय लाठर एवं नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किये।

गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने इस पर कहा कि सरकार गन्ना किसानों के बकाया मूल्य भुगतान के लिये प्रतिबद्ध है। इस पर सपा के सभी सदस्यों ने मंत्री पर गलत बयानी का आरोप लगाते हुये सदन के बीचोंबीच आकर नारेबाजी शुरू कर दी और सदन से बाहर चले गये। उसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने भी सदन से बहिर्गमन किया। 

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