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UP polls 2022: अपर्णा यादव समाजवादी पार्टी छोड़कर क्यों गईं भाजपा में ?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 19, 2022 17:51 IST

UP polls 2022: समाजवादी पार्टी (सपा) के संरक्षक और वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गईं।

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ठळक मुद्देसपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने परिवार की बहू को इसके लिए बधाई व शुभकामनाएं दीं। भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा से भी मुलाकात की। योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा, ‘‘अपर्णा जी का भाजपा परिवार में स्वागत हैं।’’

UP polls 2022: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से पहले अपर्णा यादव को पार्टी में शामिल करके यूपी बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से हिसाब बराबर कर लिया है। चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में भाजपा के बागी जिस तरह से समाजवादी पार्टी की शरण में जा रहे थे उससे सिर्फ प्रदेश बीजेपी ही नहीं बल्कि केंद्रीय नेतृत्व भी सकते में था। 

वहीं अखिलेश यादव इस पूरे मामले में जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ पर निशाना साध रहे थे, उससे भी कहीं न कहीं बीजेपी में एक बेचैनी थी, जो अपर्णा यादव के पार्टी में शामिल होने से थोड़ी शांत जरूर हुई होगी। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न है कि आखिर क्या वजह रही कि समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह की छोटी बहू और प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव ने साइकिल का साथ छोड़ा और हाथ में कमल थाम लिया। दरअसल अपर्णा यादव शुरू से ही अखिलेश यादव के लिए एक अबूझ पहेली बनी रहीं।

साधना गुप्ता की बहू अपर्णा यादव कभी खुद को मालती यादव की बहू डिंपल यादव के बरक्स खड़ा देखना चाहती थीं। मालूम हो कि साधना गुप्ता मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी और प्रतीक यादव की मां हैं, जबकि अखिलेश यादव मुलायम सिंह की पहली पत्नी मालती यादव के बेटे हैं।  

अपर्णा यादव साल 2017 के चुनाव में अखिलेश यादव के न चाहते हुए भी समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ीं। लेकिन बदकिस्मती रही कि वह भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी से 34 हजार वोटों से हार गईं। 

अपर्णा यादव ने अपनी हार के बाद परोक्षतौर पर आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के लोगों ने ही उन्हें चुनाव हराने का काम किया है। राजनीतिक दांव-पेंच चाहे जो रहे हो अपर्णा यादव अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव की तरह माननीय नहीं बन सकीं और उनका सपना टूट गया। 

साल 2017 में मिली हार और अखिलेश यादव से मिली उपेक्षा के कारण अपर्णा यादव उस पार्टी में अपनी राह तलाशने लगीं, जिनसे उन्हें चुनावी हार मिली थी। अपर्णा यादव ने अखिलेश यादव को अपना कद समझाने के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को अपने कान्हा उपवन में बुलाया, जहां वो गायों की सेवा करती हैं। 

यूपी के सीएम आदित्यानथ भी अपर्णा यादव के बुलावे पर लखनऊ के सरोजनी नगर स्थित उनकी गोशाला में पूरे राजनीतिक दल-बल के साथ पहुंचे, जिसमें डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और मंत्री स्वाति सिंह सहित लखनऊ बीजेपी के कई बड़े नेता शामिल थे। इस घटना ने सियासी हल्कों में शोर मचा दिया कि मुलायम सिंह की छोटी बहु भाजपा में शामिल हो सकती हैं लेकिन उस समय ऐसा कुछ नहीं हुआ। 

सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव को यह बात जरूर नागवार गुजरी लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अपर्णा खुले तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी की तारीफ करने लगीं, जिसके कारण समाजवादी पार्टी में उनका विरोध होने लगा। इसी बीच अपर्णा यादव ने यूपी बीजेपी के प्रमुख एजेंडे में शामिल राम मंदिर के निर्माण में कार्य कर रहे ट्रस्ट को 11 लाख रुपये दान देकर स्पष्ट कर दिया कि वो किसके करीब हैं और किससे दूर हैं।

साल 2017 में सपा के टिकट पर भाजपा से चुनाव हारने वाली अपर्णा यादव अब बीजेपी के लिए कितनी फायदेमंद साबित होती हैं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन बीजेपी में अपर्णा की एंट्री से हलचल होनी तय है क्योंकि लखनऊ कैंट से विधायक रीता बहुगुणा जोशी ने हाल ही में चुनाव न लड़ने की इच्छा जाहिर की थी।

माना जा रहा है कि रीता बहुगुणा जोशी बेटे मयंक जोशी के लिए इस सीट से टिकट के लिए लामबंदी कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा की भी नजर इस सीट पर है। अब देखना यह है कि बीजेपी आलाकमान किसे जिताऊ कैंडिडेट मानते हुए चुनावी टिकट थमाता है, लेकिन इस मसले पर पार्टी में रस्साकशी होनी तय है। 

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