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उत्तर प्रदेशः यूपी में हम तीसरी सबसे बड़ी पार्टी और इसे बढ़ाएंगे, अनुप्रिया पटेल बोलीं-आयुष्मान भारत योजना से 55 करोड़ लोगों को लाभ मिला

By शरद गुप्ता | Updated: April 13, 2022 18:07 IST

उत्तर प्रदेशः गठबंधन राजनीति में अलग-अलग विचारधारा के लोग साथ आकर सरकार बनाते हैं. आप अपने राजनीतिक मुद्दों को तब तक फोकस में नहीं ला सकते जब तक आप चुनकर न आएं.

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ठळक मुद्दे1995 में अपना दल का गठन करने के बाद भी दलित, पिछड़े, वंचित वर्ग के पक्ष में आवाज उठाई.भाजपा अपनी विचारधारा को मजबूत कर रही है और हम अपनी.हम एनडीए के सबसे छोटे पार्टनर थे.

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल 28 वर्ष की उम्र में अपना दल की अध्यक्ष बनीं और 33 वर्ष की उम्र में केंद्रीय मंत्री. पिछले माह में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनका दल तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरा.

अनुप्रिया को राजनीति अपने पिता और कांशीराम के निकट सहयोगी सोनेलाल पटेल से उनकी मृत्यु के बाद विरासत में मिली. लोकमत मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर (बिजनेस एवं पॉलिटिक्स) शरद गुप्ता ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर लंबी चर्चा की. मुख्य अंश...

इतनी कम उम्र में इतना कुछ पाने में किन चुनौतियां का सामना करना पड़ा?

मुझे राजनीति का कोई अनुभव नहीं था. जब लाखों लोगों की आकांक्षाएं आपके पीछे हों तो सीखने के अलावा कोई चारा नहीं रहता. बहुत गलतियां भी हुईं, लेकिन ईश्वर की कृपा से अभी तक का सफर बहुत अच्छा रहा. आज यूपी में हम तीसरी सबसे बड़ी पार्टी हैं. अब इसे और बड़ा करना है. यूपी बहुत बड़ा राज्य है. आगे बढ़ने की बहुत संभावनाएं हैं.

पिछली बार 11 सीटों पर लड़कर 9 जीती और इस बार 17 में से 12, आपकी सफलता की दर भाजपा से भी बेहतर कैसे है?

छोटी पार्टियों को अपना वजूद बचाने के लिए कहीं अधिक मेहनत और संघर्ष करना होता है. हम अपने समर्थकों और मतदाताओं से सतत संपर्क में रहते हैं. हमारे पास जनता के समर्थन के अलावा कोई और ताकत नहीं है. हमने हमेशा जनता से जुड़े मुद्दे उठाए और डगमगाए कभी नहीं. इसीलिए लोगों का हम पर भरोसा है.

अपना दल और भाजपा में कितनी वैचारिक समानता है?

गठबंधन राजनीति में अलग-अलग विचारधारा के लोग साथ आकर सरकार बनाते हैं. आप अपने राजनीतिक मुद्दों को तब तक फोकस में नहीं ला सकते जब तक आप चुनकर न आएं. हमने हमेशा सोशल जस्टिस को प्राथमिकता दी है और देते रहेंगे.

कांशीराम से शुरू होकर राम तक का सफर कैसा रहा?

हमारे लिए राम आस्था का विषय है राजनीति का नहीं. हमारे संस्थापक डॉक्टर सोनेलाल पटेल ने बसपा में रहते हुए भी और 1995 में अपना दल का गठन करने के बाद भी दलित, पिछड़े, वंचित वर्ग के पक्ष में आवाज उठाई. हम भी वही कर रहे हैं. भाजपा अपनी विचारधारा को मजबूत कर रही है और हम अपनी.

भाजपा के सहयोगी दल कमजोर हो जाते हैं, चाहे वह शिवसेना हो या अकाली दल. आपकी पार्टी कैसे मजबूत होती जा रही है?

शुरुआत में हम एनडीए के सबसे छोटे पार्टनर थे. अपनी पार्टी की मैं अकेली विधायक थी. तब से हम चार चुनाव साथ में लड़ चुके हैं. अब हमारे 12 विधायक और दो सांसद हैं. क्षेत्रीय दलों के पास संसाधनों से लेकर समर्थन तक बड़ी पार्टी के मुकाबले कम होते हैं. इसीलिए राजनीतिक कौशल और धैर्य अधिक चाहिए होता है. हमने हमेशा ध्यान शॉर्ट टर्म के बजाय लॉंग टर्म गेन पर रखा.

भाजपा परिवारवाद को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाती है. लेकिन पति आशीष पटेल सहित आपका पूरा परिवार राजनीति में है. क्या यह विसंगति नहीं है?

भाजपा का अलग एजेंडा है और हमारा अलग. हम नहीं मानते कि कांग्रेस पार्टी का इस देश को बनाने में कोई योगदान नहीं है. अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल जब तक जीवित थे, तब तक हमारे परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में नहीं था. उनकी अचानक मृत्यु के बाद एक ऐसी अकल्पनीय परिस्थिति खड़ी हो गई. हम तो पार्टी ही बंद करना चाहते थे लेकिन कार्यकर्ता अनाथ महसूस कर रहे थे. उनके दबाव में ही मैंने पार्टी की बागडोर संभाली.  

बतौर मंत्री आपकी दो बड़ी उपलब्धियां क्या रहीं?

स्वास्थ्य मंत्री मैंने आयुष्मान भारत योजना का क्रियान्वयन देखा. 55 करोड़ लोगों को इस योजना का लाभ मिला. दूसरा बड़ा काम हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलना रहा. आज यूपी के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज है. बेहतर इलाज के लिए किसी को लखनऊ या दिल्ली जैसे बड़े शहर में जाने की जरूरत ही नहीं है.

ब्लॉक स्तर तक पैथोलॉजी सेंटर खुल गए हैं. उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने कुटीर उद्योग और कृषि उत्पादों का रिकॉर्ड निर्यात किया है. हर जिले से एक प्रोडक्ट को निर्यात करने का लक्ष्य निर्धारित किया और हासिल किया. 400 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हमने 9 दिन पहले ही हासिल कर लिया.

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