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मोदी सरकार ने बदला मुगलसराय जंक्‍शन का नाम, अब चंद पन्नों में सिमट जाएगा इसका इतिहास

By ऐश्वर्य अवस्थी | Updated: June 5, 2018 10:50 IST

इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह जाएगा अब मुगल सराए रेलवे स्टेशेन। इस अब स्टेशन को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के नाम से जाना जायेगा।

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अब मुगल सराय रेलवे स्टेशेन इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह जाएगा। अब इस स्टेशन को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के नाम से जाना जायेगा। इस स्टेशन के नाम बदलने की जब से बात कही गई तब से लगातार विरोध किया जा रहा था, लेकिन इसके बावजूद भी नरेंद्र मोदी सरकार ने आखिरकार नाम बदलने पर मुहर लगा दी। सालों से अपनी पहचान बनाने वाला मुगल सराय रेलवे स्टेशन अब अपनी पहचान खोकर एक नए नाम जाना जाएगा। ऐसे में आपको बताते हैं कि क्या है मुगल सराय रेलवे स्टेशन का इतिहास...

हुमायूं के शासन में बना रेलवे स्टेशन 

कहते हैं 1555 में हुमायूं के शासनकाल के समय शेरशाह सूरी ने यहां पर दो सराय बनवाए थे। ये सराय सेना के ठहरने के लिए बनवाए गए थे, जिसको बाद में मुगलसराय नाम मिल गया और इसी के आधार पर बाद में स्टेशन को भी ये नाम मिला। कहते हैं फिर बाद में शेरशाह सूरी के बादशाह बनने पर इस जगह की चारों ओर प्रतिष्ठा बढ़ी। 

ये है मुगलसराय का इतिहास 

मुगलकाल में शेरशाह सूरी ने इस जिले में दो सराय बनवाए थे, एक अलीनगर और दूसरा गल्ला मंडी के पास और यही हो गया मुगलसराय। कहते हैं जब 18वीं शताब्दी में अंग्रेज अफसर मिस्टर ओवन आए तो उनके आने के बाद इसका नाम बदलकर ओवेनगंज रखा, लेकिन मान्यता इसको सराय और मुगलों के नाम से मिली। इसके बाद लॉर्ड एल्गिन के समय में 1862 में मुगलसराय से दानापुर तक रेल लाइन पहली बार बिछाई गई और फिर बाद में 1 जनवरी 1864 को  मुगलसराय से मिर्जापुर के बीच रेलवे की सुविधा शुरू की गई थी। मुगलसराय स्टेशन में ही एशिया की सबसे बड़ी यार्ड है।

पंडित दीनदयाल का यहां मिला था शव

पंडित दीन दयाल उपाध्याय का शव 11 फरवरी 1968 को मुगलसराय स्टेशन के यार्ड में ही संदिग्ध परिस्तिथियों में मिला था, जिसके बाद कई तमाम जांचें की गईं और उसके बाद आज भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मौत की असली वजह सामने नहीं आ पाई। ऐसे में बीजेपी पंडित दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि देने के लिए इस जगह का नाम बदलर उनके नाम पर रखना चाहती थी जिस पर अब मुहर लग गई है।

बीजेपी नेता ने नाम बदलने की लगाई गुहार

ऐतिहासिक मुगलसराय को अब सिर्फ इतिहास के पन्नों में ही खोजा जा सकेगा। रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के पीछे चदौली के सांसद और वर्तमान में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डाक्टर महेंद्र नाथ पांडेय हैं। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार को नए नाम का सुझाव सौंपा था जिस पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने अपनी सहमति दे दी।

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